New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 10th Aug 2026, 3:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: तकनीक, नीति और 100 GW तक का सफर

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भारत में परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी (Nuclear Energy Technology in India) पर एक विस्तृत जानकारी जारी की है। इसमें भारत की परमाणु तकनीक, तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के बारे में बताया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत में इस समय 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 GW है।
  • 9 परमाणु रिएक्टर निर्माणाधीन हैं, जिनकी कुल क्षमता 7.5 GW है।
  • सरकार ने फ्लीट मोड में 10 स्वदेशी Pressurised Heavy Water Reactors (PHWRs) को मंजूरी दी है।
  • दो 500 MW Fast Breeder Reactors (FBRs) के लिए शुरुआती परियोजना संबंधी गतिविधियाँ शुरू की गई हैं।
  • भारत ने वर्ष 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
  • केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित Nuclear Energy Mission के तहत स्वदेशी परमाणु तकनीक और Small Modular Reactors (SMRs) के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

परमाणु ऊर्जा कैसे काम करती है?

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में Nuclear Fission यानी परमाणु विखंडन के माध्यम से बिजली पैदा की जाती है।
  • परमाणु विखंडन के दौरान एक न्यूट्रॉन, यूरेनियम या प्लूटोनियम परमाणु के नाभिक से टकराता है। इससे नाभिक छोटे हिस्सों में टूट जाता है और बड़ी मात्रा में ऊष्मा तथा अतिरिक्त न्यूट्रॉन निकलते हैं।
  • ये अतिरिक्त न्यूट्रॉन दूसरे परमाणुओं के विखंडन को शुरू करते हैं। इस तरह नियंत्रित Chain Reaction चलती रहती है।
  • इससे पैदा हुई ऊष्मा का इस्तेमाल पानी को उच्च दबाव वाली भाप में बदलने के लिए किया जाता है। यह भाप टर्बाइन को घुमाती है और टर्बाइन से जुड़ा जनरेटर बिजली पैदा करता है।
  • परमाणु ईंधन मुख्य रूप से Fissile और Fertile दो प्रकार के होते हैं। Fissile पदार्थ सीधे Chain Reaction को जारी रख सकते हैं, जबकि Fertile पदार्थों को पहले रिएक्टर के अंदर Fissile पदार्थ में बदलना पड़ता है।
  • प्रमुख परमाणु ईंधनों में Natural Uranium, Uranium-235, Low-Enriched Uranium (LEU), Plutonium-239 और Mixed Oxide (MOX) Fuel शामिल हैं।

भारत में प्रमुख परमाणु रिएक्टर

  • Pressurised Heavy Water Reactor (PHWR): PHWR भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का मुख्य आधार हैं। इनमें मुख्य रूप से प्राकृतिक यूरेनियम का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इनके लिए यूरेनियम को Enrich करने की जरूरत नहीं होती।
  • Boiling Water Reactor (BWR): भारत में BWR भी काम कर रहे हैं। इनमें पानी का इस्तेमाल Coolant और Moderator दोनों के रूप में किया जाता है और रिएक्टर के अंदर ही भाप तैयार होती है।
  • Pressurised Water Reactor (PWR): इन रिएक्टरों में पानी को बहुत अधिक दबाव में रखा जाता है। इस पानी से पैदा हुई ऊष्मा का इस्तेमाल भाप बनाने के लिए किया जाता है।
  • Fast Breeder Reactor (FBR): इन रिएक्टरों में मुख्य रूप से प्लूटोनियम का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी खासियत यह है कि बिजली उत्पादन के साथ-साथ ये अतिरिक्त Fissile Material भी तैयार कर सकते हैं। FBR भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
  • Small Modular Reactor (SMR): SMR छोटे आकार के नई पीढ़ी के परमाणु रिएक्टर हैं। इनकी क्षमता सामान्यतः 300 MWe तक होती है। इनके छोटे और मॉड्यूलर डिजाइन के कारण इन्हें फैक्ट्री में तैयार करना, अलग-अलग चरणों में स्थापित करना और औद्योगिक या दूरदराज के क्षेत्रों में इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

भारत का तीन चरणों वाला परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

भारत का Three-Stage Nuclear Power Programme धीरे-धीरे यूरेनियम से आगे बढ़कर देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने के लिए बनाया गया है।

