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ऑफलाइन यूपीआई भुगतान प्रणाली

संदर्भ 

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक नई ऑफलाइन यूपीआई भुगतान प्रणाली विकसित कर रहा है, जो नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक पर आधारित होगी। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता सक्रिय इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी टैप-एंड-पे (Tap-and-Pay) सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।

प्रस्तावित ऑफलाइन यूपीआई प्रणाली के बारे में  

  • यह वर्तमान में संचालित यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर आधारित एक उन्नत संपर्क रहित (Contactless) डिजिटल भुगतान प्रणाली है। 
  • इसके माध्यम से ग्राहक और व्यापारी दोनों के पास इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध न होने पर भी पॉइंट ऑफ सेल (PoS) मशीन पर डिजिटल भुगतान किया जा सकेगा।  

विकासकर्ता: 

  • इस प्रणाली का विकास नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा किया जा रहा है, जो भारत में खुदरा भुगतान (Retail Payments) और भुगतान निपटान (Settlement Systems) का प्रमुख संगठन है।

मुख्य उद्देश्य:

  • इसका उद्देश्य कमजोर, अस्थिर या अनुपलब्ध इंटरनेट एवं मोबाइल नेटवर्क के कारण होने वाली डिजिटल भुगतान विफलताओं को समाप्त करना है। 
  • इससे निम्न क्षेत्रों में भी यूपीआई भुगतान संभव हो सकेगा -
    • भूमिगत मेट्रो नेटवर्क
    • विमान यात्रा (इन-फ्लाइट सेवाएं)
    • दूरस्थ ग्रामीण बाजार
    • शहरी क्षेत्रों में नेटवर्क बाधित होने की स्थिति 

यह प्रणाली कैसे कार्य करेगी?

  • पूर्व-अधिकृत चरण (Pre-Authorization Phase – ऑनलाइन): जब उपयोगकर्ता का मोबाइल इंटरनेट से जुड़ा होगा, तब उसका बैंक एक निश्चित राशि या क्रिप्टोग्राफिक टोकन (Cryptographic Tokens) को अधिकृत कर मोबाइल में सुरक्षित रूप से संग्रहीत कर देगा।
  • ऑफलाइन भुगतान चरण (Offline Phase): इंटरनेट उपलब्ध न होने पर उपयोगकर्ता अपने एनएफसी-सक्षम (NFC Enabled) स्मार्टफोन को व्यापारी की एनएफसी युक्त पीओएस मशीन से टैप करेगा। इसके बाद दोनों उपकरणों के बीच कम दूरी की रेडियो तरंगों के माध्यम से भुगतान संबंधी प्रमाण-पत्र (Payment Credentials) और टोकन का आदान-प्रदान होगा। 
  • विलंबित निपटान चरण (Deferred Settlement Phase): लेन-देन का रिकॉर्ड अस्थायी रूप से ग्राहक के मोबाइल और व्यापारी की मशीन में सुरक्षित रहेगा। जैसे ही इनमें से कोई भी उपकरण पुनः इंटरनेट से जुड़ जाएगा, यह एन्क्रिप्टेड रिकॉर्ड एनपीसीआई को भेज दिया जाएगा, जिसके बाद संबंधित बैंकों के बीच अंतिम भुगतान निपटान (Settlement) पूरा होगा। 

प्रमुख विशेषताएं:

  • ड्यूल-ऑफलाइन एनएफसी सुविधा: यदि ग्राहक का मोबाइल और व्यापारी की पीओएस मशीन दोनों ही इंटरनेट से पूरी तरह कटे हों, तब भी टैप-एंड-पे के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। 
  • क्रिप्टोग्राफिक टोकन और धोखाधड़ी से सुरक्षा: यह प्रणाली बैंक खाते के वास्तविक शेष (Balance) की ऑनलाइन जांच करने के बजाय पहले से अधिकृत सिंगल-यूज़ क्रिप्टोग्राफिक टोकन का उपयोग करेगी। इससे एक ही राशि का दोबारा उपयोग (Double Spending) रोका जा सकेगा तथा बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहेगी।
  • 2,000 रुपए तक का लेन-देन: इस प्रणाली के माध्यम से एक बार में अधिकतम 2,000 तक का भुगतान किया जा सकेगा। यह सीमा UPI Lite जैसी मौजूदा छोटी राशि वाली भुगतान प्रणालियों की तुलना में अधिक है।
  • व्यापारियों के लिए स्टोर-एंड-फॉरवर्ड मॉडल: यह प्रणाली विशेष रूप से रिटेल व्यापारियों और पीओएस अवसंरचना को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। नेटवर्क बाधित होने पर भी व्यापारी भुगतान स्वीकार कर सकेंगे और इंटरनेट उपलब्ध होने पर लेन-देन का अंतिम निपटान किया जाएगा। 

प्रणाली की सीमाएं: 

  • लेन-देन की सीमा: एक बार में अधिकतम ₹2,000 तक ही भुगतान किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त भुगतान की कुल सीमा मोबाइल में पहले से संग्रहीत अधिकृत टोकन या राशि तक ही सीमित रहेगी, ताकि वित्तीय जोखिम कम किया जा सके।
  • हार्डवेयर संबंधी आवश्यकता: इस सुविधा का लाभ तभी मिलेगा जब ग्राहक के स्मार्टफोन और व्यापारी की पीओएस मशीन, दोनों में एनएफसी चिप उपलब्ध होगी। पुराने स्मार्टफोन और सामान्य  फीचर फोन इस प्रणाली का उपयोग नहीं कर पाएंगे।
  • भुगतान निपटान में विलंब: चूंकि अंतिम बैंक-से-बैंक भुगतान इंटरनेट उपलब्ध होने के बाद होगा, इसलिए भुगतान किए जाने और वास्तविक धन हस्तांतरण के बीच कुछ समय का अंतर रहेगा। ऐसे मामलों में दोहरे दावों (Duplicate Claims) या अन्य विवादों के समाधान के लिए मजबूत रिस्क मैनेजमेंट और रिकन्सिलिएशन सिस्टम की आवश्यकता होगी।  
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