संदर्भ
भारत का दक्षता अभियान बाजारों, मानकों और जनभागीदारी को एकीकृत करता है, जिससे बढ़ती ऊर्जा मांग और आर्थिक व जलवायु प्राथमिकताओं के बीच सामंजस्य बनता है।
रणनीतिक औचित्य और औद्योगिक परिवर्तन
- मेक इन इंडिया के तहत औद्योगीकरण, शहरीकरण, डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा दक्षता को विकसित भारत 2047 के केंद्र में लाते हैं।
- ऊर्जा संरक्षण से उत्पादन में निवेश और आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को मजबूती मिलती है।
- 2014 से, भारत की ऊर्जा तीव्रता (Energy Intensity) में काफी कमी आई है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा भारत के प्रदर्शन को विश्व के बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में माना है।
- 'परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड' (PAT) योजना बाजार-आधारित प्रोत्साहनों के जरिए थर्मल पावर, सीमेंट, स्टील, एल्युमीनियम और उर्वरक क्षेत्रों को लक्षित करती है।
- PAT ने ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र (ईएससीईआरटी) बनाए गए हैं, जिसके तहत 2024 तक कवर की गई इकाइयों की संख्या 478 से बढ़कर 1,300 से अधिक हो जाएगी।
- PAT के माध्यम से 23 मिलियन टन ऑयल इक्विवेलेंट (MTOE) से अधिक ऊर्जा की बचत हुई और 110 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका गया।
जन-केंद्रित कार्यक्रम और संरचनात्मक उपाय
- एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) द्वारा संचालित अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल (उजाला) के उन्नत ज्योति अभियान के तहत 36 करोड़ से अधिक बल्ब वितरित किए गए।
- UJALA, दुनिया की सबसे बड़ी गैर-सब्सिडी वाली एलईडी पहल है जो मांग एकत्रीकरण के माध्यम से सालाना 48 अरब यूनिट बिजली और 19,000 करोड़ रुपए की बचत करती है।
- राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम के तहत 1.3 करोड़ से अधिक लाइटों को बदला गया, जिससे नौ अरब यूनिट बिजली, 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई और सुरक्षा में सुधार हुआ।
- ‘ऊर्जा संरक्षण भवन कोड’ को अब ‘ऊर्जा संरक्षण एवं टिकाऊ भवन कोड’ में बदल दिया गया है जिससे पूरे जीवनचक्र के दौरान 25–50% ऊर्जा की बचत संभव हो गई है।
- मानक एवं लेबलिंग कार्यक्रम 40 प्रकार के उपकरणों को कवर करता है, जो निर्माताओं और उपभोक्ताओं को कुशल उत्पादों की ओर निर्देशित करता है।
- ऊर्जा-कुशल कृषि पंप खेतों में बिजली की खपत को कम करते हैं; स्मार्ट मीटर उपयोगिता दक्षता में सुधार करते हैं और नुकसान को कम करते हैं।
समग्र प्रभाव और अगला चरण
- 2017 से लागू कॉर्पोरेट औसत ईंधन अर्थव्यवस्था (CAFE) मानदंडों ने यात्री कारों की ईंधन दक्षता में सुधार किया है।
- ‘एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2025' के अनुसार ऊर्जा बचत के रिकॉर्ड 3 MTOE (2014-15) से बढ़कर 65 MTOE (2024-25) हो गए हैं।
- भारत ने समय से पहले ही उत्सर्जन की तीव्रता में कमी लाने की अपनी पेरिस समझौते की प्रतिबद्धता को पूरा लिया है जिससे जलवायु कार्रवाई विकास के अनुरूप हो गई है।
- ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम, दक्षता एवं उत्सर्जन में कमी के लिए बाजार में प्रोत्साहन पैदा करते हैं।
निष्कर्ष
- ऊर्जा दक्षता भारत के एक साइलेंट ‘आभासी विद्युत संयंत्र’ के रूप में कार्य करती है जो वहनीयता, संसाधन सुरक्षा एवं विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को एक साथ लाती है।