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CPEC 2.0 को मिलेगी रफ्तार: ग्वादर बंदरगाह के विकास पर चीन और पाकिस्तान सहमत

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में चीन और पाकिस्तान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China-Pakistan Economic Corridor-CPEC) के अगले चरण, अर्थात् CPEC 2.0, को तेज गति से आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों ने विशेष रूप से ग्वादर बंदरगाह के विकास, औद्योगिक सहयोग, कृषि आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। 
  • यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की प्रमुख परियोजनाओं को पुनः गति देने का प्रयास कर रहा है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) क्या है ?

  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की प्रमुख फ्लैगशिप परियोजना है, जिसकी घोषणा वर्ष 2015 में की गई थी। 
  • यह परियोजना पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत स्थित ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र (Xinjiang Uyghur Autonomous Region-XUAR) के काश्गर शहर से जोड़ती है। 
  • इसके अंतर्गत सड़क, रेल, ऊर्जा, बंदरगाह, दूरसंचार और औद्योगिक अवसंरचना का व्यापक विकास किया जा रहा है।

ग्वादर बंदरगाह क्यों है महत्वपूर्ण ?

  • अरब सागर के तट पर स्थित ग्वादर बंदरगाह CPEC का केंद्रबिंदु है। वर्ष 2016 में इसका औपचारिक उद्घाटन किया गया था। 
  • यह बंदरगाह पश्चिम एशिया, अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों के निकट स्थित है। 
  • चीन के लिए यह बंदरगाह ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के वैकल्पिक मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण है, जबकि पाकिस्तान इसे आर्थिक विकास, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के प्रमुख साधन के रूप में देखता है।

CPEC 2.0 का फोकस

  • CPEC के पहले चरण में मुख्य रूप से ऊर्जा और परिवहन अवसंरचना पर ध्यान दिया गया था। वहीं, CPEC 2.0 के तहत औद्योगिक विकास, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs), कृषि सहयोग, सूचना प्रौद्योगिकी, खनन, डिजिटल कनेक्टिविटी और हरित विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। 
  • इसका उद्देश्य पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल बनाना है।

भारत की आपत्ति

  • भारत CPEC का लगातार विरोध करता रहा है क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से होकर गुजरती है। 
  • भारत का मानना है कि यह क्षेत्र उसका अभिन्न अंग है और इस क्षेत्र में किसी भी तीसरे देश की परियोजना उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती है। 
  • इसी कारण भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में भाग नहीं लिया है।

सामरिक और भू-राजनीतिक महत्व

  • CPEC को केवल आर्थिक परियोजना के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह चीन-पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ है। 
  • यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की उपस्थिति को मजबूत करती है और दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करती है। 
  • इसलिए CPEC भारत-चीन संबंधों, भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

निष्कर्ष

CPEC 2.0 को गति देने का निर्णय चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है। हालांकि यह परियोजना दोनों देशों के लिए विकास और संपर्क का माध्यम है, लेकिन भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर इसके प्रभाव के कारण यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।

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