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प्रतिमान परिवर्तन: महिला नेतृत्व में विकास

परिचय

भारत अब केवल महिलाओं के विकास (Women’s Development) से आगे बढ़कर महिला नेतृत्व में विकास (Women-Led Development) की ओर बढ़ रहा है जहाँ महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की प्रेरक शक्ति बनती हैं। यह दृष्टिकोण विकसित भारत @2047 और नारी शक्ति के विज़न के अनुरूप है।

महिला नेतृत्व में विकास: अवधारणा और औचित्य

  • महिला नेतृत्व में विकास केवल कल्याण (Welfare) तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सक्षम क्षमता (Agency), नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति पर जोर है।
  • भारत की G20 अध्यक्षता (2023) ने नारी शक्ति को केंद्र में रखते हुए इस बदलाव को मजबूती दी।
  • IMF के अनुमान के अनुसार, महिला श्रम शक्ति में 5.8% वृद्धि से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के GDP में लगभग 8% की बढ़ोतरी संभव है।

सशक्तिकरण की आधारशिला: शिक्षा

  • NEP 2020 ने बालिकाओं की शिक्षा और सर्वजनात्मक मौलिक साक्षरता को प्राथमिकता दी है।
  • उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 4.33 करोड़ तक पहुँच गया जो कुल नामांकन का लगभग 50% है (2022–23)।
  • IITs में अतिरिक्त सीटें (Supernumerary Seats) 2018 से लागू की गईं, जिससे अधिकांश IITs में 20% महिला नामांकन प्राप्त हुआ।
  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं और छात्रवृत्तियों ने विद्यालयी शिक्षा में लिंग अंतराल को कम किया।

आर्थिक भागीदारी और उद्यमिता

  • अक्तूबर 2025 तक DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त 1.97 लाख स्टार्टअप में लगभग 48% में कम-से-कम एक महिला निदेशक/साझेदार है।
  • महिलाएँ कार्य-योग्य जनसंख्या का 37% हैं जो स्थिर सुधार को दर्शाता है (PLFS)।
  • अनौपचारिक क्षेत्र में महिलाओं का प्रभुत्व कृषि में 62.9% और मंरेगा (MGNREGS) में 57.4% (2022–23) है।
  • DAY-NRLM के माध्यम से 90.76 लाख स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) के तहत 10.04 करोड़ से अधिक महिलाएँ संगठित हुईं।

राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व

  • लोकसभा में लगभग 15% और राज्यसभा में 14% सीटें महिलाओं के पास हैं जिससे लगातार अंतर बना हुआ है।
  • पंचायती राज संस्थाओं में मजबूत समावेशन प्रदर्शित होता है जिसमें 46.94% प्रतिनिधि महिलाएँ हैं (MoPR, 2024) अर्थात 3.1 मिलियन स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों में से लगभग 1.3 मिलियन महिलाएँ।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण का प्रावधान करता है।

वित्तीय समावेशन और संपत्ति स्वामित्व

  • महिलाओं के पास 39.2% बैंक खाते हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में यह 42.2% तक पहुँचता है।
  • डीमैट (DEMAT) खाते 33.26 मिलियन (2021) से बढ़कर 143.02 मिलियन (नवम्बर 2024) हो गए।
  • PMAY-G जैसी योजनाओं से महिलाओं के सामाजिक निवेश में वृद्धि हुई है, जैसे बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश।

निष्कर्ष

महिला नेतृत्व में विकास लाभार्थियों से विकास और शासन के नेतृत्वकर्ता बनने की संरचनात्मक दिशा को दर्शाता है। शिक्षा, कौशल, उद्यमिता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और वित्तीय समावेशन में निरंतर निवेश आवश्यक है ताकि विकसित भारत @2047 में महिलाएँ भारत के विकास पथ को समान साझेदार के रूप में आकार दें।

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