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भारत-वियतनाम रणनीतिक साझेदारी

संदर्भ 

  • भारत और वियतनाम के बीच की रणनीतिक साझेदारी दो उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक ऐसा मेल है, जो हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संबंध आपसी विश्वास और क्षेत्रीय स्थिरता की साझा चिंताओं पर टिका हुआ है। 

मुख्य लक्ष्य  

  • इसका प्राथमिक उद्देश्य रक्षा तंत्र, द्विपक्षीय व्यापार, उन्नत तकनीक और समुद्री कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में सहयोग को प्रगाढ़ बनाना है, ताकि एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके। 

वियतनाम के बारे में प्रमुख तथ्य 

  • आधिकारिक नाम : वियतनाम समाजवादी गणराज्य
  • शासन प्रणाली : समाजवादी गणराज्य
  • राजधानी : हनोई
  • जनसंख्या : 97,040,334
  • आधिकारिक भाषा : वियतनामी
  • मुद्रा : डोंग
  • क्षेत्रफल : 127,123 वर्ग मील (329,247 वर्ग किलोमीटर)
  • प्रमुख पर्वत श्रृंखला : अन्नाम कॉर्डिलर
  • प्रमुख नदियाँ : मेकांग, रेड, मा, परफ्यूम 

साझेदारी के प्रमुख स्तंभ  

सुरक्षा और रक्षा तालमेल 

  • रक्षा संबंध इस गठबंधन की सबसे मजबूत कड़ी हैं। भारत ने वियतनाम को न केवल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता (Line of Credit) प्रदान की है, बल्कि आईएनएस (INS) कृपाण जैसे युद्धपोत का उपहार देना इस गहरे सैन्य विश्वास का प्रतीक है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा सूचनाओं को साझा करने में भी सक्रिय हैं। 

आर्थिक प्रगति और व्यापारिक लक्ष्य 

  • वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार 16 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इसे और अधिक विस्तार देते हुए, दोनों सरकारों ने आपसी आर्थिक निवेश के माध्यम से 2030 तक 25 अरब डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया है। 

एक्ट ईस्ट नीति और आसियान (ASEAN) 

  • वियतनाम, दक्षिण-पूर्वी एशिया में अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भारत की एक्ट ईस्ट नीति का केंद्र बिंदु है। आसियान देशों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करने में वियतनाम एक सेतु की भूमिका निभाता है।  

भविष्य की तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा 

  • परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़ते हुए अब यह साझेदारी महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals), सेमीकंडक्टर तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) जैसे आधुनिक क्षेत्रों की ओर रुख कर रही है। 

क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक गहराई 

  • यद्यपि यह कोई औपचारिक सैन्य संधि नहीं है, फिर भी यह साझेदारी जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। 

निष्कर्ष 

  • भारत-वियतनाम संबंध केवल द्विपक्षीय लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की कल्पना को साकार करने के लिए अनिवार्य हैं। दोनों देशों का बढ़ता सहयोग एशिया में एक बहुध्रुवीय और सुरक्षित भविष्य की नींव रख रहा है।
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