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भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की संरचनात्मक चुनौतियाँ और समाधान

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में भारत सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2025–26 के लिए 43 नए मेडिकल कॉलेजों तथा 20,649 अतिरिक्त MBBS एवं पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों को मंजूरी दी है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली कमजोर बनी हुई है।

भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रमुख संरचनात्मक समस्याएँ

1. विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

  • The Health Dynamics of India 2022–23 Report के अनुसार ग्रामीण CHCs में लगभग 79.9% विशेषज्ञ पद रिक्त हैं। 
  • देशभर के 5,491 CHCs में जहाँ 21,964 विशेषज्ञों की आवश्यकता है, वहाँ केवल 4,413 विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। 
  • वर्ष 2014 के बाद 731 मेडिकल कॉलेजों में लगभग 72,627 PG सीटें बढ़ाई गईं, फिर भी विशेषज्ञों की कमी लगभग जस की तस बनी हुई है। 

यह दर्शाता है कि केवल मेडिकल सीटें बढ़ाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं होता।

2. कमजोर स्वास्थ्य प्रशासनिक ढाँचा

मेडिकल शिक्षा का विस्तार मुख्यतः निजी क्षेत्र में हुआ है।

  • 2025–26 के लिए स्वीकृत 43 नए मेडिकल कॉलेजों में : 
    • 27 निजी संस्थान हैं, 
    • 8 राज्य सरकारों के अधीन हैं, 
    • 8 कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) क्षेत्र से संबंधित हैं। 

निजी मेडिकल कॉलेज अपने छात्रों से भारी शुल्क लेते हैं, लेकिन उनके स्नातकों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। परिणामस्वरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञों की कमी बनी रहती है।

इसके अतिरिक्त, मेडिकल शिक्षा को सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जोड़ने वाली स्पष्ट राष्ट्रीय नीति का अभाव है।

3. ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने से डॉक्टरों की अनिच्छा

नवप्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में कार्य करने से बचते हैं।

इसके प्रमुख कारण हैं :

  • आधुनिक उपकरणों की कमी, 
  • अस्पतालों की खराब स्थिति, 
  • आवास सुविधाओं का अभाव, 
  • बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी, 
  • पेशेवर सहयोग और करियर विकास के सीमित अवसर। 

इसके कारण ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

4. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) की कमजोर स्थिति

एक CHC लगभग 1.6 से 2 लाख जनसंख्या के लिए प्रथम रेफरल इकाई के रूप में कार्य करता है।

प्रत्येक CHC में अपेक्षित हैं :

  • 30 बिस्तर, 
  • पाँच विशेषज्ञ : 
    • फिजिशियन, 
    • सर्जन, 
    • स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, 
    • शिशु रोग विशेषज्ञ, 
    • एनेस्थेटिस्ट। 

किन्तु विशेषज्ञों की भारी कमी के कारण अधिकांश CHCs केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की तरह कार्य कर रहे हैं।

वर्तमान स्थिति :

  • भारत में कुल 5,491 CHCs हैं, लेकिन उपलब्ध विशेषज्ञों के आधार पर केवल लगभग 882 CHCs ही पूरी तरह कार्यशील बनाए जा सकते हैं। 
  • अर्थात अधिकांश जिलों में प्रभावी रूप से केवल एक ही कार्यशील CHC उपलब्ध है।

5. बजटीय प्राथमिकताओं में असंतुलन

भारत का स्वास्थ्य बजट मुख्यतः पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर केंद्रित है, जैसे :

  • अस्पताल निर्माण, 
  • मेडिकल कॉलेज निर्माण, 
  • भवन एवं आधारभूत संरचना। 

लेकिन निम्न क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता :

  • दवाइयाँ, 
  • जांच सुविधाएँ, 
  • एम्बुलेंस सेवाएँ, 
  • आपातकालीन देखभाल, 
  • स्वास्थ्य कर्मचारियों का वेतन, 
  • उपकरणों का रखरखाव। 

केवल भवन निर्माण से स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार संभव नहीं है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए आवश्यक उपाय

1. PG मेडिकल शिक्षा को सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जोड़ना

पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा को CHCs एवं जिला अस्पतालों में उपलब्ध रिक्तियों से सीधे जोड़ा जाना चाहिए।

संभावित सुधार :

  • सरकारी सहायता प्राप्त PG सीटों को विशेषज्ञ पदों से जोड़ना। 
  • छात्रों से सरकारी सेवा हेतु बॉन्ड भरवाना। 
  • कठिन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में 10 वर्ष सेवा देने वालों को प्राथमिकता देना। 

इससे मेडिकल शिक्षा पर होने वाला सार्वजनिक निवेश सीधे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा।

2. ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की तैनाती को प्रोत्साहन

सरकार को ग्रामीण सेवाओं को आकर्षक बनाना होगा।

संभावित प्रोत्साहन :

  • अतिरिक्त वेतन एवं कठिनाई भत्ता, 
  • गुणवत्तापूर्ण आवास, 
  • बच्चों के लिए अच्छे विद्यालय, 
  • पदोन्नति एवं करियर विकास के अवसर, 
  • उच्च शिक्षा में प्राथमिकता। 

छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने Rural Medical Corps Scheme के माध्यम से इस दिशा में प्रयास किए हैं।

3. “All or None” तैनाती रणनीति अपनाना

विशेषज्ञ डॉक्टरों को अलग-अलग भेजने के बजाय पूरी टीम के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए।

इस रणनीति के अंतर्गत :

  • किसी CHC में या तो पाँचों विशेषज्ञ हों या कोई भी न हो। 

इससे :

  • टीमवर्क बेहतर होगा, 
  • कार्यभार संतुलित होगा, 
  • मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलेगी, 
  • सरकारी अस्पतालों पर जनता का विश्वास बढ़ेगा। 

4. कार्यात्मक आधारभूत संरचना का विकास

स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए।

प्राथमिकता वाले क्षेत्र :

  • स्टाफ क्वार्टर, 
  • ऑपरेशन थिएटर, 
  • लेबर रूम, 
  • ICU, 
  • 24×7 आपातकालीन सेवाएँ। 

बेहतर सुविधाएँ डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगी।

स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने हेतु सरकारी पहलें

1. मानव संसाधन विकास

उदाहरण :

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का विस्तार, 
  • नए मेडिकल कॉलेज, 
  • नर्सिंग संस्थानों की स्थापना। 

2. डिजिटल स्वास्थ्य सुधार

उदाहरण :-आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से डिजिटल हेल्थ आईडी एवं इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड। 

3. सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ

उदाहरण :-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य व्यय को कम करना। 

4. सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं निवारक देखभाल

उदाहरण :-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना। 

5. प्रशासनिक एवं नियामकीय सुधार

उदाहरण :-राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुधार। 

निष्कर्ष

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की समस्या केवल डॉक्टरों या मेडिकल कॉलेजों की कमी नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के बीच असंतुलन है। हर वर्ष हजारों विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होने के बावजूद ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्तियाँ बनी रहती हैं।

इस स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक है :

  • बेहतर प्रशासनिक ढाँचा, 
  • कार्यात्मक स्वास्थ्य सुविधाएँ, 
  • ग्रामीण सेवाओं के लिए प्रोत्साहन, 
  • सेवा-आधारित मेडिकल शिक्षा, 
  • विशेषज्ञों की प्रभावी तैनाती। 

मेडिकल शिक्षा को सार्वजनिक सेवा से जोड़कर ही भारत एक मजबूत, समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर सकता है।

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