हाल ही में भारत सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2025–26 के लिए 43 नए मेडिकल कॉलेजों तथा 20,649 अतिरिक्त MBBS एवं पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों को मंजूरी दी है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली कमजोर बनी हुई है।
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
यह दर्शाता है कि केवल मेडिकल सीटें बढ़ाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं होता।
मेडिकल शिक्षा का विस्तार मुख्यतः निजी क्षेत्र में हुआ है।
निजी मेडिकल कॉलेज अपने छात्रों से भारी शुल्क लेते हैं, लेकिन उनके स्नातकों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्य करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। परिणामस्वरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञों की कमी बनी रहती है।
इसके अतिरिक्त, मेडिकल शिक्षा को सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जोड़ने वाली स्पष्ट राष्ट्रीय नीति का अभाव है।
नवप्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में कार्य करने से बचते हैं।
इसके प्रमुख कारण हैं :
इसके कारण ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
एक CHC लगभग 1.6 से 2 लाख जनसंख्या के लिए प्रथम रेफरल इकाई के रूप में कार्य करता है।
प्रत्येक CHC में अपेक्षित हैं :
किन्तु विशेषज्ञों की भारी कमी के कारण अधिकांश CHCs केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की तरह कार्य कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति :
भारत का स्वास्थ्य बजट मुख्यतः पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर केंद्रित है, जैसे :
लेकिन निम्न क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता :
केवल भवन निर्माण से स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार संभव नहीं है।
पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा को CHCs एवं जिला अस्पतालों में उपलब्ध रिक्तियों से सीधे जोड़ा जाना चाहिए।
संभावित सुधार :
इससे मेडिकल शिक्षा पर होने वाला सार्वजनिक निवेश सीधे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा।
सरकार को ग्रामीण सेवाओं को आकर्षक बनाना होगा।
संभावित प्रोत्साहन :
छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने Rural Medical Corps Scheme के माध्यम से इस दिशा में प्रयास किए हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों को अलग-अलग भेजने के बजाय पूरी टीम के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए।
इस रणनीति के अंतर्गत :
इससे :
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र :
बेहतर सुविधाएँ डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगी।
उदाहरण :
उदाहरण :-आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से डिजिटल हेल्थ आईडी एवं इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड।
उदाहरण :-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य व्यय को कम करना।
उदाहरण :-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना।
उदाहरण :-राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुधार।
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की समस्या केवल डॉक्टरों या मेडिकल कॉलेजों की कमी नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के बीच असंतुलन है। हर वर्ष हजारों विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होने के बावजूद ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्तियाँ बनी रहती हैं।
इस स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक है :
मेडिकल शिक्षा को सार्वजनिक सेवा से जोड़कर ही भारत एक मजबूत, समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर सकता है।
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