  • पहला चरण – PHWR: पहले चरण में Pressurised Heavy Water Reactors में प्राकृतिक यूरेनियम का इस्तेमाल करके बिजली बनाई जाती है। इसके बाद इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन की Reprocessing करके उससे Plutonium निकाला जाता है।
  • दूसरा चरण – FBR: दूसरे चरण में Fast Breeder Reactors में पहले चरण से प्राप्त Plutonium का इस्तेमाल किया जाता है। ये रिएक्टर बिजली उत्पादन के साथ अतिरिक्त Fissile Material तैयार करते हैं। इनके माध्यम से Thorium से Uranium-233 भी तैयार किया जा सकता है।
  • तीसरा चरण – Thorium-Based Reactors: तीसरे चरण में Thorium से प्राप्त Uranium-233 का इस्तेमाल परमाणु ईंधन के रूप में किया जाएगा। इस चरण का मुख्य उद्देश्य भारत के विशाल थोरियम भंडार का इस्तेमाल करके लंबे समय तक ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

इस प्रकार भारत का तीन चरणों वाला परमाणु कार्यक्रम देश के थोरियम भंडार को भविष्य के महत्वपूर्ण परमाणु ईंधन में बदलने का रास्ता तैयार करता है।

Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR)

  • तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) ने इसके डिजाइन, विकास, परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन, कमीशनिंग और स्वदेशीकरण में प्रमुख भूमिका निभाई है।
  • इस रिएक्टर के लगभग 90% उपकरण और प्रणालियाँ भारत में ही तैयार की गई हैं। यह उन्नत परमाणु तकनीक में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दिखाता है।

Small Modular Reactor Programme

केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित Nuclear Energy Mission के तहत स्वदेशी SMRs के Research, Design, Development और Deployment के लिए सरकार ने ₹20,000 करोड़ आवंटित किए हैं।

भारत वर्तमान में विकसित कर रहा है:

  • 220 MWe Bharat Small Modular Reactor
  • 55 MWe SMR-55
  • हाइड्रोजन उत्पादन के लिए High-Temperature Gas-Cooled Reactor

सरकार का लक्ष्य 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी SMRs को चालू करना है।

परमाणु कचरा प्रबंधन

  • भारत Closed Nuclear Fuel Cycle अपनाता है। इसमें इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन को पूरी तरह कचरा मानने के बजाय उसकी Reprocessing की जाती है।
  • इस प्रक्रिया से उपयोगी परमाणु पदार्थों को अलग करके भविष्य के रिएक्टरों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • बचने वाले High-Level Radioactive Waste को सुरक्षित रूप में बदलकर स्टोर किया जाता है।
  • भारत के पास Vitrification Technology भी है। इसमें उच्च स्तर के रेडियोधर्मी कचरे को स्थिर काँच जैसे रूप में बदल दिया जाता है। इससे उसका लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण, परिवहन और अंतिम निपटान आसान होता है।

महत्त्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: परमाणु ऊर्जा भारत को भरोसेमंद घरेलू बिजली उपलब्ध कराने में मदद करती है। इससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम किया जा सकता है।
  • लगातार बिजली की उपलब्धता: परमाणु ऊर्जा की एक बड़ी विशेषता यह है कि इससे मौसम की स्थिति से अलग लगातार बिजली पैदा की जा सकती है। 
  • स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव: परमाणु ऊर्जा कम कार्बन उत्सर्जन वाला ऊर्जा स्रोत है। इसका विस्तार भारत की बढ़ती बिजली की जरूरत को पूरा करने के साथ कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने में मदद कर सकता है।
  • तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत ने Reactor Design, Fuel Fabrication, Reprocessing, Waste Management और Advanced Reactor Technologies जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता विकसित की है।
  • थोरियम का लाभ: भारत के पास थोरियम के बड़े भंडार मौजूद हैं। तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम की सफलता से भारत भविष्य में इस संसाधन का बड़े स्तर पर ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
  • औद्योगिक विकास: परमाणु ऊर्जा के विस्तार से Heavy Engineering, Specialised Materials, Precision Manufacturing, Electronics और Nuclear-Grade Equipment जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत के लिए महत्त्व

