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चीनी सब्सिडी विवाद 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, विश्व व्यापार संगठन (डब्लू.टी.ओ.) के विवाद समाधान पैनल ने चीनी सब्सिडी (सहायिकी) के मामले में अपना निर्णय दिया।

क्या है मामला?

  • वर्ष 2019 में तीन प्रमुख चीनी निर्यातक देशों (ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया और ग्वाटेमाला) ने विश्व व्यापार संगठन में भारत द्वारा गन्ना किसानों को डब्लू.टी.ओ. की निर्धारित सीमा से अधिक घरेलू समर्थन देने संबंधी नीतियों को चुनौती दी थी।
  • इस मामले में डब्लू.टी.ओ. ने भारत के विरुद्ध निर्णय देते हुए वैश्विक नियमों के अनुपालन का निर्देश दिया है। ध्यातव्य है कि ब्राज़ील के बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। 
  • ‘एनगोज़ी ओकोंजो-इवियाला’ डब्लू.टी.ओ. की महानिदेशक बनने वाली विश्व व अफ्रीका की पहली महिला हैं।

निषिद्ध निर्यात सब्सिडी

भारत ने चीनी मिलों को ‘निषिद्ध निर्यात सब्सिडी’ भी प्रदान की है। डब्लू.टी.ओ. बहुपक्षीय समझौते के अंतर्गत सदस्य देशों को उनके क्षेत्रों में स्थित संस्थाओं को निर्यात क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी पर कुछ सीमाएँ निर्धारित करता है। इसका उल्लंघन करके दी जाने वाली सब्सिडी को ‘निषिद्ध निर्यात सब्सिडी’ कहते है।

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