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Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM

भारत में नवीन कंप्यूटेशनल पाठ्यक्रम: बुनियादी साक्षरता और भविष्य की चुनौतियाँ

संदर्भ 

  • हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक नया सीबीएसई पाठ्यक्रम प्रस्तुत किया गया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होने वाली यह पहल छात्रों में तार्किक चिंतन, समस्या समाधान और पैटर्न की पहचान जैसे कौशलों को विकसित करने का लक्ष्य रखती है। यद्यपि यह कदम भारत को वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में अग्रणी बनाने की दिशा में स्वागत योग्य है, किंतु इसकी सफलता के मार्ग में बुनियादी साक्षरता की एक गंभीर बाधा खड़ी है। 

संज्ञानात्मक अधिगम का आधार: एलएसआरडब्ल्यू (LSRW) मॉडल 

  • किसी भी सार्थक शैक्षणिक विकास की आधारशिला चार स्तंभों पर टिकी होती है : 
    • सुनना (Listening), 
    • बोलना (Speaking), 
    • पढ़ना (Reading) और 
    • लिखना (Writing) जिसे संक्षेप में LSRW कहा जाता है।
  • वस्तुतः ये केवल भाषाई कौशल नहीं हैं, बल्कि वे संज्ञानात्मक उपकरण हैं जिनके माध्यम से छात्र जटिल सूचनाओं का विश्लेषण करते हैं।
  • नया सीटी पाठ्यक्रम एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाता है, जहाँ इसे भाषा, गणित और विज्ञान के साथ जोड़ा गया है। विशेष रूप से प्राथमिक स्तर (कक्षा 3-5) के लिए डिज़ाइन की गई संसाधन पुस्तिकाएं यह स्पष्ट करती हैं कि सीटी का शिक्षण सीधे तौर पर भाषा की समझ पर निर्भर है। 
  • यद्यपि समस्या समाधान, पाठ की व्याख्या (Interpretation) और विश्लेषणात्मक कार्यों के लिए छात्र का अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप साक्षर होना अनिवार्य है। यदि कोई छात्र पढ़ने और समझने में अक्षम है, तो यह पाठ्यक्रम उसके लिए सोचने के अभ्यास के बजाय पढ़ने की बाधा बन जाएगा। 

धरातलीय वास्तविकता और सांख्यिकीय विरोधाभास 

  • ASER 2024 की रिपोर्ट : ग्रामीण भारत के कक्षा 5 के लगभग 50% से अधिक छात्र कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ने में असमर्थ हैं। यह स्थिति पिछले दो दशकों से लगभग यथावत बनी हुई है। 
  • PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण : यह चुनौती केवल ग्रामीण या सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। शहरी निजी स्कूलों के छात्र भी भाषा और गणित के अपेक्षित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। 
  • यह डेटा इंगित करता है कि हम एक ऐसे छात्र समूह पर उन्नत तार्किक संरचनाएँ (High-level Logical Frameworks) थोप रहे हैं, जिसकी नींव (बुनियादी साक्षरता) अभी भी अस्थिर है। 

समझ और संख्यात्मक कौशल के साथ पढ़ने में दक्षता के लिए राष्ट्रीय पहल  (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy-NIPUN) भारत और नीतिगत असंगति

  • भारत सरकार ने 2021 में निपुण भारत मिशन का शुभारंभ किया था, जिसका लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक प्रत्येक बच्चे को कक्षा 3 तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) प्रदान करना है। विरोधाभास यह है कि जिस वर्ष हम साक्षरता का बुनियादी लक्ष्य प्राप्त करने की समयसीमा तय कर चुके हैं, उसी वर्ष से हम एआई और सीटी जैसे डाउनस्ट्रीम कौशल लागू कर रहे हैं।  
  • शिक्षा के वैश्विक मॉडल (जैसे फिनलैंड या सिंगापुर) दर्शाते हैं कि एआई जैसी तकनीकें तब प्रभावी होती हैं जब प्राथमिक शिक्षा का आधार सुदृढ़ हो। भारत में यह प्रक्रिया अनुक्रमिक होने के बजाय समानांतर दिखाई देती है, जो शिक्षण की गुणवत्ता पर दबाव डाल सकती है।

निपुण भारत पहल के बारे में 

  • यह शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है जिसे 5 जुलाई, 2021 को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य 2026-27 तक 9 वर्ष की आयु (कक्षा 3) तक के बच्चों के लिए सार्वभौमिक मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान प्राप्त करना है। 

प्रमुख बिंदु 

  • लक्ष्य : यह सुनिश्चित करना कि सभी बच्चे 2026-27 तक कक्षा 3 की योग्यताएं प्राप्त कर लें।
  • लक्षित समूह : 3 से 9 वर्ष की आयु के बच्चे (बुनियादी चरण)।
  • मुख्य क्षेत्र : अभिगम और छात्रों को बनाए रखना, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षण सामग्री.
  • कार्यान्वयन : शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला डीएसईएल इसकी देखरेख करता है, जबकि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कार्यान्वयन योजनाएँ बनाते हैं। 

आगे की राह 

  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सीटी और एआई का समावेश अनिवार्य है, किंतु इसकी सफलता का मार्ग कक्षा की अंतिम बेंच पर बैठे उस छात्र से होकर गुजरता है जो अभी भी अक्षरों को अर्थ के साथ जोड़ने के लिए संघर्ष कर रहा है। 

सुझाव: 

  • एकीकृत सुदृढ़ीकरण: सीटी पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन के साथ-साथ एलएसआरडब्ल्यू (LSRW) कौशलों पर विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं।
  • शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षकों को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वे तकनीकी कौशल सिखाते समय भाषाई बाधाओं को पहचान सकें। 
  • मूल्यांकन पद्धति में लचीलापन: मूल्यांकन केवल लिखित न होकर मौखिक और क्रियात्मक भी हो, ताकि भाषा की कमजोरी तर्क की क्षमता को न दबाए। 
  • यद्यपि एक सुदृढ़ भविष्य की इमारत तभी टिक पाएगी जब उसकी नींव (बुनियादी साक्षरता) मजबूत हो। अन्यथा, हम डिजिटल कौशल की एक ऐसी संरचना खड़ी कर देंगे जिसके नीचे बुनियादी शिक्षा की खाई बनी रहेगी।
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