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भारत-आसियान संबंध : सहयोग, प्रगति एवं साझा दृष्टिकोण

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार)

संदर्भ

भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन (ASEAN) के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक मजबूत हुए हैं। वर्ष 2025 में कुआलालंपुर में आयोजित 22वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन ने इस साझेदारी को और मजबूती दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि 21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है।

भारत-आसियान द्विपक्षीय संबंध

  • भारत-आसियान संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से गहरे जुड़े हुए हैं।
  • आसियान के 10 देशों के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी वर्ष 2022 में स्थापित हुई थी।
  • भारत-आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • दोनों पक्ष व्यापार, शिक्षा, तकनीक, समुद्री सुरक्षा, पर्यटन एवं संस्कृति जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं। 
  • भारत का ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) आसियान देशों के साथ संबंधों को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक प्रमुख कड़ी है।

22वां आसियान-भारत शिखर सम्मेलन 

  • हाल ही में आयोजित 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते (AITIGA) को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।
  • इस समझौते से भारत एवं आसियान के बीच व्यापार व निवेश को नई गति मिलेगी।
  • इसके साथ ही ‘2026-2030 कार्य योजना (Plan of Action)’ पर भी सहमति बनी, जो शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल सहयोग एवं तकनीकी नवाचार पर केंद्रित है।

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन

  • प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आसियान को भारत का ‘सांस्कृतिक साझेदार (Cultural Partner)’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत-आसियान साझेदारी ‘वैश्विक स्थिरता एवं विकास की मजबूत नींव’ बनती जा रही है।
  • उन्होंने आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026 (ASEAN-India Year of Maritime Cooperation) की घोषणा की।
  • प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार भारत व आसियान ग्लोबल साउथ के साथी हैं और दोनों को डिजिटल समावेशन, खाद्य सुरक्षा एवं आपदा राहत में सहयोग बढ़ाना चाहिए।
  • उन्होंने आतंकवाद के खतरे पर भी चिंता जताई और एकजुट होकर उसका मुकाबला करने का आह्वान किया।

मुख्य बिंदु

  • भारत और आसियान का व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़ रहा है।
  • AITIGA समझौता दोनों के बीच आर्थिक संभावनाओं को ‘पूर्ण रूप से उजागर’ कर सकता है।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड की रानी मां के निधन पर संवेदना व्यक्त की।
  • भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

सहयोग के क्षेत्र

भारत और आसियान निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं-

  1. समुद्री सुरक्षा और आपदा राहत कार्य
  2. डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार
  3. शिक्षा, संस्कृति एवं पर्यटन का आदान-प्रदान
  4. हरित ऊर्जा, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहयोग
  5. आतंकवाद और साइबर अपराध से संयुक्त संघर्ष

आसियान शिखर सम्मेलन, 2025

  • यह शिखर सम्मेलन 26 अक्टूबर, 2025 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित हुआ।
  • मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इसकी सह-अध्यक्षता की।
  • इस सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति सहित कई प्रमुख नेता भी शामिल हुए।
  • इसकी थीम ‘Shared Prosperity and Stability in the Indo-Pacific (हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समृद्धि एवं स्थिरता) रही। 
  • भारत ने इस अवसर पर अपनी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को अधिक मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

निष्कर्ष

भारत-आसियान संबंध आज सांस्कृतिक, आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह कथन ‘21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है’ साझी प्रगति और शांति की दिशा में दोनों के संकल्प को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और विकास का प्रमुख आधार बन सकती है।

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