चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं द्वारा भारत में पाई जाने वाली तितलियों और पतंगों (लेपिडोप्टेरा) का एक व्यापक और विस्तृत कैटलॉग प्रकाशित किया गया है।
लेपिडोप्टेरा (Lepidoptera) के बारे में
- कीड़ों के इस वर्ग के अंतर्गत तितलियों और पतंगों की लगभग 1,80,000 प्रजातियों को शामिल किया गया है।
- आकार और व्यापकता के लिहाज से कीड़ों का यह समूह कोलिप्टेरा (भृंग या बीटल्स) के बाद दूसरा सबसे बड़ा वर्ग है।
- लेपिडोपटेरा शब्द ग्रीक भाषा से आया है, जिसका शाब्दिक अर्थ शल्कयुक्त पंख होता है, जो इनके पंखों पर मौजूद सूक्ष्म एवं धूलनुमा पपड़ी जैसे आवरण को दर्शाता है।
- कुछ अपवादस्वरूप पतंगों को छोड़कर, सभी वयस्क लेपिडोपटेरान के पास पंखों के दो जोड़े होते हैं।
- तितलियाँ सामान्यतः दिन में सक्रिय (Diurnal) होती हैं तथा अपने आकर्षक एवं रंग-बिरंगे पंखों के कारण अधिक परिचित हैं, जबकि अधिकांश पतंगे रात्रिचर (Nocturnal) और अपेक्षाकृत कम रंगीन होते हैं, यद्यपि उनकी प्रजातीय विविधता और संख्या तितलियों से कहीं अधिक होती है।
भौगोलिक वितरण:
- अंटार्कटिका को छोड़कर यह समूह दुनिया के हर महाद्वीप पर मौजूद है।
- यद्यपि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इनकी संख्या और विविधता सबसे अधिक होती है, फिर भी इनकी कुछ प्रजातियाँ ध्रुवीय वनस्पति क्षेत्रों तक में जीवित रहने में सक्षम हैं।
जीवन चक्र:
लेपिडोप्टेरा के संपूर्ण जीवन चक्र में चार प्रमुख अवस्थाएँ आती हैं -
- अंडा
- लार्वा
- प्यूपा और
- वयस्क
पारिस्थितिकीय महत्त्व:
- ये अपने लार्वा (कैटरपिलर) चरण में मुख्य रूप से शाकाहारी (पत्तियाँ खाने वाले) होते हैं, जबकि वयस्क होने पर मकरंद का आहार लेते हैं।
- प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में ये एक महत्त्वपूर्ण परागणक के रूप में कार्य करते हैं और खाद्य श्रृंखला में प्राथमिक उपभोक्ता की भूमिका निभाते हैं।
- इसके विपरीत, कृषि क्षेत्र में इनके कैटरपिलर फसलों और वनस्पतियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं क्योंकि वे अपने विकास के लिए भारी मात्रा में पौधों की पत्तियों को खाते हैं।
- रेशम का कीड़ा (बॉम्बेक्स मोरी), जो वास्तव में एक पतंगा ही है, व्यावसायिक रूप से उत्पादित होने वाले रेशम का मुख्य स्रोत है।
भारतीय लेपिडोप्टेरा (Lepidoptera) कैटलॉग के मुख्य आँकड़े
- भारत में लेपिडोप्टेरा की कुल 13,703 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो पूरी दुनिया की कुल प्रजातियों का लगभग 8.25 प्रतिशत हिस्सा है।
- इस कुल संख्या में 1,417 प्रजातियाँ तितलियों की हैं, जबकि शेष 12,286 प्रजातियाँ पतंगों से संबंधित हैं।
- वैज्ञानिकों ने इस कैटलॉग में जियोमेट्रोइडा (Geometroidea) की 2,205 प्रजातियों को भी चिन्हित और सूचीबद्ध किया है। ये प्रमुख निशाचर परागणक हैं जो दिन ढलने और तितलियों के विश्राम करने पर रात्रि में पर्यावरण में परागण की जिम्मेदारी संभालते हैं।
- भारत में पाई जाने वाली जियोमेट्रोइडिया की 2,205 प्रजातियाँ विश्व में ज्ञात इस सुपरफैमिली की कुल प्रजातियों का लगभग 8.8% प्रतिनिधित्व करती हैं।