  • आर्थिक विकास, शहरीकरण, औद्योगीकरण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है।
  • Solar और Wind Energy भारत के Energy Transition के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनसे बिजली उत्पादन मौसम पर निर्भर करता है।
  • परमाणु ऊर्जा लगातार बिजली उपलब्ध कराकर Renewable Energy को संतुलित कर सकती है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है।
  • स्वदेशी PHWRs, Fast Breeder Reactors और SMRs के विकास से भारत में एक मजबूत घरेलू परमाणु विनिर्माण व्यवस्था तैयार हो सकती है। इससे आत्मनिर्भर भारत को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • थोरियम का सफल उपयोग भविष्य में आयातित परमाणु ईंधन पर भारत की निर्भरता कम कर सकता है और देश की रणनीतिक ऊर्जा स्वायत्तता को मजबूत कर सकता है।

चुनौतियाँ

  • सीमित यूरेनियम भंडार: भारत के यूरेनियम भंडार अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाले हैं। इसलिए घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात की भी जरूरत पड़ती है।
  • अधिक शुरुआती लागत: परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शुरुआत में बहुत अधिक निवेश की जरूरत होती है। इनके निर्माण में भी लंबा समय लग सकता है।
  • परियोजनाओं को समय पर पूरा करना: परमाणु परियोजनाओं में जटिल तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसलिए निर्माण और कमीशनिंग को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती है।
  • परमाणु सुरक्षा: परमाणु क्षमता बढ़ाने के साथ Reactor Safety, Radiation Monitoring और Emergency Preparedness को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
  • रेडियोधर्मी कचरा: High-Level Radioactive Waste को बहुत लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसका अंतिम निपटान करने की जरूरत होती है।
  • उन्नत तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल: भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति की सफलता Fast Breeder Reactors और आगे चलकर Thorium-Based Technologies को बड़े स्तर पर विकसित करने पर निर्भर करेगी।
  • लोगों की स्वीकार्यता: Radiation, Safety, Environment, Land Acquisition और Livelihood से जुड़ी चिंताओं के कारण नई परमाणु परियोजनाओं का स्थानीय स्तर पर विरोध हो सकता है।

आगे की राह

  • भारत को स्वदेशी PHWRs के निर्माण में तेजी लाने के साथ निर्माणाधीन रिएक्टरों को समय पर पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।
  • Fast Breeder Reactor Programme को धीरे-धीरे बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना जरूरी है, ताकि भारत के परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण मजबूत हो और भविष्य में थोरियम के व्यापक उपयोग का रास्ता तैयार हो।
  • स्वदेशी Small Modular Reactors के Research और Development को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इनका इस्तेमाल उद्योगों, पुराने हो रहे जीवाश्म ईंधन आधारित संयंत्रों के विकल्प और अन्य विशेष ऊर्जा जरूरतों में किया जा सकता है।
  • Research Institutions, Public Sector Enterprises और Private Industry के बीच सहयोग बढ़ाकर घरेलू Nuclear Supply Chain को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • परमाणु ऊर्जा के विस्तार के साथ मजबूत Safety Regulation, Radioactive Waste Management, Emergency Preparedness और स्थानीय लोगों के साथ पारदर्शी संवाद सुनिश्चित करना जरूरी है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

Q. Small Modular Reactors (SMRs) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इनकी बिजली उत्पादन क्षमता सामान्यतः 300 MWe तक होती है।
  2. भारत Nuclear Energy Mission के तहत स्वदेशी SMRs विकसित कर रहा है।
  3. सरकार का लक्ष्य 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी SMRs को चालू करना है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

मुख्य परीक्षा प्रश्न

Q. भारत का तीन चरणों वाला परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम देश की सीमित परमाणु ईंधन उपलब्धता को दीर्घकालिक ऊर्जा लाभ में बदलने का प्रयास है। इसके महत्त्व की चर्चा करते हुए वर्ष 2047 तक भारत के परमाणु ऊर्जा क्षमता लक्ष्य को हासिल करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

FAQs

वर्ष 2047 तक भारत का परमाणु ऊर्जा क्षमता लक्ष्य कितना है?

भारत ने वर्ष 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

भारत में अभी कितने परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं?

भारत में वर्तमान में 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 GW है।

भारत का तीन चरणों वाला परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम किसने प्रस्तावित किया था?

भारत का तीन चरणों वाला परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम डॉ. होमी जे. भाभा ने वर्ष 1954 में प्रस्तावित किया था।

भारत PHWRs का इस्तेमाल क्यों करता है?

PHWRs में प्राकृतिक यूरेनियम का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके लिए यूरेनियम Enrichment की जरूरत नहीं होती। इसलिए ये भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X