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भारत की रेटिंग में सुधार 

चर्चा में क्यों 

जून माह में ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch) ने भारत के सॉवरेन रेटिंग परिदृश्य को 'नकारात्मक' से 'स्थिर' कर दिया है। 

सुधार के प्रमुख क्षेत्र 

  • वैश्विक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से निकट अवधि में प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत ने तुलनात्मक रूप से विकास की मजबूत उम्मीद जगाई है।  
  • भारत को 'बीबीबी' (BBB) रेटिंग प्रदान की गई है जो वित्तीय प्रतिबद्धताओं के भुगतान के लिये पर्याप्त क्षमता के साथ डिफ़ॉल्ट जोखिम में कमी को दर्शाती है। 
  • फिच ने अनुसार, भारत का सामान्य सरकारी राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद के 10.5% पर स्थिर रहेगा जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह 10.7% था। 
  • साथ ही, वित्त वर्ष 2023-24 और 2026-27 के बीच भारत की विकास दर लगभग 7% रहने का अनुमान है जो सरकार के बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने, सुधार के एजेंडे, वित्तीय क्षेत्र में दबाव कम करने एवं क्रमिक वृद्धि को बनाए रखेगा। 
  • भारत के उच्च सार्वजनिक ऋण के बावजूद घरेलू स्तर पर घाटे को वित्तपोषित करने की क्षमता तुलनात्मक रूप से बेहतर है। 

चुनौतियाँ 

  • फिच ने चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिये भारत के राजकोषीय समेकन लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
  • साथ ही, केंद्र का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022-23 में जी.डी.पी. के 6.4% बजट लक्ष्य से 6.8% तक हो सकता है। 
  • बजट में केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026 तक जी.डी.पी. घाटे का लक्ष्य का 4.5% रखा है किंतु इसे प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 
  • फिच ने मुद्रास्फीति प्रभाव के कारण वित्त वर्ष 2022-23 के लिये देश के सकल घरेलू उत्पाद के विकास अनुमान को 8.5% से घटाकर 7.8% कर दिया है। 
  • देश के सार्वजनिक वित्त में लगातार घाटे से व्यापक ऋण-अनुपात कमजोर बना हुई है। 
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