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इंडियन लेबर्नम

सीज़नवॉच के अनुसार, विगत कुछ वर्षों में इंडियन लेबर्नम वृक्षों के फूल सामान्य से पहले ही खिलने लगे हैं। सीज़नवॉच वृक्षों के फीनोलॉजी (Phenology- फलोद्गदिकी) पर नजर रखने वाली एक नागरिक विज्ञान परियोजना है।

इंडियन लेबर्नम के बारे में

  • इंडियन लेबर्नम (कैसिया फिस्टुला) को उत्तर भारत में ‘अमलतास’ और दक्षिण भारत में ‘कनीकोना’ कहा जाता है। यह फैबेसी (Fabaceae) कुल का एक पुष्पीय पौधा है।
  • इसे गोल्डन शावर ट्री, पर्जिंग फिस्टुला, पुडिंग-पाइप ट्री के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत का मूल वृक्ष है। कैसिया केरल व दिल्ली का राजकीय वृक्ष है। 
  • यह मध्यम से लेकर विशाल पर्णपाती वृक्ष है जो 10 से 20 मीटर (लगभग 30 से 65 फीट) तक की ऊँचाई तक पहुँच सकता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की मूल प्रजाति है किंतु यह दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व सहित एशिया के अन्य भागों में भी पाया जाता है।
  • इसे प्राय: दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सजावटी वृक्ष के रूप में उगाया जाता है।

इंडियन लेबर्नम की विशेषताएँ 

  • मध्यम आकार का यह पर्णपाती वृक्ष केवल मार्च व मई के बीच थोड़े समय के लिए ही पत्ती रहित होता है। 
  • नए पत्ते चमकदार होते हैं और यह गुण परिपक्व होने पर समाप्त हो जाता है तथा अधिकतर चमकीले हरे रंग के हो जाते हैं। हालाँकि, कभी-कभी उनमें गहरा ताम्र रंग भी होता है।
  • यह लटकते हुए, बेलनाकार, पीले फूलों के गुच्छों का उत्पादन करता है जो शाखाओं से लटकते हैं और फूलों के मौसम के दौरान प्रचुर मात्रा में खिलते हैं।

इंडियन लेबर्नम के उपयोग

  • इसकी छाल, पत्तियों, फूलों व बीजों से प्राप्त अर्क का उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है जिनमें कब्ज, त्वचा संबंधी समस्याएँ, पाचन संबंधी समस्याएँ और श्वसन संबंधी समस्याएँ शामिल हैं।
  • इसकी छाल का उपयोग रंग बनाने के लिए किया जाता है और फल की फली में मौजूद गूदा एक मजबूत रेचक एजेंट (Purgative Agent) के रूप में भी काम करता है जो इसे खाने वाले जानवरों के लिए लाभकारी होता है।
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