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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

चर्चा में क्यों

सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज (CDS) और भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) के शोधकर्ताओं ने भारत की ‘अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था’ पर एक अध्ययन किया है। इसे एक शोधपत्र ‘इकोनॉमी ऑफ इंडिया: इट्स साइज एंड स्ट्रक्चर’ में प्रकाशित किया गया है। 

अध्ययन के प्रमुख बिंदु

  • इसके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 36,794 करोड़ रूपए (लगभग $5 बिलियन) के आँकड़े पर पहुँच गई है।
  • सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) के प्रतिशत के रूप में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार वर्ष 2011-12 की तुलना में 0.26% से घटकर वर्ष 2020-21 में 0.19% हो गया है। 
  • अंतरिक्ष कार्यक्रम और उसके घटकों के लिये वार्षिक बजट का मूल्यांकन करते हुए अध्ययन में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के प्रमुख भागीदारों को दर्शाया गया है, जोकि निम्नवत् हैं-
    • अंतरिक्ष अनुप्रयोग (Space Applications)- 73.57% 
    • अंतरिक्ष संचालन (Space Operations)- 22.31% 
    • अंतरिक्ष विनिर्माण (Space Manufacturing)- 4.12% 
  • भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था काफी विकसित हो गई है, जो वर्ष 2011-12 से 2020-21 के बीच औसत रूप से सकल घरेलू उत्पाद का 0.23% हो गई है। 
  • अध्ययन में यह भी पाया गया कि सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में अंतरिक्ष बजट वर्ष 2000-01 की तुलना में 0.09% से घटकर वर्ष 2011-12 में 0.05% हो गया और तब से लगभग उसी स्तर पर बना हुआ है।
  • गौरतलब है कि जी.डी.पी. के संबंध में भारत का खर्च चीन, जर्मनी, इटली और जापान से अधिक है, किंतु अमेरिका और रूस से कम है।
  • यह अध्ययन अंतरिक्ष उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के अनुरूप है। इससे निजी निवेश में वृद्धि और वैश्विक निजी अंतरिक्ष उद्योग के साथ बेहतर एकीकरण के द्वारा अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आकार में वृद्धि होने की संभावना है।

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