(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3: निवेश मोडल; उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।) |
संदर्भ
25 अगस्त 2025 को, चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक, एवरग्रांडे (Evergrande) के शेयर हॉन्ग कॉन्ग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्टकर दिए गए। यह कंपनी, जो वर्ष 2017 में 51 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन के साथ विश्व की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी थी, वर्ष 2021 में अपने पतन के बाद चर्चा में रही।
एवरग्रांडे कंपनी के बारे में
- एवरग्रांडे (China Evergrande Group) एक चीनी रियल एस्टेट कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी।
- इसके संस्थापक, ह्यूईका यान (HuiKa Yan), ने चीन के शहरीकरणऔर आवास की मांग के अभूतपूर्व उछाल का लाभ उठाया।
- कंपनी ने न केवल रियल एस्टेट में, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, वित्त, और खेल जैसे क्षेत्रों में भी विविधीकरण किया।
- वर्ष 2017 में, इसकी वैल्यूएशन लगभग 51 बिलियन डॉलर थी। कंपनी ने 280 शहरों में 1,300 से अधिक परियोजनाएं शुरू कीं, लेकिन इनमें से कई अधूरी रह गईं।
एवरग्रांडे का पतन
- वर्ष 2018 में विश्व की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी बनने के बाद, एवरग्रांडे वर्ष 2021 में भारी ऋण और नकदी संक टके कारण गिर गई।
- इसकी डीलिस्टिंग ने कंपनी के सार्वजनिक व्यापारिक इतिहास को समाप्त कर दिया।
- एवरग्रांडे के पतन ने चीन के रियल एस्टेट क्षेत्र में संकट को उजागर किया, जिसने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, बल्कि यह वैश्विक निवेशकों के लिए भी एक चेतावनी बन गया।
पतन के कारक
- उच्च-वित्त भार मॉडल : कंपनी ने बड़े पैमाने पर भूमि खरीद, अपार्टमेंट्स की प्री-सेल, और नकदी प्रवाह का उपयोग करके अगली परियोजनाओं को वित्तपोषित किया। यह मॉडल तब तक काम करता रहा जब तक सस्ता ऋण उपलब्ध था।
- तीन लाल रेखाएं नीति (Three Red Lines Policy): वर्ष 2020 में, चीनी सरकार ने डेवलपर्स के अत्यधिक उधारको नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू किए, जिसने एवरग्रांडे की नकदी तक पहुंच को सीमित कर दिया।
- संरचनात्मक समस्याएं : जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे बूढ़ी होती जनसंख्या और कई शहरी परिवारों के पास पहले से ही एक से अधिक संपत्तियां होने के कारण आवास की मांग कम हो गई।
- नकदी संकट : प्री-सेल मॉडल और कम नकदी भंडार ने कंपनी को कमजोर बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2021 में विदेशी ऋण पर डिफॉल्ट हुआ।
- धोखाधड़ी की जांच : कंपनी के अध्यक्ष पर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच और परियोजनाओं में अनियमितताओं ने स्थिति को और खराब किया।
एवरग्रांडे के पतन का प्रभाव
- आर्थिक प्रभाव : रियल एस्टेट क्षेत्र चीन की जीडीपी (GDP) का लगभग 25-30% हिस्सा था। इस संकट ने स्टील, सीमेंट, और अन्य संबद्ध उद्योगों को प्रभावित किया। स्थानीय सरकारों को भूमि बिक्री से होने वाली आय में कमी आई।
- उपभोक्ता विश्वास : लाखों खरीदारों के लिए अधूरी परियोजनाएं और संपत्ति में निवेश का मूल्यह्रास उपभोक्ता विश्वास को कमजोर करने का कारण बना।
- वैश्विक प्रभाव : विदेशी लेनदारों को भारी नुकसान हुआ, क्योंकि परिसमापन प्रक्रियामें केवल 255 मिलियन डॉलर की संपत्ति बेची गई, जबकि लेनदारों के दावे 45 बिलियन डॉलर तक पहुंचे।
- नीतिगत बदलाव : सरकार ने परियोजनाओं को पूरा करने और बंधक नियमों को आसान करने पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन पुराने विस्तार मॉडल (Perpetual Expansion Model) को पुनर्जनित (Revival) नहीं किया।
संपत्ति-केंद्रित विकास मॉडल (Property-Centric Growth Model) क्या है
संपत्ति-केंद्रित विकास मॉडल एक आर्थिक रणनीति है, जिसमें रियल एस्टेट विकास और शहरीकरण को आर्थिक वृद्धि का प्रमुख चालक माना जाता है। चीन में, यह मॉडल निम्नलिखित पर आधारित था:
- शहरीकरण : वर्ष 1960 में 16% से बढ़कर वर्ष 2024 में 66% शहरी जनसंख्या ने आवास की मांग को बढ़ाया।
- ऋण-आधारित वित्तपोषण : डेवलपर्स ने सस्ते ऋण का उपयोग करके बड़े पैमाने पर परियोजनाएं शुरू कीं।
- प्री-सेल मॉडल : अपार्टमेंट्स को निर्माण से पहले बेचकर नकदी प्रवाह उत्पन्न किया गया।
- स्थानीय सरकारों की आय : भूमि बिक्री से प्राप्त आय ने स्थानीय सरकारों को वित्तपोषित किया।
इसकी सीमाएं
इस मॉडल की निम्नलिखित सीमाएं उजागर हुईं:
- अति-ऋण : डेवलपर्स और सरकारों पर भारी ऋण का बोझ बढ़ा, जिसने वित्तीय स्थिरता को खतरे में डाला।
- जनसांख्यिकीय बदलाव : बूढ़ी होती जनसंख्या और संतृप्त आवास बाजार ने मांग को कम किया।
- अधूरी परियोजनाएं : लाखों खाली घर और अधूरी परियोजनाओं ने संसाधनों की बर्बादी को दर्शाया।
- उपभोक्ता विश्वास में कमी : संपत्ति मूल्यों में गिरावट ने घरेलू संपत्तिऔर उपभोक्ता खर्च को प्रभावित किया।
- वैश्विक जोखिम : विदेशी निवेशकों के लिए नुकसान ने वैश्विक विश्वास को प्रभावित किया।
अन्य देशों के लिए सबक
एवरग्रांडे का पतन अन्य देशों, विशेष रूप से भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए महत्त्वपूर्ण सबक प्रदान करता है:
- ऋण प्रबंधन : रियल एस्टेट क्षेत्र में अत्यधिक उधार को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम आवश्यक हैं।
- विविधीकरण : एकल क्षेत्रपर अत्यधिक निर्भरता के बजाय, अर्थव्यवस्था को विविध क्षेत्रों जैसे प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करना चाहिए।
- उपभोक्ता संरक्षण : प्री-सेल मॉडल में खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शी नीतियां लागू की जानी चाहिए।
- नैतिक निवेश : निवेशकों और नीति निर्माताओं को दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए, न कि अल्पकालिक लाभ पर।
- नैतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण : आर्थिक विकास को सामाजिक कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
एवरग्रांडे का पतन और डीलिस्टिंग चीन के संपत्ति-केंद्रित विकास मॉडल की विफलता का प्रतीक है। यह संकट दर्शाता है कि अनियंत्रित ऋण और एकल क्षेत्र पर निर्भरता दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल सकते हैं। भारत जैसे देशों के लिए, यह एक चेतावनी है कि आर्थिक नीतियां संतुलित और टिकाऊ होनी चाहिए।