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फॉस्फेट खनन तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।)

संदर्भ

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की गैर-कोयला खनन क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (Expert Appraisal Committee : EAC) ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में संभावित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) क्षेत्र में 400 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रस्तावित बिरमानिया रॉक फॉस्फेट खदान के विस्तार के लिए पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (Environmental Impact Assessment : EIA) को मंजूरी दे दी है। 
  • अध्ययन के दायरे में विभिन्न पर्यावरणीय मापदंडों और परियोजना के वायु, जल, भूजल, पारिस्थितिकी और वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव का अध्ययन शामिल है।

रॉक फॉस्फेट खनन 

  • भारत में रॉक फॉस्फेट का उपयोग फॉस्फेट उर्वरक उत्पादन में एक प्रमुख कच्चे माल के रूप में किया जाता है। 
  • भारत रॉक फॉस्फेट के लिए मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है।

उद्देश्य 

  • रॉक फॉस्फेट आयात पर निर्भरता कम करना 
  • उर्वरक उत्पादन में वृद्धि 
  • खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा 

संबंधित मुद्दे 

  • आवास क्षति : रॉक फॉस्फेट खनन जी.आई.बी. के अंतिम बचे हुए चरागाह आवास को खंडित कर सकता है।
  • टकराव का जोखिम: इस क्षेत्र में बिजली पारेषण लाइनों के कारण जी.आई.बी. को पहले से ही खतरा है।
  • संरक्षण बनाम विकास: यह पारिस्थितिक सुरक्षा और संसाधन आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने में भारत की दुविधा को दर्शाता है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में 

  • वर्तमान में भारत में 200 से भी कम बस्टर्ड बचे हैं, जिनमें से अधिकांश राजस्थान और गुजरात में हैं।
  • आई.यू.सी.एन. स्थिति : अतिसंकटग्रस्त
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध।
  • केंद्र के प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम के तहत मुख्य प्रजातियों में शामिल।

आगे की राह 

  • ई.आई.ए. जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करेगा और शमन उपाय सुझाएगा।
  • अंतिम मंजूरी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय पर निर्भर करेगी।
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