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आईएनएस सागरध्वनि पोत

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में भारतीय नौसेना का समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत, आईएनएस सागरध्वनि, रॉयल मलेशियन नौसेना के साथ सफल समन्वय के बाद पोर्ट क्लांग, मलेशिया से रवाना हुआ। यह प्रवास भारत और मलेशिया के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों को दर्शाता है, साथ ही क्षेत्रीय सहयोग, ज्ञान साझा करने और घनिष्ठ व्यावसायिक संबंधों के प्रति दोनों नौसेनाओं की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

आईएनएस सागरध्वनि के बारे में 

  • आईएनएस सागरध्वनि (INS Sagardhwani - A74) भारतीय नौसेना का एक अत्याधुनिक समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत (Oceanographic Research Vessel) है। 
  • इसका निर्माण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत काम करने वाली नौसेना भौतिक और समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (NPOL), कोच्चि के लिए किया गया है।
  • इस पोत को विशेष रूप से समुद्री अनुसंधान और सैन्य रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

मुख्य विशेषताएं और कार्य 

  • समुद्र विज्ञान अनुसंधान: यह जहाज मुख्य रूप से पानी के भीतर ध्वनि के प्रसार (Underwater Acoustics), समुद्री पर्यावरण, और भौतिक, रासायनिक व जैविक समुद्र विज्ञान का अध्ययन करता है।
  • रणनीतिक महत्व: इसका डेटा भारतीय नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्र के तापमान, लवणता (salinity) और ध्वनि की गति का सटीक ज्ञान पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare - ASW) में सोनार (Sonar) प्रणालियों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद करता है। 
  • स्वदेशी निर्माण: इसे कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा बनाया गया था और इसे 30 जुलाई 1994 को नौसेना में शामिल किया गया था।   

सागर मैत्री (SAGAR MAITRI) मिशन के बारे में 

  • आईएनएस सागरध्वनि की पहचान इसके सागर मैत्री अभियानों से भी है। भारत सरकार के SAGAR (Security And Growth for All in the Region) दृष्टिकोण के तहत, यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों के साथ वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने के लिए मिशन पर जाता है। 
  • इसका उद्देश्य ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ मिलकर समुद्री डेटा साझा करना और संयुक्त अनुसंधान करना। 
  • यह पड़ोसी देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।   
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