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भारत जैव अर्थव्यवस्था रिपोर्ट 2026

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय मंत्री ने नई दिल्ली में बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (Biotechnology Industry Research Assistance Council: BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारत जैव अर्थव्यवस्था रिपोर्ट (India BioEconomy Report: IBER) 2026 का अनावरण किया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बायोइकॉनॉमी 2025 में $195.3 बिलियन तक पहुँच गई है जो अब राष्ट्रीय जी.डी.पी. में लगभग 5% का योगदान दे रही है। 

भारत जैव अर्थव्यवस्था रिपोर्ट (IBER) 2026 का परिचय 

  • IBER 2026 एक वार्षिक विस्तृत दस्तावेज है जिसे जैव-प्रौद्योगिकी संचालित उद्यम संघ (Association of Biotechnology Led Enterprises: ABLE) ने तैयार किया है। 
  • यह रिपोर्ट भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वृद्धि, विभिन्न सेक्टरों में योगदान और स्टार्टअप इकोसिस्टम का मापदंड है तथा देश की दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों की प्रगति को ट्रैक करती है।  

बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC)

बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) धारा 8 एवं अनुसूची B वाली एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। इसे भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा एक इंटरफ़ेस एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है ताकि उभरते जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों को मजबूत किया जा सके और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक उत्पाद विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रणनीतिक अनुसंधान एवं नवाचार करने में सक्षम बनाया जा सके।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ 

  • रिकॉर्ड बाजार आकार : भारत की बायोइकॉनॉमी 2025 में $29.6 बिलियन की वृद्धि के साथ $195.3 बिलियन तक पहुँची।
  • उच्चतम वृद्धि दर : इस क्षेत्र ने 2025 में 18% की वृद्धि दर दर्ज की है जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक है।
  • जी.डी.पी. में योगदान : बायोइकॉनॉमी का राष्ट्रीय जी.डी.पी. में हिस्सा 4.8% तक पहुँच गया है जो पिछले वर्षों में 4.2–4.3% था। 
  • अग्रणी सेक्टर : जैव औद्योगिक (BioIndustrial) खंड सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा है जिसका मूल्य $90.2 बिलियन है।
  • बायोफार्मा (BioPharma) का जोर : यह खंड $64.5 बिलियन का हो गया और बायोसिमिलर व पेप्टाइड निर्माण में भविष्य में तेज़ी की उम्मीद है।
  • बायोसर्विसेज (BioServices) व कृषि : बायोसर्विसेज ने $26 बिलियन व बायोएग्री (BioAgri) ने $14.6 बिलियन का योगदान किया। 
  • GCC का विस्तार : भारत में अब 150 से अधिक हेल्थकेयर एवं लाइफ साइंसेज ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (वैश्विक क्षमता केंद्र: GCCs) हैं जो 3 लाख से अधिक पेशेवरों को रोजगार प्रदान करते हैं।
  • स्टार्टअप उछाल : पंजीकृत बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 11,855 हो गई, जिनमें 2025 में अकेले 1,780 नए स्टार्टअप्स स्थापित हुए। 

भारत की बायोइकॉनॉमी में अवसर 

  • बायोसिमिलर और पेप्टाइड निर्माण: प्रमुख दवा पेटेंट्स (जैसे- GLP-1 थेरेपी) की समाप्ति से भारत सस्ते बायोसिमिलर बनाने और वैश्विक फार्मा बाजार में नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त कर सकता है।
  • GCC का विस्तार: भारत बैकएंड भूमिकाओं से उन्नत R&D, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और डिजिटल हेल्थ इनोवेशन तक विस्तार कर सकता है।
  • बायोइंडस्ट्रियल और बायोसर्विसेज वृद्धि: बायो-निर्माण और कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों में स्केल-अप की प्रक्रिया शुरू हो रही है जिससे बड़े औद्योगिक अनुप्रयोग व निर्यात की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। 
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम: लगभग 12,000 बायोटेक स्टार्टअप्स के साथ भारत वैज्ञानिक शोध को व्यावसायिक उत्पादों और डीप-टेक नवाचार में बदल सकता है।
  • घरेलू बाजार योगदान: बढ़ता जी.डी.पी. हिस्सा (~4.8%) कृषि, हेल्थकेयर एवं उद्योग में बायोटेक्नोलॉजी के अधिक एकीकरण का अवसर प्रदान करता है। 

