संदर्भ
पीएम विश्वकर्मा योजना अपने शुभारंभ के लगभग तीन वर्ष पूर्ण करने जा रही है और अब तक 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर चुकी है। योजना के अंतर्गत कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। लाभार्थियों को उद्यम असिस्ट, जीईएम, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों से जोड़कर उनके उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि के मूल मंत्र पर आधारित यह योजना गुरु-शिष्य परंपरा और पारंपरिक कौशल को मजबूत करते हुए कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
योजना से संबंधित प्रमुख बिंदु
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों का समर्थन करना
- भारत के पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- इनका काम पारंपरिक कौशल, परिवार से मिले ज्ञान और छोटे स्तर के उद्यमों पर आधारित है।
- इन्हें शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से 17 सितंबर 2023 को पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की गई।
- पीएम विश्वकर्मा योजना तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है
- सम्मान,
- सामर्थ्य और
- समृद्धि
- इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सम्मान, कौशल और आर्थिक अवसर प्रदान करना है। साथ ही, यह गुरु-शिष्य परंपरा और परिवार-आधारित पारंपरिक कौशल को संरक्षित एवं मजबूत करने का प्रयास करती है।
- वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक के लिए इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना का कुल परिव्यय 13,000 करोड़ रुपये है। इसके तहत 18 पारंपरिक ट्रेडों को शामिल किया गया है। योजना का लक्ष्य कारीगरों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता एवं बाजार पहुंच बढ़ाने के साथ उन्हें घरेलू और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है।
- जैसे-जैसे 17 सितंबर 2026 को योजना के 3 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, 30 लाख लाभार्थियों का पंजीकरण लक्ष्य पहले ही हासिल किया जा चुका है।
योजना की रूपरेखा और प्रमुख घटक
- पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कारीगरों और शिल्पकारों को एक ही प्रारूप में विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जाती है।
- इसके प्रमुख घटकों में मान्यता, कौशल उन्नयन, टूलकिट प्रोत्साहन, ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता शामिल हैं।
मान्यता:
- पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर, लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाती है।
कौशल उन्नयन:
- कौशल उन्नयन के माध्यम से, लाभार्थियों को आधुनिक उपकरणों, सर्वोत्तम प्रथाओं और नवीन डिजाइनों से परिचित कराया जाता है। प्रशिक्षण में डिजिटल लेनदेन, विपणन और उद्यमशीलता ज्ञान भी शामिल है।
- बुनियादी प्रशिक्षण 5-7 दिनों के लिए चलता है, जबकि उन्नत प्रशिक्षण 15 दिनों या उससे अधिक के लिए होता है। प्रशिक्षुओं को प्रति दिन 500 रूपये का वजीफा दिया जाता है।
आधुनिक टूलकिट
- योजना के पात्र लाभार्थियों को 15,000 रुपये तक के आधुनिक टूलकिट प्रदान किए जाते हैं, जिससे वे अपने काम को बेहतर और अधिक कुशलता से कर सकें।
ऋण सहायता:
- पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत कारीगरों को 3 लाख रुपये तक का बिना जमानत उद्यम विकास ऋण दो किश्तों में दिया जाता है।
- पहली किश्त 1 लाख रुपये तक 18 महीनों की अवधि के लिए दी जाती है। लाभार्थियों को पहली किश्त के लिए बुनियादी प्रशिक्षण पूरा करना आवश्यक है।
- दूसरी किश्त 2 लाख रुपये तक 30 महीने की अवधि के लिए दी जाती है।
- ऋण पर 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर लागू होती है, जबकि सरकार की ओर से 8 प्रतिशत तक की ब्याज छूट प्रदान की जाती है।
- दूसरी किश्त की पात्रता पहली किश्त के सफल पुनर्भुगतान के साथ डिजिटल लेनदेन अपनाने या उन्नत प्रशिक्षण पूरा करने से जुड़ी है।
डिजिटल और बाजार सहायता:
- पीएम विश्वकर्मा योजना वित्तीय सहायता के साथ डिजिटल और विपणन सहायता भी प्रदान करती है। लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रति डिजिटल भुगतान या प्राप्ति 1 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है, जो प्रति माह अधिकतम 100 लेनदेन तक है।
- विपणन सहायता के तहत व्यापार मेले, प्रदर्शनियां, ब्रांडिंग, विज्ञापन, प्रचार और जीईएम जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के अवसर दिए जाते हैं। इससे कारीगरों को औपचारिक व्यावसायिक गतिविधियां अपनाने और व्यापक बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलती है।
पात्रता, पंजीकरण और औपचारिकता
योग्य आवेदक:
- पीएम विश्वकर्मा योजना 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन कारीगरों और शिल्पकारों के लिए है, जो 18 अधिसूचित पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक में अपने हाथों और औजारों से काम करते हैं। पात्र लाभार्थी स्वरोजगार के आधार पर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत होने चाहिए।
- आवेदकों ने पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वरोजगार या व्यवसाय विकास के लिए समान ऋण-आधारित सरकारी योजनाओं के तहत ऋण नहीं लिया हो।
- पंजीकरण और लाभ परिवार के एक सदस्य तक सीमित हैं, जिसमें पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल हैं।
- मुद्रा और पीएम स्वनिधि के लाभार्थी जिन्होंने अपने ऋण का पूरी तरह से भुगतान कर दिया है, वे पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत पात्र हैं।
यद्यपि सरकारी सेवा से जुड़ा व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य पात्र नहीं हैं।
पंजीकरण:
- आवेदन केवल कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं। इसके अंतर्गत त्रि-स्तरीय सत्यापन और अनुमोदन किया जाता है -
- सत्यापन: ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर।
- पुनरीक्षण और सिफारिश: जिला कार्यान्वयन समिति द्वारा।
- अनुमोदन: स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा।
- पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को औपचारिक एमएसएमई इकोसिस्टम में उद्यमियों के रूप में उद्यम सहायता प्रदाता प्लेटफॉर्म पर भी शामिल किया जाता है। यह उन्हें लागू सरकारी लाभों तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत प्रगति
- कौशल उन्नयन और टूलकिट समर्थन: 15 सितंबर 2026 तक, 24.37 लाख से अधिक कारीगर बुनियादी कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 18.16 लाख से अधिक लाभार्थियों को टूलकिट प्रदान किए जा चुके हैं।
- संस्थागत ऋण तक पहुंच को मजबूत करना: योजना के तहत लगभग 5,316 करोड़ रुपये के 6.19 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इस ऋण सहायता का उद्देश्य कारीगरों को कच्चा माल खरीदने, उपकरणों को आधुनिक बनाने, कारोबार का विस्तार करने और अपने उद्यमों को मजबूत करने में सहायता देना है।
- डिजिटल सक्षमता: 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन मिला है, जिसके तहत 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है।
इसके अलावा, 12,000 से अधिक कारीगरों को ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए एआई टूल्स के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे अपने उत्पादों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
भविष्य में पारंपरिक कौशल और आजीविका को बनाए रखना
- पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक व्यवसायों को उनके स्थानीय और परिवार-आधारित स्वरूप को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय सहायता के दायरे में लाती है।
- यह योजना पारंपरिक कौशल और गुरु-शिष्य परंपरा को संरक्षित एवं मजबूत करने पर भी बल देती है। कारीगरों और शिल्पकारों को काम के विभिन्न चरणों में सहायता देकर योजना का उद्देश्य आजीविका के नए अवसरों का सृजन करना और बदलते आर्थिक परिवेश में पारंपरिक ज्ञान व कौशल को प्रासंगिक बनाए रखना है।