हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रणाली के डिजिटलीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से वन केस वन डेटा पहल और सु सहाय(Su Sahay) एआई चैटबॉट की शुरुआत की है।
वन केस वन डेटा (One Case One Data) पहल के बारे में
यह भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और गति लाना है।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों, जिला न्यायालयों और तालुका स्तर की अदालतों के डेटा को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा गया है।
प्रत्येक वाद (Case) को एक विशिष्ट डिजिटल आईडी दी जाएगी। इससे मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और विवरण एक ही डिजिटल फाइल में सुरक्षित रहेंगे।
जब कोई मामला निचली अदालत से ऊपरी अदालत में अपील के लिए जाता है, तो रिकॉर्ड को दोबारा तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी। पुराना डेटा स्वतः ही अपडेट और एकीकृत हो जाएगा, जिससे केस हिस्ट्री को समझना सरल होगा।
यह प्रणाली विभिन्न अदालतों के डेटाबेस से जानकारी को स्वयं प्राप्त (Retrieve) कर उसका सत्यापन करेगी, जिससे कागजी कार्रवाई और मानवीय सत्यापन में होने वाली देरी समाप्त होगी।
आवश्यकतानुसार सरकारी विभागों और उच्च न्यायालयों को भी डेटा तक पहुंच प्रदान की जाएगी, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय बेहतर होगा।
सु सहाय (Su Sahay) एआई चैटबॉट के बारे में
न्याय प्रक्रिया को आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने हेतु सुप्रीम कोर्ट ने इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सहायक को लॉन्च किया है।
इसे सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर एकीकृत किया गया है, ताकि वादी (Litigants) अपनी केस संबंधी पूछताछ का तत्काल उत्तर पा सकें।
इस चैटबॉट का विकास राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के संयुक्त प्रयासों से किया गया है।
सु सहाय उपयोगकर्ताओं को अदालती सेवाओं के उपयोग, याचिका दायर करने की प्रक्रियाओं (Filing Procedures) और सामान्य न्यायिक प्रश्नों पर सटीक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
निष्कर्ष
ये दोनों पहल न केवल न्यायिक रिकॉर्ड के विखंडन (Fragmentation) को रोकेंगी, बल्कि तकनीक के माध्यम से न्याय तक पहुंच (Access to Justice) को और अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाएंगी। यह भारतीय अदालतों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।