New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM Republic Day offer UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 28th Jan., 2026 GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM Republic Day offer UPTO 75% + 10% Off, Valid Till : 28th Jan., 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग : रिक्तियां एवं प्रभाव

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।)

संदर्भ

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर, 2025 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) में लंबित पदों पर नियुक्तियों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। आयोग में वर्तमान रिक्तियों का कारण केंद्र सरकार की देरी और कार्यकारी लापरवाही है। अप्रैल 2025 में पूर्व अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा के कार्यकाल समाप्ति के बाद से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी सदस्यों के पद रिक्त हैं।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के बारे में

  • स्थापना : वर्ष 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत (17 मई 1993 से प्रभावी) 
  • नोडल मंत्रालय: यह अल्पसंख्यक मामलों मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • उद्देश्य : भारत के अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके कल्याण के लिए काम करना है। 
  • यह एक संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक निकाय है, और इसे अर्ध-न्यायिक शक्तियां प्राप्त हैं।

संरचना

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में एक अध्यक्ष एवं अन्य कुल सात सदस्य होते हैं:

  • एक अध्यक्ष
  • एक उपाध्यक्ष
  • छह सदस्य, जिनमें से प्रत्येक सदस्य को भारत के छह प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों-मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन; में से एक समुदाय का प्रतिनिधित्व करना होता है।

भूमिका और कार्य

  • अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा: यह आयोग सुनिश्चित करता है कि भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन न हो और उनके कल्याण के लिए उपयुक्त उपाय किए जाएं।
  • शिकायतों का निवारण: आयोग के पास यह अधिकार है कि वह अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित शिकायतों पर सुनवाई करे और उन्हें सुलझाए।
  • अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) शक्ति : आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ प्राप्त हैं, जैसे गवाहों को बुलाना, साक्ष्य लेना और रिकॉर्ड मंगाना।
  • सरकारी नीतियों पर निगरानी: आयोग यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी नीतियां और योजनाएं अल्पसंख्यकों के हित में हों और उनका उचित कार्यान्वयन हो।
  • सिफारिशें: आयोग केंद्र और राज्य सरकारों को अल्पसंख्यक समुदायों की भलाई के लिए सिफारिशें प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

  • नियुक्तियों में देरी: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में रिक्त पदों को भरने में प्रशासनिक स्तर पर देरी हो रही है। इससे आयोग अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है।
  • संसाधनों की कमी: यदि आयोग के पास पर्याप्त संसाधन और सशक्त नेतृत्व नहीं होगा, तो वह अपनी कार्यक्षमता को सही तरीके से लागू नहीं कर पाएगा।
  • राजनीतिक दबाव: आयोग के कार्यों में कभी-कभी राजनीतिक दबाव भी आ सकता है, जिससे वह स्वतंत्र रूप से अपनी भूमिका नहीं निभा पाता।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को अपनी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने और नियुक्तियों में हो रही देरी को शीघ्र हल करने के लिए केंद्र सरकार के साथ उचित पहल करनी चाहिए। 
  • आयोग की संरचना और कार्यों को गति देने के लिए एक त्वरित प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए बेहतर कार्य किया जा सके।
  • यह आयोग केवल एक संवैधानिक निकाय नहीं है, बल्कि यह अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने के लिए एक शक्तिशाली मंच है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR