हाल ही में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, आरएसवीसी एएमआरआईटी प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया, जो प्रौद्योगिकी आधारित ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) के सहयोग से नाबार्ड द्वारा विकसित, एएमआरआईटी, रूटेज स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) इकोसिस्टम की डिजिटल रीढ़ के रूप में कार्य करता है, ग्रामीण नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का समर्थन करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को वृहद रूप से अपनाने में सक्षम बनाता है।
आरएसवीसी-अमृत प्लेटफॉर्म के बारे में
आरएसवीसी की पहल कृषि, ग्रामीण उद्यम, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, सहायक प्रौद्योगिकियां, जल एवं स्वच्छता तथा नागरिक सेवाएं जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए, ग्राम-स्तरीय प्रौद्योगिकी केंद्रों के माध्यम से अनुसंधान संस्थानों, नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स से ग्रामीण समुदायों तक उपयुक्त और किफायती प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सुगम बनाती है।
एएमआरआईटी इस भौतिक पहुंच को और आगे बढ़ाते हुए इकोसिस्टम में एक डिजिटल परत जोड़ता है, और नाबार्ड को उम्मीद है कि यह ग्रामीण नवाचारों, प्रौद्योगिकियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सहयोग के अवसरों के राष्ट्रीय भंडार के रूप में विकसित होगा, जो व्यापक प्रौद्योगिकी अपनाने और विकसित भारत 2047 के विजन का समर्थन करेगा।
ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG) के बारे में
रुटैग स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (Office of the Principal Scientific Adviser—OPSA) की एक पहल है, जिसे 2004 में शुरू किया गया था।
इसे ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उच्च स्तर के हस्तक्षेप और सहयोग उपलब्ध कराने के एक तंत्र के रूप में परिकल्पित किया गया था।
ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह पहल के उद्देश्य:
हितधारकों को जोड़ना: क्षेत्र-विशिष्ट तकनीकी आवश्यकताओं की पहचान करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs), सामुदायिक संगठनों और स्टार्ट-अप्स जैसे विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग करना।
मांग-आधारित प्रौद्योगिकियों का विकास: ऐसी प्रौद्योगिकियों का विकास करना जो सामाजिक-आर्थिक आँकड़ों और स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों तथा राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हों।
प्रोटोटाइप का सत्यापन: विकसित प्रोटोटाइप का परीक्षण एवं सत्यापन करना तथा उनकी व्यापक स्तर पर उपयोगिता और विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए व्यावसायीकरण (Commercialization) की संभावनाओं का पता लगाना।
व्यावसायीकरण:सफलतापूर्वक सत्यापित और संभावनाशील प्रौद्योगिकियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना।
नाबार्ड (NABARD) के बारे में
नाबार्ड (NABARD) भारत का शीर्ष विकास बैंक है, जिसकी स्थापना 1982 में संसद के एक अधिनियम के तहत कृषि और ग्रामीण विकास को टिकाऊ एवं समानतापूर्ण तरीके से बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
नाबार्ड ने कृषि वित्त, बुनियादी ढाँचे के विकास, बैंकिंग प्रौद्योगिकी, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और संयुक्त देयता समूहों (JLGs) के माध्यम से माइक्रोफाइनेंस तथा ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर भारतीय गाँवों में लोगों के जीवन को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह ग्रामीण क्षेत्रों में सहभागी वित्तीय और गैर-वित्तीय हस्तक्षेपों, नवाचारों, प्रौद्योगिकी तथा संस्थागत विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है।
उद्देश्य:
सहभागी वित्तीय और गैर-वित्तीय हस्तक्षेपों, नवाचारों, प्रौद्योगिकी और संस्थागत विकास के माध्यम से सतत और न्यायसंगत कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना, ताकि समृद्धि सुनिश्चित हो सके।