New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

गिग वर्कर शिकायत निवारण प्रणाली

संदर्भ  

  • अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस यानी 1 मई 2026 के अवसर पर कर्नाटक सरकार ने प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स के लिए एक विशेष शिकायत निवारण तंत्र शुरू करने की घोषणा की। सरकार का दावा है कि यह भारत का पहला सरकारी समर्थित तंत्र है, जिसके जरिए गिग वर्कर्स अपनी समस्याएं सीधे सरकारी प्रणाली में दर्ज करा सकेंगे। 
  • यह व्यवस्था राज्य की एकीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (आईपीजीआरएस) के माध्यम से संचालित होगी, जो पहले से नागरिकों की सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए इस्तेमाल की जाती रही है। अब इसमें गिग वर्कर्स को भी शामिल कर लिया गया है। 

शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया 

  • नई व्यवस्था के तहत गिग वर्कर्स वेतन भुगतान, कार्य परिस्थितियों, अकाउंट निलंबन, प्लेटफॉर्म से निष्कासन, अनुचित दंड, भुगतान रोकने, भेदभाव या असुरक्षित कार्यस्थल जैसी समस्याओं को लेकर शिकायत दर्ज करा सकेंगे। 
  • कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण) अधिनियम के तहत प्रत्येक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के लिए आंतरिक विवाद समाधान समिति (आईडीआरसी) बनाना अनिवार्य किया गया है। 
  • आईपीजीआरएस पर दर्ज शिकायतें स्वतः संबंधित प्लेटफॉर्म की आईडीआरसी को भेज दी जाएंगी। 

विवाद निपटान की समयसीमा  

  • नियमों के अनुसार, समिति को 15 कार्य दिवसों के भीतर विवाद सुलझाने का प्रयास करना होगा और अधिकतम 45 दिनों में अंतिम फैसला देना होगा। 
  • यदि कोई पक्ष इस निर्णय से संतुष्ट नहीं होता, तो वह 30 दिनों के भीतर मामला कर्नाटक गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के समक्ष ले जा सकेगा। 

गिग वर्कर्स के संदर्भ में प्रासंगिकता 

  • अब तक अधिकांश डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने आंतरिक शिकायत तंत्र के जरिए विवादों का निपटारा करते थे, लेकिन इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। यद्यपि कई गिग वर्कर्स का आरोप था कि कंपनियां उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर देती हैं या बिना कारण अकाउंट बंद कर देती हैं। 
  • सरकार का मानना है कि नई प्रणाली शिकायत प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और संस्थागत बनाएगी। साथ ही, इससे औपचारिक श्रम ढांचे से बाहर काम कर रहे लाखों गिग वर्कर्स को कानूनी संरक्षण भी मिलेगा। 

विभिन्न प्लेटफॉर्म शामिल 

  • सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, नम्मा यात्री और युलू जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही अपने आईडीआरसी विवरण को सरकारी पोर्टल से जोड़ चुके हैं। वहीं, अमेज़न समेत कई अन्य कंपनियां भी इस प्रक्रिया में हैं।  

गिग वर्कर्स का डेटा  

  • सरकार ने प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने साथ जुड़े गिग वर्कर्स का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। 
  • इसमें नाम, आयु, मोबाइल नंबर, आधार संख्या, यूएएन और बैंक खाते जैसी जानकारी शामिल है।
  • अब तक करीब 12 प्लेटफॉर्म राज्य में सक्रिय लगभग 12 लाख गिग वर्कर्स का डेटा सरकार को सौंप चुके हैं। हालांकि, कई कर्मचारी एक से अधिक प्लेटफॉर्म से जुड़े होने के कारण आंकड़ों में दोहराव की संभावना बनी हुई है। इसे दूर करने के लिए सरकार प्रत्येक गिग वर्कर को एक विशिष्ट पहचान संख्या देने की तैयारी कर रही है। 

सामाजिक सुरक्षा कोष का निर्माण 

  • फरवरी 2026 में राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि गिग वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए एग्रीगेटर कंपनियों से प्रत्येक लेनदेन पर 1 प्रतिशत तक कल्याण शुल्क लिया जाएगा।
  • अलग-अलग सेवाओं के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा तय की गई है। खाद्य और किराना डिलीवरी सेवाओं के लिए यह सीमा 50 पैसे प्रति लेनदेन रखी गई है। वहीं, राइड-हेलिंग सेवाओं में वाहन श्रेणी के अनुसार 50 पैसे से 1 रुपये तक शुल्क तय किया गया है। लॉजिस्टिक्स और ई-मार्केटप्लेस सेवाओं के लिए भी अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
  • यह शुल्क अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है, जबकि इसकी पहली वसूली जुलाई 2026 से शुरू होगी। 

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर सरकार का ध्यान  

  • कल्याण शुल्क से प्राप्त राशि कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स फंड में जमा की जाएगी। इसी फंड से गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चलाई जाएंगी। 
  • सरकार फिलहाल कई योजनाओं पर विचार कर रही है, जिनमें जीवन बीमा, दुर्घटना सहायता, विकलांगता लाभ, स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व सहायता और वृद्धावस्था सुरक्षा शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन प्रस्तावों पर आगामी बोर्ड बैठक में चर्चा की जाएगी।

पहल का महत्व 

  • अब तक गिग वर्कर्स पूरी तरह से कंपनियों के आंतरिक तंत्र पर निर्भर थे, जहाँ अक्सर उनकी सुनवाई नहीं होती थी। कर्नाटक सरकार का यह कानून प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। सरकार एक केंद्रीकृत सूत्रधार के रूप में कार्य करेगी, जिससे औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर के इन श्रमिकों को कानूनी सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां मिल सकेंगी।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR