पीएम श्री: आदर्श स्कूलों से बदलती स्कूली शिक्षा की तस्वीर
संदर्भ
भारत की स्कूली शिक्षा आज एक ऐसे मोड़ पर है, जहाँ केवल स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। चुनौती अब ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करने की है, जो हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, समान, समावेशी और भविष्य के लिए उपयोगी शिक्षा दे सके। देश के करीब 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इतनी विशाल व्यवस्था में बदलाव लाना आसान नहीं, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इसकी दिशा स्पष्ट कर दी है। इसी दिशा को स्कूल स्तर पर जमीन पर उतारने की कोशिश है—‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ यानी ‘पीएम श्री’ योजना।
7 सितंबर 2022 को शुरू की गई यह केंद्र प्रायोजित योजना मौजूदा सरकारी स्कूलों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और आदर्श संस्थानों में बदलने की परिकल्पना करती है। इसका लक्ष्य 14,500 से अधिक स्कूलों को ऐसे मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है, जहाँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांत व्यवहार में दिखाई दें। योजना की कुल लागत 27,360 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 18,128 करोड़ रुपये है। जुलाई 2026 तक देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,092 स्कूलों का चयन किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इन स्कूलों से 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
केवल इमारत नहीं, शिक्षा की पूरी संस्कृति बदलने का प्रयास
पीएम श्री की खासियत यह है कि इसका उद्देश्य केवल स्कूलों की इमारतों को चमकाना नहीं है। यह स्कूल को एक ऐसे जीवंत संस्थान के रूप में विकसित करने पर जोर देता है, जहाँ विद्यार्थी सुरक्षित वातावरण में सीखें, सवाल पूछें, प्रयोग करें, अपनी प्रतिभा पहचानें और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनें।
योजना के अंतर्गत स्कूलों को अपने क्षेत्र के मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। वे अपनी अच्छी कार्यप्रणालियों को आसपास के स्कूलों के साथ साझा करेंगे और मार्गदर्शन, सहयोग तथा समूह आधारित गतिविधियों के माध्यम से व्यापक बदलाव का माध्यम बनेंगे। इस तरह ‘पीएम श्री’ का प्रभाव चयनित स्कूलों की सीमा से बाहर ले जाने की कोशिश की जा रही है।
यह दृष्टिकोण शिक्षा को केवल परीक्षा और अंक प्राप्त करने की प्रक्रिया न मानकर जीवनभर सीखने, भूलने-सीखने और नए ज्ञान के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित करता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रयोगशाला रूप
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा में 5+3+3+4 पाठ्यचर्या एवं शिक्षण-शास्त्रीय संरचना, अनुभवात्मक शिक्षा, मातृभाषा में सीखने, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी के उपयोग और समग्र विकास पर बल दिया है। ‘पीएम श्री’ स्कूल इन्हीं विचारों को विद्यालयी स्तर पर लागू करने की प्रयोगशाला बन रहे हैं।
इन स्कूलों में विद्यार्थियों को स्थानीय संदर्भ से जोड़ने के लिए बस्ता-मुक्त दिवस, स्थानीय कारीगरों के साथ प्रशिक्षण, स्थानीय कला एवं शिल्प का अध्ययन, सांस्कृतिक गतिविधियाँ तथा पारंपरिक ज्ञान से परिचित कराने जैसी पहल की जा रही हैं। इससे शिक्षा किताबों की चारदीवारी से निकलकर वास्तविक जीवन से जुड़ती है।
शिक्षा का माध्यम भी अधिक समावेशी बनाने पर जोर है। विशेषकर शुरुआती कक्षाओं में मातृभाषा, स्थानीय अथवा क्षेत्रीय भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नवीनतम यू-डीआईएसई प्लस 2025-26 के अनुसार ‘पीएम श्री’ स्कूलों में 6,102 संस्कृत शिक्षक, 1,994 उर्दू शिक्षक और 9,152 क्षेत्रीय भाषा के शिक्षक कार्यरत हैं। बहुभाषी शिक्षा का यह प्रयास बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान को मजबूत करने के साथ शिक्षा में सांस्कृतिक विविधता को भी स्थान देता है।
डिजिटल कक्षा से आगे तकनीकी दक्षता तक
आज की शिक्षा में तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि सीखने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ‘पीएम श्री’ स्कूलों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुविधाएँ, स्मार्ट कक्षाएँ, इंटरनेट, डिजिटल शिक्षण मंच और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित आधारित कार्यक्रम विकसित किए जा रहे हैं।
‘दीक्षा’ जैसे डिजिटल मंच शिक्षकों और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराते हैं। इसका उद्देश्य केवल बच्चों को तकनीक का उपयोग सिखाना नहीं, बल्कि आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और डिजिटल साक्षरता जैसे कौशल विकसित करना है।
