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क्रीमीलेयर की आय सीमा का पुनर्निधारण

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के संदर्भ में क्रीमीलेयर की आय सीमा को बढ़ाने हेतु पुनर्परीक्षण किया जा रहा है।

प्रमुख बिंदु

  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इसके लिये परामर्श प्रारंभ करेगा और अधिकतम आय सीमा को मौजूदा 8 लाख रुपए से बढ़ाकर प्रस्तावित 12 लाख रुपए करने के मुद्दे की जाँच करेगा।
  • साथ ही, मंत्रालय पुनः यह जाँच करेगा कि वार्षिक आय गणना में कृषि आय को शामिल किया जाना चाहिये या नहीं। वर्तमान में सकल वार्षिक आय में कृषि से प्राप्त आय को शामिल नहीं किया जाता।
  • सामान्यतः आय मानदंडों की प्रत्येक तीन साल में समीक्षा की जाती है। पिछली समीक्षा वर्ष 2017 में की गई थी, जिसके पश्चात् आय सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दिया गया था।
  • विदित है कि मंत्रालय ने मार्च 2019 में सकल वार्षिक आय सीमा की समीक्षा करने तथा क्रीमीलेयर के मानदंडों पर पुनः विचार करने (जिन्हें वर्ष 1993 में निर्धारित किया गया था) के लिये एक पैनल का गठन किया था।

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में, ओ.बी.सी. उच्च शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के रोज़गार में 27% आरक्षण के हकदार हैं, यदि उनके माता-पिता की सकल वार्षिक आय 8 लाख रुपए से अधिक नहीं है।

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