New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

भारत को धातु निष्कर्षण के लिए लाइसेंस

भारत को उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर में बहुमूल्य धातुओं की एक श्रेणी की खोज के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (International Seabed Authority: ISA) से एक अन्वेषण अनुबंध प्राप्त हुआ है।

हालिया घटनाक्रम 

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार कार्ल्सबर्ग रिज में पॉलीमेटेलिक सल्फर नोड्यूल्स की खोज के लिए यह विश्व स्तर पर दिया गया पहला लाइसेंस है।
  • ये नोड्यूल्स गहरे समुद्र में पाई जाने वाली चट्टानों के संकेंद्रण हैं और कहा जाता है कि इनमें मैंगनीज, कोबाल्ट, निकल एवं तांबा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • ‘उच्च समुद्र’ या महासागर के ऐसे हिस्से जो किसी देश के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं, में अन्वेषण के लिए देशों को आई.एस.ए. से अनुमति लेनी होती है। 
  • वर्तमान में 19 देशों के पास ऐसे अन्वेषण अधिकार हैं।
  • भारत ने भी जनवरी 2024 में हिंद महासागर के दो क्षेत्रों ‘कार्ल्सबर्ग रिज’ तथा ‘अफानासी-निकितिन सागर पर्वत’ में अन्वेषण अधिकारों के लिए आवेदन किया था। 
    • इसमें दूसरे आवेदन को अभी मंजूरी मिलनी बाकी है।
    • अफानासी-निकितिन सागर पर्वत मध्य हिंद महासागर में स्थित है और इस क्षेत्र पर श्रीलंका ने अन्वेषण अधिकारों का दावा किया है। 

कार्ल्सबर्ग रिज के बारे में 

  • कार्ल्सबर्ग रिज 3,00,000 वर्ग किमी. तक विस्तृत हिंद महासागर, विशेष रूप से अरब सागर और उत्तर-पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित क्षेत्र है। 
  • यह भारतीय और अरब विवर्तनकी प्लेट्स के बीच की सीमा बनाता है जो रॉड्रिक्स द्वीप के पास से ओवेन फ्रैक्चर ज़ोन तक फैला हुआ है।
  • जहाँ देश अपने तटों से 350 समुद्री मील तक के क्षेत्र को अपना ‘महाद्वीपीय शेल्फ’ मान सकते हैं, वहीं बंगाल की खाड़ी में स्थित क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के अनुसार, सैद्धांतिक रूप से 500 समुद्री मील तक के क्षेत्र का दावा कर सकते हैं।

इसे भी जानिए!

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण (ISA) एक स्वायत्त अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना वर्ष 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) और वर्ष 1994 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (1994 समझौता) के भाग XI के कार्यान्वयन से संबंधित समझौते के तहत की गई थी।
  • इस संगठन के माध्यम से UNCLOS के पक्षकार राष्ट्र समग्र रूप से मानव जाति के लाभ के लिए क्षेत्र में सभी खनिज-संसाधन-संबंधी गतिविधियों का संचालन एवं नियंत्रण करते हैं। 
  • आई.एस.ए. को गहरे समुद्रतल से संबंधित गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले हानिकारक प्रभावों से समुद्री पर्यावरण की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिदेश प्राप्त है।
  • इसका मुख्यालय जमैका के किंग्स्टन में है।
  • UNCLOS के अनुच्छेद 156(2) के अनुसार, UNCLOS के सभी पक्षकार देश ISA के स्वतः सदस्य हैं। 
  • 2 सितंबर, 2024 तक ISA के 170 सदस्य हैं जिनमें 169 सदस्य देश व यूरोपीय संघ शामिल हैं।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR