चर्चा में क्यों?
हाल ही में वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में संबोधन के दौरान जानकारी देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक-सिडबी ने देश भर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों - एमएसएमई को ऋण प्रदान करने में सुधार संबंधी कई प्रमुख पहल की है। आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 के तहत पात्र एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज के साथ 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण की व्यवस्था की गई है।
आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 के बारे में
- केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम–ईसीएलजीएस 5.0) को मई 2026 में स्वीकृति प्रदान की गई।
उद्देश्य:
- इस योजना का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 100% तथा गैर-एमएसएमई और एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90% तक की क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध कराना है।
- यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा मेंबर लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस (एमएलआई) को प्रदान की जाती है।
- योजना का उद्देश्य वेस्ट एशिया संकट के कारण उत्पन्न अल्पकालिक लिक्विडिटी की समस्या से प्रभावित पात्र उधारकर्ताओं को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना तथा ऋण चूक (डिफॉल्ट) की स्थिति में ऋणदाताओं को गारंटी सुरक्षा प्रदान करना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
पात्र उधारकर्ता
- ऐसे एमएसएमई एवं गैर-एमएसएमई, जिनकी 31 मार्च 2026 तक कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की मौजूदा सीमा एवं बकाया ऋण सुविधा उपलब्ध थी तथा जिनके खाते स्टैंडर्ड एसेट्स की श्रेणी में थे।
- शेड्यूल्ड पैसेंजर एयरलाइंस भी इस योजना के अंतर्गत पात्र हैं, बशर्ते उनकी ऋण सुविधाएँ 31 मार्च 2026 तक मानक श्रेणी में रही हों।
गारंटी कवरेज
- एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी।
- गैर-एमएसएमई तथा एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी।
गारंटी शुल्क
- इस योजना के अंतर्गत कोई गारंटी शुल्क नहीं लिया जाता है।
सहायता की सीमा
- एमएसएमई एवं गैर-एमएसएमई को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में उपयोग की गई अधिकतम वर्किंग कैपिटल का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण प्रदान किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये है।
- एयरलाइन क्षेत्र को उपयोग की गई वर्किंग कैपिटल का 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति उधारकर्ता 1,500 करोड़ रुपये है। यह सुविधा निर्धारित शर्तों के अधीन उपलब्ध है।
ऋण अवधि
- एमएसएमई एवं गैर-एमएसएमई (एयरलाइन क्षेत्र को छोड़कर):
- प्रथम ऋण वितरण की तिथि से 5 वर्ष।
- इसमें 1 वर्ष की मोरेटोरियम अवधि शामिल है।
- एयरलाइन क्षेत्र:
- प्रथम ऋण वितरण की तिथि से 7 वर्ष।
- इसमें 2 वर्ष की मोरेटोरियम अवधि शामिल है।
गारंटी कवरेज की अवधि
- गारंटी की अवधि ऋण अवधि (लोन टेनर) के समान (को-टर्मिनस) रहती है।
योजना की अवधि
- यह योजना एनसीजीटीसी द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जाने की तिथि से 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत सभी पात्र ऋणों पर लागू है।
महत्त्व एवं प्रभाव:
- यह योजना वेस्ट एशिया संघर्ष से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच व्यवसायों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।
- इसके माध्यम से उद्योगों को अपने संचालन को सुचारु बनाए रखने, रोजगारों की सुरक्षा करने तथा सप्लाई चेन की निरंतरता बनाए रखने में सहायता मिल रही है।
- यह विशेष रूप से एमएसएमई और एयरलाइन क्षेत्र की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल आवश्यकताओं की पूर्ति में बैंकों एवं फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को प्रोत्साहित कर रही है।
- समय पर लिक्विडिटी उपलब्ध होने से व्यवसायों की निरंतरता बनी रहती है तथा रोजगार हानि की संभावना कम होती है।
- साथ ही, यह योजना घरेलू उत्पादन को बनाए रखने तथा भारतीय आर्थिक इकोसिस्टम की रेज़िलिएंस को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।