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ग्रामीण युवाओं में रोज़गार सृजन सम्बंधी योजनाएँ

चर्चा में क्यों?

प्रवासी श्रमिकों के कल्याण एवं ग्रामीण युवाओं में रोज़गार सृजन के लिये ग्रामीण विकास मंत्रालय वर्तमान में तीन प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर रहा है।

प्रमुख योजनाएँ

  • महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGS): यह एक माँग संचालित मजदूरी रोज़गार कार्यक्रम है, जो देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाने का प्रावधान करता है। इसके तहत स्वेच्छा से अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम सौ दिनों की मज़दूरी की गारंटी प्रदान की जाती है।
  • दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY): यह वेतन आधारित रोज़गार के लिये एक ‘प्लेसमेंट लिंक्ड कौशल विकास कार्यक्रम’ है।
  • ग्रामीण स्वरोज़गार एवं प्रशिक्षण संस्थानों (RSETIs) के माध्यम से कौशल विकास: यह किसी प्रशिक्षु को बैंक ऋण लेने तथा सूक्ष्म उद्यम प्रारंभ करने में सक्षम बनाता है। ये प्रशिक्षु नियमित वेतनभोगी रोज़गार भी कर सकते हैं।

अन्य योजनाएँ

  • मनरेगा के तहत प्रत्यक्ष रोज़गार प्रदान किया जाता है, जबकि अन्य दो योजनाएँ युवाओं के आर्थिक व सामाजिक विकास के लिये वेतन आधारित रोज़गार या स्वरोज़गार को बढ़ावा देती हैं।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय की उपर्युक्त योजनाओं के अतिरिक्त अन्य मंत्रालय व विभाग भी रोज़गार सृजन के लिये कार्यक्रमों एवं योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहे हैं, जो इस प्रकार हैं :
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): कौशल भारत मिशन के तहत देश भर के युवाओं के कौशल आधारित प्रशिक्षण के लिये ‘कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय’ पी.एम.के.वी.वाई. का संचालन कर रहा है। इसे ‘अल्पकालिक प्रशिक्षण’ पाठ्यक्रम तथा ‘रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग’ के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं के लिये लागू किया गया है।
  • प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने वर्ष 2008-09 में प्रारंभ किया था। यह एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और बेरोज़गार युवाओं के लिये गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोज़गार के अवसर सृजित करना है।
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