साथ ही, शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर खेल, कला, रचनात्मक गतिविधियों और जीवन-कौशल से जोड़ा जा रहा है। इससे नेतृत्व, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक-भावनात्मक क्षमताओं के विकास का रास्ता खुलता है।
शिक्षक मजबूत तो स्कूल मजबूत
किसी भी शिक्षा सुधार की सफलता अंततः शिक्षक की क्षमता पर निर्भर करती है। ‘पीएम श्री’ में इसलिए शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के निरंतर व्यावसायिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए प्रति संस्थान 3 लाख रुपये तक और विभिन्न शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए प्रति शिक्षक 2,500 रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। प्रधानाचार्यों को शैक्षिक नेतृत्व, विद्यालय प्रबंधन और योग्यता आधारित शिक्षण की योजना से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। शिक्षकों को समग्र प्रगति कार्ड, विद्यालय सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श और प्रौद्योगिकी के एकीकरण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
चयन में भी गुणवत्ता की कसौटी
‘पीएम श्री’ स्कूलों का चयन सामान्य नामांकन या प्रशासनिक निर्णय के आधार पर नहीं, बल्कि ‘चैलेंज विधि’ के माध्यम से किया जाता है। पहले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन करते हैं। इसके बाद यू-डीआईएसई प्लस आँकड़ों के आधार पर पात्र स्कूलों की पहचान की जाती है और फिर चुनौती आधारित मूल्यांकन के माध्यम से चयन किया जाता है।
स्कूलों के लिए पक्की इमारत, सुरक्षा, बिजली, पेयजल, अलग-अलग शौचालय, हाथ धोने की सुविधा, पुस्तकालय अथवा खेल सुविधाओं जैसे न्यूनतम मानक निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त शहरी स्कूलों को न्यूनतम 70 प्रतिशत और ग्रामीण स्कूलों को 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। मूल्यांकन में अवसंरचना के साथ सीखने के परिणाम, शिक्षण-पद्धति, पोषण, व्यावसायिक शिक्षा, हरित पहल और हितधारकों की प्रतिबद्धता को भी महत्व दिया जाता है।
13 हजार से अधिक स्कूलों का राष्ट्रीय नेटवर्क
जुलाई 2026 तक चुने गए 13,092 ‘पीएम श्री’ स्कूल देश के 725 जिलों और 8,340 विकासखंडों/शहरी स्थानीय निकायों तक फैले हैं। इनमें 1,305 प्राथमिक, 3,102 उच्च प्राथमिक, 3,141 माध्यमिक और 5,544 उच्चतर माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। नेटवर्क में 80 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 913 केंद्रीय विद्यालय, 620 नवोदय विद्यालय और 4 राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के स्कूल भी शामिल हैं।
वित्तीय प्रतिबद्धता भी लगातार बढ़ी है। परियोजना अनुमोदन बोर्ड द्वारा स्वीकृत केंद्र का हिस्सा 2023-24 में 2,520 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 5,224 करोड़ रुपये हो गया है, अर्थात लगभग 107 प्रतिशत की वृद्धि। यह योजना के बढ़ते दायरे और सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
आगे की चुनौती : मॉडल से व्यवस्था तक
‘पीएम श्री’ की असली सफलता इस बात से तय होगी कि क्या इन 13,092 स्कूलों में हुए सुधार आसपास के लाखों स्कूलों तक पहुँच पाते हैं। यदि मॉडल स्कूल अपने नवाचार, शिक्षण पद्धतियों और प्रबंधन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से साझा कर पाते हैं, तो यह योजना केवल कुछ हजार स्कूलों के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।
इसके लिए ग्रामीण-शहरी अंतर, डिजिटल विभाजन, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण सामग्री और रखरखाव जैसी चुनौतियों पर निरंतर ध्यान देना होगा। केवल स्मार्ट कक्षा या बेहतर भवन से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती; इसके लिए प्रेरित शिक्षक, सक्षम नेतृत्व, गुणवत्तापूर्ण पाठ्यचर्या और सीखने के बेहतर परिणाम भी जरूरी हैं।
निष्कर्ष
पीएम श्री योजना भारत की स्कूली शिक्षा में अवसंरचना से आगे बढ़कर गुणवत्ता और सीखने की संस्कृति विकसित करने का प्रयास है। इसका लक्ष्य ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है जो केवल परीक्षाओं में सफल न हों, बल्कि रचनात्मक, आत्मविश्वासी, कुशल, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनें।
यदि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 दिशा है, तो ‘पीएम श्री’ उस दिशा को विद्यालय के स्तर पर व्यवहार में बदलने का माध्यम है। आने वाले वर्षों में इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही होगी कि एक आदर्श स्कूल की मिसाल धीरे-धीरे पूरे स्कूल तंत्र की सामान्य पहचान बन जाए। यही वह बदलाव है, जो भारत की विशाल युवा आबादी को केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए सक्षम बना सकता है।