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ईवी बैटरी सुरक्षा

संदर्भ

हाल ही में, इंदौर में एक आवासीय भवन में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग पॉइंट से भीषण आग लग गई जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। 

EV बैटरियों की सुरक्षा 

लिथियम-आयन बैटरियां: व्यापक उपयोग और दक्षता

अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहनों में लिथियम-आयन बैटरियाँ लगाई जाती हैं जिनका उपयोग स्मार्टफोन एवं लैपटॉप में भी होता है। ये अधिक ऊर्जा संग्रह करने में सक्षम होती हैं और सामान्य संचालन में सुरक्षित मानी जाती हैं।

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) का महत्व

  • हर EV में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) मौजूद होता है जो बैटरी के तापमान को नियंत्रित करता है और चार्जिंग तथा डिस्चार्जिंग के दौरान उसे सुरक्षित सीमा में बनाए रखता है। 
  • थर्मल रनअवे का खतरा : EV बैटरियों में एक प्रमुख जोखिम थर्मल रनअवे का होता है, जिसमें-
    • किसी एक सेल का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है 
    • यह गर्मी अन्य सेल तक फैलती है 
  • परिणामस्वरूप एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है जिससे कूलिंग सिस्टम असफल हो सकता है। 

आग एवं विषैली गैसों का जोखिम

इस प्रक्रिया के दौरान बैटरी से ज्वलनशील और जहरीली गैसें (जैसे- हाइड्रोजन फ्लोराइड) निष्कासित हो सकती हैं जो आग को अधिक खतरनाक बना देती हैं।

मुख्य निष्कर्ष 

सामान्यतः EV बैटरियाँ सुरक्षित होती हैं किंतु थर्मल रनअवे जैसी दुर्लभ घटनाएँ गंभीर आग का कारण बन सकती हैं। 

थर्मल रनअवे के प्रमुख कारण 

भौतिक क्षति (Physical Damage)

तेज झटकों, विशेषकर वाहन के निचले हिस्से पर लगने वाले आघात से बैटरी पैक को नुकसान हो सकता है। इससे सेल में विकृति या छेद होकर आंतरिक शॉर्ट सर्किट और अधिक गर्मी उत्पन्न हो सकती है। 

ओवरचार्जिंग और दोषपूर्ण चार्जर

  • निर्धारित सीमा से अधिक चार्जिंग बैटरी को अस्थिर बना सकती है 
  • गैर-मानक या खराब चार्जर का उपयोग जोखिम को बढ़ाता है 
  • असुरक्षित व्यवस्था में बार-बार रातभर चार्जिंग करना खतरे को और बढ़ा देता है 

निर्माण संबंधी दोष

कभी-कभी बैटरी सेल के भीतर सूक्ष्म धात्विक दोष पॉजिटिव और नेगेटिव इलेक्ट्रोड को जोड़ देते हैं जिससे अचानक अत्यधिक करंट प्रवाहित होता है और तापमान तेजी से बढ़ता है। 

विद्युत प्रणाली की कमजोरी

पुरानी या कमज़ोर वायरिंग तथा एक्सटेंशन केबल लगातार उच्च करंट झेलने में सक्षम नहीं होते हैं जिससे चार्जिंग के दौरान ओवरहीटिंग की स्थिति बन सकती है। 

बाह्य परिस्थितियों का प्रभाव 

उच्च तापमान और तापीय दबाव

भारत जैसे देशों में गर्मी के मौसम में अधिक तापमान बैटरी के कूलिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डालता है। धूप में वाहन खड़ा करना या लंबी दूरी तय करने के तुरंत बाद चार्ज करना जोखिम बढ़ा सकता है। 

बैटरी की आयु एवं रखरखाव

समय के साथ बैटरी की गुणवत्ता घटती है जिससे जोखिम बढ़ सकता है। नियमित जांच न कराने या चेतावनी संकेतों को अनदेखा करने से समस्याएँ गंभीर हो सकती हैं। 

बाढ़ का खतरा

पानी बैटरी पैक में प्रवेश कर शॉर्ट सर्किट पैदा कर सकता है। कई मामलों में बाढ़ के बाद कुछ दिनों के भीतर EV में आग लगने की घटनाएँ देखी गई हैं। 

EV और पेट्रोल वाहनों में आग की तुलना

  • EV को पेट्रोल वाहनों की तुलना में अधिक खतरनाक नहीं माना जाता है क्योंकि पेट्रोल वाहनों में आग की घटनाएँ अधिक होती हैं। हालाँकि, EV बैटरी में लगी आग अधिक तीव्र और उच्च तापमान वाली होती है। 
  • इसे बुझाना कठिन होता है (ऑक्सीजन के उत्सर्जन के कारण) और इसको नियंत्रित करने के लिए अधिक पानी या विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है  

बाह्य कारकों की भूमिका 

  • आग के खतरे को बढ़ाने वाले कुछ अन्य तत्व भी हो सकते हैं -
    • आसपास LPG सिलेंडर की मौजूदगी 
    • पास में खड़े अन्य वाहन 
    • बिजली आपूर्ति बाधित होना, जिससे सुरक्षा प्रणालियां (जैसे- इलेक्ट्रॉनिक लॉक) प्रभावित हो सकती हैं  

सुरक्षा बढ़ाने के उपाय

उद्योग स्तर पर पहल 

  • कूलेंट के माध्यम से ऊष्मा को नियंत्रित करने वाले उन्नत कूलिंग सिस्टम 
  • कूलेंट का वाष्पीकरण बेहतर हीट ट्रांसफर सुनिश्चित करने वाली नई तकनीकें 
  • सुरक्षित बैटरी डिजाइन: 
  • सॉलिड-स्टेट बैटरियों का विकास 
  • आग फैलने से रोकने के लिए सेल के बीच सुरक्षा अवरोध (फायरवॉल) 

उपयोगकर्ताओं के लिए सावधानियाँ 

  • केवल अधिकृत (Manufacturer-approved) चार्जर का ही उपयोग करें 
  • असुरक्षित व्यवस्था में बिना निगरानी के या रातभर चार्जिंग से बचें 
  • घर की विद्युत प्रणाली की क्षमता सुनिश्चित करें 
  • दुर्घटना के बाद बैटरी की जांच अवश्य कराएं 
  • लंबी ड्राइव के बाद चार्ज करने से पहले बैटरी को ठंडा होने दें 
  • चार्जिंग क्षेत्र को साफ एवं अवरोध-मुक्त रखें  

भारत में कड़े सुरक्षा मानक

भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards: BIS) ने वर्ष 2023 में EV बैटरी सुरक्षा मानकों को संशोधित किया। 

AIS-156 मानकों के अनुसार

  • बैटरियों को हीट प्रोपेगेशन टेस्ट से गुजरना अनिवार्य है।
  • आग की स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने के लिए कम-से-कम 5 मिनट का समय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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