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MSC Elsa 3 जहाज़ दुर्घटना: अरब सागर में पारिस्थितिक संकट

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी; पर्यावरण प्रभाव आकलन)

संदर्भ

25 मई, 2025 को लाइबेरिया-ध्वज वाले कंटेनर जहाज़ MSC Elsa 3 केरल तट के पास दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में डूब गया। यह जहाज़ खतरनाक माल परिवहन में संलग्न था और इसके डूबने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ा।

MSC Elsa 3 जहाज़ दुर्घटना के बारे में

  • MSC Elsa 3 का डूबना केवल एक समुद्री दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह समुद्री पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा बन गया। 
  • जहाज़ के डूबने से तेल एवं अन्य प्रदूषक समुद्र में फैल गए। 
  • यह क्षेत्र मछली पकड़ने और जैव-विविधता के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, जिससे यहां के समुद्री जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ा।

CMLRE की जांच

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले समुद्री जीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (Centre for Marine Living Resources and Ecology: CMLRE) ने 2 जून से 12 जून, 2025 तक मत्स्य समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत सागर सम्पदा (Fishery Oceanographic Research Vessel Sagar Sampada: FORV Sagar Sampada) अनुसंधान क्रूज़ चलाया। जांच के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:- 

  • जाचं टीम द्वारा 23 स्थानों से नमूने लिए गए।
  • PAH (Polyaromatic Hydrocarbons), जैसे- नैफ्थलीन, फ्लोरीन, एंथ्रासीन, फिनांथ्रीन आदि पाए गए, जो मानव-जनित प्रदूषण का संकेत हैं।
  • पानी एवं अवसाद में निकल, लेड, कॉपर, वैनेडियम जैसी धातुएँ मिली हैं।
  • रिपोर्ट में स्पष्ट है कि यह जहाज़ अब हाइड्रोकार्बन और भारी धातु प्रदूषण का स्थानीय स्रोत बन चुका है।
  • समुद्र तल पर पारिस्थितिक तनाव के कारण तलछट स्वास्थ्य और मत्स्य संसाधनों के लिए दीर्घकालिक खतरा उत्पन्न हुआ।
  • मेटाजेनोमिक विश्लेषण में हाइड्रोकार्बन विघटक बैक्टीरिया (जैसे- Neptunomonas acidivorans, Halomonas tabrizica, Acinetobacter baumannii) प्रचुर मात्रा में पाए गए।
    • यह प्राकृतिक बायो-रिमेडिएशन क्षमता की तरफ संकेत करता है किंतु साथ ही भारी हाइड्रोकार्बन संदूषण की पुष्टि भी करता है।

प्रमुख प्रभाव

  • जल गुणवत्ता पर असर: समुद्र के पानी में तेल एवं भारी धातुओं की मात्रा बढ़ गई।
  • प्लवक व मछली अंडों पर असर: बड़ी संख्या में मछली के अंडे और लार्वा सड़ने लगे, जिससे उनकी मृत्यु की संभावना बढ़ गई।
  • बेंथिक जीवों पर प्रभाव: समुद्र तल के जीवों में संवेदनशील प्रजातियों की संख्या घट गई और केवल प्रदूषण सहन करने वाली प्रजातियाँ बचीं।
  • उच्च समुद्री जीवन पर प्रभाव : ब्राउन नॉडी नामक समुद्री पक्षी पर तेल प्रदूषण के लक्षण देखे गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऊँचे स्तर के जीव भी प्रभावित हो रहे हैं।

चुनौतियाँ

  • लगातार तेल रिसाव की संभावना बनी हुई है।
  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में लंबा समय लग सकता है।
  • प्रदूषण का प्रभाव मछली पालन उद्योग पर पड़ सकता है।
  • गहरे समुद्र में लीक रोकना और जहाज़ के फ्यूल कम्पार्टमेंट को सील करना तकनीकी रूप से कठिन है।
  • दीर्घकालिक निगरानी के लिए पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • जहाज़ के ईंधन कम्पार्टमेंट को तुरंत सील करने की जरूरत है।
  • समुद्र में प्रदूषण की दीर्घकालिक निगरानी की जानी चाहिए।
  • तटीय समुदायों को संभावित स्वास्थ्य एवं आर्थिक खतरों के प्रति जागरूक करना होगा।
  • प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों में पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समुद्री सुरक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए।
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