पीएम-सेतु: युवा सशक्तिकरण और कौशल विकास

संदर्भ 

'प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs' (PM-SETU) योजना के तहत, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स (ITIs) को ऐसे संस्थानों में बदला जा रहा है जो ज़रूरतों के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह हों तथा इंडस्ट्री की ज़रूरतों के अनुरूप काम करें। यह वोकेशनल सुधार को रोज़गार क्षमता ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ग्लोबल स्किल लीडरशिप के लिए एक रणनीतिक बुनियादी ढांचा मानता है।  

कौशल विकास का बदलता परिदृश्य  

  • क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2027 में भारत 13वें स्थान पर है; इसका जनसांख्यिकीय लाभांश वैश्विक कमी को दूर कर सकता है। 
  • वर्ष 2014-2026 के बीच औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या 9,776 से बढ़कर 13,888 हो गई तथा सेक्टर कौशल परिषदों की संख्या 20 से बढ़कर 36 हो गई।
  • जन शिक्षण संस्थानों की संख्या 234-294 हो गई, जबकि प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों का विस्तार शून्य से बढ़कर 500 से अधिक हो गया। 
  • वर्ष 2014 से प्रशिक्षुओं की संख्या 1.1 लाख से बढ़कर 56.08 लाख से अधिक हो गई; अल्पकालिक प्रशिक्षुओं की संख्या 14.84 लाख से बढ़कर 1.60 करोड़ हो गई, जिसे स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) द्वारा समर्थित किया गया। 
  • सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस, रक्षा, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक, उद्योग-अनुकूल दक्षताओं की आवश्यकता होती है। 

पीएम-सेतु की संस्थागत संरचना  

  • पीएम-सेतु के तहत 200 हब और 800 स्पोक संस्थानों के साथ-साथ पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से 1,000 सरकारी आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। 
  • केंद्र सरकार, राज्य और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 60,000 करोड़ रुपये का पांच वर्षीय आवंटन किया गया है, जिसमें केवल उपकरणों के आधुनिकीकरण की बजाय शासन सुधार को प्राथमिकता दी गई है।
  • प्रत्येक हब-स्पोक क्लस्टर एक विशेष प्रयोजन वाहन के माध्यम से संचालित होता है तथा एंकर उद्योग भागीदार के पास बहुमत हिस्सेदारी होती है और वह दैनिक संचालन का प्रबंधन करता है।
  • केंद्र और राज्य सरकारें स्वामित्व, निगरानी और आरक्षित मामलों पर नियंत्रण बनाए रखती हैं, जिससे समान पहुंच और सार्वजनिक जवाबदेही की रक्षा होती है।  
  • उद्योग की भागीदारी से पाठ्यक्रम, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कामकाज तय होते हैं, जिससे हब-स्पोक प्रोग्राम क्षेत्रीय लेबर-मार्केट की ज़रूरतों के अनुकूल बनते हैं।
  • सुधार की प्राथमिकताओं में बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, अप्रेंटिसशिप, कार्यस्थल पर प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों की क्षमता में सुधार, मूल्यांकन और मांग-आधारित पाठ्यक्रम शामिल हैं।  

सीखने एवं रोजगार के परिणाम 

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत हब आईटीआई को चार नए ट्रेड जोड़ने/दस ट्रेडों को अपग्रेड करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया है; स्पोक्स संस्थान भी इसी तरह उद्योग-संरेखित कार्यक्रमों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।  
  • नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क का मॉड्यूलर सिस्टम फ्लेक्सिबल क्रेडिट और जीवन भर सीखने की सुविधा देता है; अप्रेंटिसशिप और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग सीखने की प्रक्रिया को क्लासरूम से आगे ले जाती है। 
  • ग्रेजुएट ट्रेसर स्टडीज़ रोज़गार के नतीजों का आकलन करती हैं; इससे इंडस्ट्री को ट्रेंड टैलेंट मिलता है, भर्ती का खर्च कम होता है और ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स पर असर डालने का मौका मिलता है।
  • संस्थागत तत्परता से रोज़गार की क्षमता, प्रोडक्टिविटी और लोगों का भरोसा बढ़ता है, जिससे नागरिकों का सशक्तिकरण और 'विकसित भारत' का लक्ष्य आगे बढ़ता है।

निष्कर्ष 

पीएम- सेतु आईटीआई को भविष्य के लिए तैयार संस्थानों में बदल सकता है, जिससे भारत के जनसांख्यिकीय लाभ को रोजगार क्षमता, उत्पादकता और वैश्विक कार्यबल नेतृत्व में परिवर्तित किया जा सकता है। 

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