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स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी

(प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ 

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy : SMA) से पीड़ित मरीजों ने SMA से संबंधित दवा की लागत कम करने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के बारे में

  • क्या है : मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करने वाला वंशानुगत बीमारियों का एक समूह 
    • मोटर न्यूरॉन्स : यह मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी में विशेष तंत्रिका कोशिकाएं हैं जो हाथ, पैर, चेहरे, छाती, गले व जीभ में गति को नियंत्रित करती हैं।
  • लक्षण : श्वसन संक्रमण, स्कोलियोसिस (रीढ़ की अस्थि का असामान्य टेढ़ापन) और मांसपेशियों में संकुचन का अनुभव 
  • रूग्णता दर : जीवित जन्म वाले 10,000 नवजात शिशुओं में से एक में पाई जाती है।

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के प्रमुख कारण

  • जीन परिवर्तन : एस.एम.ए. का सबसे सामान्य रूप एक जीन में परिवर्तन के कारण होता है जिसे सर्वाइवल मोटर न्यूरॉन जीन 1 (SMN 1) के रूप में जाना जाता है।
  • आनुवांशिक कारण : एस.एम.ए. के अधिकांश मामलों का कारण व्यक्ति के माता-पिता से विरासत में मिले प्रभावित जीन हैं।

उपचार के लिए निदान परीक्षण विधियां

  • रक्त परीक्षण : जीन के उत्परिवर्तन या विलोपन (Deletation) की जांच के लिए
  • इलेक्ट्रोमायोग्राफी : संकुचन एवं विश्राम के दौरान मांसपेशियों की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए
  • नर्व कंडक्शन वेलॉसिटी : तंत्रिका की विद्युत संकेत भेजने की क्षमता का मापन
    • नर्व कंडक्शन वेलोसिटी (NCV) परीक्षण यह मापता है कि विद्युत आवेग किसी की तंत्रिका से कितनी तेजी से गुजरता है।
  • मांसपेशी बायोप्सी : एस.एम.ए. के समान लक्षणों वाली अन्य स्थितियों का निदान

उपलब्ध उपचार

  • ज़ोलगेन्स्मा : दो वर्ष से कम आयु के बच्चों के उपचार के लिए एक जीन थेरेपी 
    • इसकी लागत 17 करोड़ है।
  • स्पिनरज़ा : वयस्कों एवं बच्चों दोनों के उपचार के लिए
  • रिस्डिप्लाम : वयस्कों एवं बच्चों दोनों के उपचार के लिए

उपचार संबंधी मुद्दा

  • दुर्लभ बीमारी : भारत सरकार ने इसको दुर्लभ बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया है।
  • प्रतिवर्ष इस बीमारी से पीड़ित लगभग 8,000-25,000 बच्चे जन्म लेते हैं।
  • वित्तीय बोझ : इस बीमारी के उपचार के लिए अत्यधिक महँगी औषधियां एवं निदान परीक्षण सामान्य व्यक्ति के लिए वहनीय नहीं हैं।
    • इसीलिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से वित्तीय मदद के लिए केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

केंद्र सरकार का पक्ष 

  • केंद्र सरकार का तर्क है कि इस बीमारी की उपचार लागत सरकार की वित्तीय पहुंच से बाहर परे है।
    • एस.एम.ए. थेरेपी की लागत प्रतिवर्ष प्रति मरीज 50 लाख से लेकर 8 करोड़ तक है जबकि जीन थेरेपी की लागत प्रति मरीज 9 करोड़ से लेकर 30 करोड़ के बीच है। 
    • इसके परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष 6,400 करोड़ से लेकर 34,000 करोड़ तक का गैर-बजटीय राष्ट्रीय व्यय होता है।
  • केंद्र सरकार का सुझाव है कि वित्तीय सहायता के स्थान पर क्राउडफंडिंग और राज्य-स्तरीय हस्तक्षेप को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मानना है कि केंद्र सरकार का तर्क जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार की सुरक्षा के संवैधानिक दायित्व का परित्याग करता है।

आगे की राह

  • स्थानीय उत्पादन : उपलब्ध महँगी दवाइयों को पेटेंट की बाध्यता से मुक्त कर स्थानीय स्तर पर उनका उत्पादन करना
    • इससे रिस्डिप्लाम दवा 6,20,835 के स्थान पर प्रति वर्ष मात्र 3,024 रुपए में उपलब्ध हो सकती है।
    • पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 100 भारत सरकार को एक या एक से अधिक जेनेरिक निर्माताओं को जनहित में रिस्डिप्लाम का उत्पादन करने के लिए अधिकृत करने के लिए पर्याप्त शक्तियां प्रदान करती है।
  • नीति-निर्माण : सरकार को एस.एम.ए. के लिए निम्न लागत वाली जीन थेरेपी (स्पिनरज़ा) का विकल्प विकसित करने के लिए संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ समन्वय में अनुसंधान एवं विकास नीति तथा निधि के निर्माण की आवश्यकता 
  • निजी निवेश को प्रोत्साहन : इसके उपचार के लिए शोध कार्यों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना 
  • राष्ट्रीय रजिस्ट्री की स्थापना : एस.एम.ए. की जाँच के लिए उपाय करना और अन्य दुर्लभ बीमारियों के साथ-साथ एस.एम.ए. के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री की स्थापना करना
  • राष्ट्रीय खरीद पूल का गठन : एस.एम.ए. और अन्य सभी दुर्लभ बीमारियों के लिए दवा एवं निदान का राष्ट्रीय खरीद पूल स्थापित करना
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