संदर्भ
सरकार स्वच्छता व्यवस्था को मशीनीकृत बनाने और NAMASTE योजना का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी बीच, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने योजना के तहत स्वरोजगार और पूंजीगत सब्सिडी के लिए किए गए आवेदनों के लगातार अस्वीकार होने पर चिंता जताई है।
प्रमुख बिंदु
- सामाजिक न्याय मंत्रालय ने NAMASTE योजना को शहरी क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर ग्रामीण इलाकों तक लागू करने का प्रस्ताव रखा है। वर्ष 2023-24 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के कारण होने वाली मौतों को रोकना है।
- प्रस्तावित विस्तार के बाद नालियों की सफाई करने वाले कर्मियों तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। इस विस्तारित योजना पर चालू वित्त वर्ष से 2030-31 तक लगभग 498.73 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
- सामाजिक न्याय मंत्रालय के अनुसार, 2019 से जून 2026 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान देश में 498 लोगों की जान गई।
परियोजनाओं की मंजूरी में कमी
- NAMASTE योजना की शुरुआत सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों (SSWs) को ध्यान में रखकर की गई थी। बाद में इसमें कचरा बीनने वालों को भी शामिल किया गया। मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 90,915 SSWs और करीब 1.3 लाख कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग की जा चुकी है।
- योजना के तहत मैनुअल स्कैवेंजर्स और SSWs को स्वच्छता से जुड़े व्यवसाय शुरू करने के लिए परियोजना लागत का 50% तक पूंजीगत अनुदान दिया जाता है। साथ ही, शहरी स्थानीय निकायों में आपातकालीन स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयों की स्थापना में सहायता, प्रशिक्षण और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
- हालांकि, योजना के क्रियान्वयन की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देती है। 31 मार्च 2026 तक केवल 810 SSWs को पूंजीगत सब्सिडी के लिए मंजूरी मिली, जबकि इनमें से महज 147 लाभार्थियों को राशि प्राप्त हो सकी। इसी प्रकार, योजना के तहत पहचाने गए 58,000 मैनुअल स्कैवेंजर्स के लिए सिर्फ 2,652 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है।
- इन परियोजनाओं में निजी स्वच्छता सेवा संगठनों (PSSOs) और व्यक्तिगत लाभार्थियों द्वारा प्रस्तावित परियोजनाएं भी शामिल हैं।
मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (नमस्ते) के बारे में
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जुलाई 2023 में शुरू की गई मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (नमस्ते) योजना का उद्देश्य खतरनाक सफाई को रोककर, प्रशिक्षित एवं प्रमाणित श्रमिकों के माध्यम से सुरक्षित, मशीनीकृत प्रथाओं को बढ़ावा देकर सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है।
- इस योजना का लक्ष्य स्वच्छता कार्य में शून्य मृत्यु दर को सुनिश्चित करना और मानव मल के सीधे संपर्क को समाप्त करना है।
- इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि कुशल श्रमिकों द्वारा सुरक्षा उपकरणों के साथ ही सफाई के सभी कार्य किए जाएं, आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ईआरएसयू) को मजबूत किया जाए और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उद्यमिता के माध्यम से श्रमिकों को सशक्त बनाया जाए।
नमस्ते योजना के प्रमुख घटक:
- एसएसडब्ल्यू की प्रोफाइलिंग: शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों (एसएसडब्ल्यू) का विवरण एकत्र कर उनका व्यापक डेटाबेस तैयार किया जाता है।
- सुरक्षा प्रशिक्षण और पीपीई किट: एसएसडब्ल्यू को व्यावसायिक सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाता है और काम के दौरान सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट उपलब्ध कराई जाती है। स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयों (एसआरयू) को भी आवश्यक सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं।
- स्वास्थ्य बीमा: चिन्हित एसएसडब्ल्यू और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज दिया जाता है। पात्र लाभार्थियों के प्रीमियम का भुगतान नमस्ते योजना के माध्यम से किया जाता है।
- आजीविका और उद्यमिता सहायता: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) के माध्यम से वित्तीय सहायता और पूंजीगत सब्सिडी दी जाती है। स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत एसएसडब्ल्यू, हाथ से मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों को स्वच्छता उपकरण व वाहन खरीदने में सहायता मिलती है। साथ ही स्वरोजगार और कौशल विकास के लिए भी सहायता दी जाती है।
- विभिन्न सरकारी योजनाओं का समन्वय: नमस्ते योजना के तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की योजनाओं को जोड़ा जाता है। इससे एसएसडब्ल्यू को व्यावसायिक, सामाजिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
- जागरूकता अभियान: शहरी स्थानीय निकाय और एनएसकेएफडीसी टेलीविजन, प्रिंट मीडिया, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय भाषाओं, हिंदी और अंग्रेजी में जागरूकता अभियान चलाते हैं।
- एमआईएस और वेबसाइट: योजना की प्रभावी निगरानी, डेटा प्रबंधन और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) और समर्पित वेबसाइट का उपयोग किया जाता है।