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नदियों द्वारा प्राचीन कार्बन का पुनः वायुमंडल में रिसाव

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

चर्चा में क्यों

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, हजारों वर्षों से भू-पर्पटी में संग्रहित प्राचीन कार्बन, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के रूप में वायुमंडल में रिस रहा है और इस CO2 का स्रोत विश्व की नदियाँ हैं।

शोध के बारे में

  • नेचर जर्नल में प्रकाशित इस शोध हेतु अंतर्राष्ट्रीय शोध दल ने दुनिया भर के 26 अलग-अलग देशों की 700 से अधिक नदियों का अध्ययन किया।
  • नदी के कार्बन की तिथि जानने के लिए, नदियों से CO2 और मीथेन के विस्तृत रेडियोकार्बन माप लिए गए और नदी के नमूनों में कार्बन-14 के स्तर की तुलना आधुनिक वायुमंडलीय CO2 के मानक संदर्भ से की।

शोध के परिणाम

  • प्राचीन कार्बन भंडार का पिछले अनुमानों की तुलना में काफी अधिक दर पर वायुमंडल में रिसाव हो रहा है।
  • यह शोध वैश्विक कार्बन चक्र के बारे में पिछली धारणाओं को चुनौती देता है, जिसमें माना जाता था कि अधिकांश नदी उत्सर्जन पिछले 70 वर्षों में टूटकर नदी प्रणाली में चले गए पौधों (नवीन कार्बन भण्डार) से आता है।
  • नया अध्ययन इसके विपरीत संकेत देता है, जिसमें आधे से अधिक उत्सर्जन हज़ारों साल पहले या उससे भी पहले जमा हुए दीर्घकालिक कार्बन भंडार के कारण होता है।
  • शोध के अनुसार, पौधे और उथली मिट्टी की परतें प्राचीन कार्बन के रिसाव का मुकाबला करने के लिए हर साल वायुमंडल से लगभग एक गीगाटन अधिक CO2 हटा रही हैं।

महत्त्व

  • नदियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं, और इनमें से आधे से अधिक उत्सर्जन कार्बन भंडारों से आ रहे हैं, जिन्हें हम अपेक्षाकृत स्थिर मानते हैं।
  • इसका मतलब है कि हमें वैश्विक कार्बन चक्र के इन महत्वपूर्ण हिस्सों का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
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