अब तक की प्रमुख पहलें 

  • BIRAC समर्थन: स्टार्टअप्स के पोषण और स्केल-अप के लिए आवश्यक इंटरफेस प्रदान करना 
  • SIGHT प्रोग्राम: ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता
  • राष्ट्रीय जैव-फार्मा मिशन (National Bio-Pharma Mission): उद्योग व अकादमी के सहयोग से बायोफार्मास्यूटिकल विकास में तेजी लाना
  • Bio-E3 नीति: उच्च प्रदर्शन बायोमैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान केंद्रित कर वर्ष 2047 तक $1 ट्रिलियन का लक्ष्य हासिल करना 

मुख्य चुनौतियाँ 

  • बौद्धिक संपदा (IP) बाधाएँ: GLP-1 पेटेंट्स समाप्त हो रहे हैं किंतु जटिल बायोसिमिलर मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है।
  • वैश्विक कार्य वितरण: मल्टीनैशनल कंपनियां अनुसंधान को वैश्विक नेटवर्क में वितरित कर रही हैं जिससे यदि देश में उच्चस्तरीय पद (भूमिकाएँ) नहीं बनाए गए तो ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा पलायन) हो सकता है।
  • उच्च पूंजी आवश्यकता: बायोटेक स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। 1,780 नए स्टार्टअप्स लॉन्च हुए, पर क्लिनिकल ट्रायल तक उन्हें बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
  • नियामक जटिलता: GCC में एनालिटिक्स और नियामक कार्यों के विस्तार के लिए विशेषज्ञ कर्मियों की आवश्यकता है।
  • सेक्टरवार असंतुलन: बायोएग्री (BioAgri: $14.6B) का क्षेत्र बायोइंडस्ट्रियल (BioIndustrial: $90.2B) की तुलना में छोटा है जो कृषि बायोटेक के अपनाने में देरी दिखाता है। 

आगे की रणनीति 

  • सहयोगी इकोसिस्टम: सरकार, अकादमी और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना ताकि लैब रिसर्च को व्यावसायिक तकनीक में बदला जा सके। 
  • बायोसिमिलर नेतृत्व: आगामी पेटेंट क्लिफ का लाभ उठाकर भारत को पेप्टाइड और बायोसिमिलर निर्माण में वैश्विक केंद्र बनाना
  • GCC कार्यों का विस्तार: GCCs को समर्थन भूमिकाओं से डेटा एनालिटिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और डिजिटल हेल्थ प्लेटफ़ॉर्म के केंद्र में बदलना
  • स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना: लगभग 12,000 पंजीकृत स्टार्टअप्स को स्थापना चरण से आगे बढ़ाने के लिए लक्षित वित्तीय सहायता देना
  • 2047 दृष्टिकोण: सभी सेक्टरवार नीतियों को $1 ट्रिलियन बायोइकॉनॉमी लक्ष्य के अनुरूप संरेखित करना

निष्कर्ष

भारत की बायोइकॉनॉमी अब एक परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर चुकी है जो एक निचले स्तर के क्षेत्र से राष्ट्रीय जी.डी.पी. का प्रमुख चालक बन गई है। मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और बायोफार्मा नेतृत्व के साथ भारत $1 ट्रिलियन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयार है। इस 18% की वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए रणनीतिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है ताकि भारत वैश्विक बायोटेक्नोलॉजी में अग्रणी देश बन सके।

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