संदर्भ
- बेल्जियन प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर (Bart De Wever) की हालिया भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। दो दशकों में किसी बेलजियन प्रधानमंत्री की यह पहली भारत यात्रा है, जिसने पारंपरिक रूप से व्यापार और निवेश तक सीमित रहे संबंधों को रक्षा, अत्याधुनिक तकनीक और रणनीतिक सहयोग के एक व्यापक आयाम में बदल दिया है।
मजबूत द्विपक्षीय और आर्थिक आधार
- भारत और बेल्जियम के बीच घनिष्ठ आर्थिक और राजनयिक संबंध रहे हैं, जिसकी नींव 1997 में स्थापित 'भारत-बेल्जियम-लक्जमबर्ग आर्थिक संघ संयुक्त आयोग' जैसे संस्थागत तंत्रों पर टिकी है। वैश्विक हीरा व्यापार में एंटवर्प की प्रमुख भूमिका के कारण बेल्जियम भारत के लिए एक बेहद अहम साझेदार रहा है। आर्थिक मोर्चे पर भी यह साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है:
- वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 13.01 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
- अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में बेल्जियम का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगभग 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
- वर्तमान में दोनों देश पारंपरिक हीरा व्यापार से आगे बढ़कर फिनटेक, सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने आर्थिक संबंधों में विविधता ला रहे हैं।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग में ऐतिहासिक प्रगति
- प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान रक्षा और सुरक्षा सहयोग सबसे बड़े केंद्र बिंदु के रूप में उभरे। दोनों देशों ने संरचित रक्षा सहयोग के लिए एक 'आशय पत्र' (Letter of Intent) का आदान-प्रदान किया है, जिसके तहत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जाएगा:
- सैन्य प्रशिक्षण और आदान-प्रदान
- अनुसंधान और विकास (R&D)
- संयुक्त सैन्य अभ्यास और संगोष्ठी
- समुद्री सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग
- अपराध से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करना और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय
- इस दिशा में दोनों देशों के बीच उद्योग-स्तर पर भी गहरी सहभागिता देखने को मिली, जहां लगभग 15 बेलजियन रक्षा कंपनियों ने भारतीय रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया।
रक्षा औद्योगिक सहयोग और प्रमुख परियोजनाएं
चर्चाओं के दौरान ड्रोन, रॉकेट, गोला-बारूद, बारूदी सुरंग-निवारक प्रणालियां (mine-countermeasure systems), टैंक, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों में भारी अवसरों की पहचान की गई। कुछ प्रमुख औद्योगिक साझेदारियां इस प्रकार हैं:
- गोला-बारूद उत्पादन: न्यू लाचौसे (New Lachaussée) और टेम्बो क्लासिक इंजीनियरिंग (Tembo Classic Engineering) 50 मिलियन की परियोजना के तहत लगभग 100 मिलियन राउंड की वार्षिक क्षमता वाली गोला-बारूद उत्पादन लाइन स्थापित करेंगे।
- स्वायत्त समुद्री प्रणालियां: एक्सएक्सिल बेल्जियम (Exail Belgium) और लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro) बारूदी सुरंग-निवारक जहाजों के लिए स्वायत्त प्रणालियों पर सहयोग कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत 12 जहाजों से होगी और भविष्य में इसके 59 जहाजों तक विस्तार की संभावना है।
अन्य प्रमुख साझेदारियों में 70 मिमी रॉकेट असेंबली, हथियार और काउंटर-ड्रोन प्रणालियां, अर्जुन टैंकों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम, जोरावर लाइट टैंक, वायु-रक्षा सॉफ्टवेयर और समुद्री इंजन शामिल हैं।
व्यापार सुविधा, सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा
- व्यापार और निवेश को गति देने के लिए भारत ने बेलजियन कंपनियों हेतु 'निवेश त्वरित-ट्रैक तंत्र' (Investment Fast-Track Mechanism) स्थापित किया है और 'भारत-बेल्जियम व्यापार मंच' को नियमित बनाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
अन्य साझा सहयोग:
- सेमीकंडक्टर: लचीली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए सेमीकंडक्टर के बढ़ते महत्व को देखते हुए दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की है।
- नवीकरणीय ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए एक नए नवीकरणीय ऊर्जा समझौते की दिशा में काम करने पर भी सहमति बनी है।
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मुद्दे
- समुद्री सुरक्षा इस साझेदारी का एक अन्य महत्वपूर्ण उभरता हुआ क्षेत्र है। भारत स्वायत्त समुद्री प्रणालियों, पानी के नीचे के रोबोटिक्स, उन्नत सेंसर और बंदरगाहों, पाइपलाइनों व सबसी डेटा केबलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रहा है।
- वैश्विक मंच पर, भारत और बेल्जियम ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर चर्चा करते हुए संवाद, कूटनीति (diplomacy), संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया। साथ ही, सुरक्षित और निर्बाध समुद्री नौवहन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
निष्कर्ष
- भारत-बेल्जियम संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। बेल्जियम की उन्नत यूरोपीय प्रौद्योगिकियां और भारत की विशाल विनिर्माण क्षमता व बाजार एक-दूसरे के पूरक साबित हो रहे हैं। यह बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय हितों को साधता है, बल्कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है।