संदर्भ
- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और उसमें कार्यरत नाविकों की सुरक्षा को गंभीर चिंता का विषय बना दिया है। बड़ी संख्या में वैश्विक समुद्री उद्योग में कार्यरत विशेष रूप से भारतीय नाविक इन जोखिमों से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों के आसपास टैंकरों और व्यापारिक पोतों पर बढ़ते हमलों ने वाणिज्यिक जहाजों के संचालन को अधिक खतरनाक बना दिया है।
- हाल के समय में कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु की खबरें सामने आई हैं। साथ ही, समुद्री उद्योग के विशेषज्ञों ने नाविकों के ‘अबंधन’ (Seafarer Abandonment) की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की है जिसमें जहाज मालिक अपने चालक दल एवं जहाज की जिम्मेदारी छोड़ देते हैं।
- विश्व स्तर पर समुद्री कार्यबल में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 15% है किंतु परित्यक्त नाविकों की संख्या में भारत का अनुपात सर्वाधिक पाया गया है। वर्ष 2025 में कुल 1,125 भारतीय नाविकों के परित्याग के मामले दर्ज किए गए जो वैश्विक स्तर पर दर्ज कुल मामलों का लगभग 18% है।
सीफेयरर एबैंडनमेंट की अवधारणा
- सीफेयरर एबैंडनमेंट उस स्थिति को दर्शाता है जब जहाज मालिक अपने चालक दल को आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करना बंद कर देते हैं और उन्हें जहाज पर ही असहाय छोड़ देते हैं। इसमें वेतन न देना, भोजन एवं पेयजल आपूर्ति रोकना, चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा नाविकों को उनके देश वापस भेजने की व्यवस्था न करना शामिल है।
- समुद्री श्रम अभिसमय (Maritime Labour Convention), 2006 के अनुसार यदि जहाज मालिक इन मूलभूत दायित्वों का निर्वहन नहीं करते हैं तो इसे औपचारिक रूप से ‘अबंधन’ की श्रेणी में रखा जाता है।
- प्राय: निम्न आय वर्ग से आने वाले नाविकों के लिए ऐसी स्थिति से निकलना कठिन हो जाता है क्योंकि वे नौकरी प्राप्त करने या प्रशिक्षण के लिए एजेंटों को पहले ही बड़ी राशि का भुगतान कर चुके होते हैं। इसके अतिरिक्त, कई बंदरगाहों के नियम या वीज़ा संबंधी प्रतिबंध उन्हें जहाज से उतरने की अनुमति नहीं देते हैं जिससे उन्हें बिना किसी सहायता के लंबे समय तक जहाज पर ही रहना पड़ता है।
नाविकों के परित्याग के प्रमुख कारण
- समुद्री परिवहन उद्योग में आर्थिक अस्थिरता इस समस्या का एक महत्वपूर्ण कारण है। बढ़ती परिचालन लागत, मालभाड़ा दरों में उतार-चढ़ाव, अत्यधिक कर्ज, दिवालियापन की स्थिति तथा भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई जहाज मालिक वित्तीय दबाव में आ जाते हैं।
- ऐसी परिस्थितियों में कुछ मालिक वेतन भुगतान, जहाज के रखरखाव और चालक दल की स्वदेश वापसी की व्यवस्था करने के बजाय उनसे संबंध समाप्त करना अधिक सुविधाजनक समझते हैं।
फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस प्रणाली की भूमिका
- नाविकों के परित्याग की समस्या को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक ‘फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस’ (Flag of Convenience: FOC) व्यवस्था है। इसके अंतर्गत जहाज ऐसे देशों में पंजीकृत किए जाते हैं जहाँ नियम अपेक्षाकृत उदार, कर की दर कम और श्रम सुरक्षा मानक कमजोर होते हैं।
- इस प्रणाली के कारण जहाज मालिक कई बार कड़े सुरक्षा और श्रम मानकों से बच निकलते हैं। साथ ही, FOC पंजीकरण वास्तविक स्वामित्व को छिपाने का अवसर भी देता है जिससे अनियमित या बेईमान ऑपरेटर कानूनी जवाबदेही से बचते हुए जहाज और चालक दल को छोड़ सकते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय परिवहन श्रमिक संघ (International Transport Workers’ Federation) के अनुसार वैश्विक व्यापारिक जहाजों के बेड़े का लगभग 30% हिस्सा FOC के अंतर्गत संचालित होता है। वर्ष 2024 में परित्यक्त जहाजों में से लगभग 90% FOC के ही तहत पंजीकृत थे। वर्ष 2025 में पनामा में सर्वाधिक एबैंडनमेंट के मामले सामने आए।
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क्या आप जानते हैं ?
फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस (FOC) एक व्यावसायिक प्रथा है जिसमें लागत कम करने, कठोर नियमों से बचने और कम करों का भुगतान करने के लिए जहाज मालिक के मूल देश के अलावा किसी अन्य देश में व्यापारिक जहाज को पंजीकृत किया जाता है।
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पश्चिम एशिया संकट का संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भविष्य में इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। इस क्षेत्र में कार्यरत शिपिंग कंपनियों पर आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधी दबाव बढ़ने से अधिक जहाजों तथा उनके चालक दल के परित्याग की आशंका व्यक्त की जा रही है।
भारतीय नाविकों से जुड़े हालिया उदाहरण
- हाल के वर्षों में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें भारतीय नाविक संघर्षग्रस्त या अस्थिर समुद्री क्षेत्रों में फँस गए।
- मार्च 2026 में एम.वी. मनाली (MV Manali) नामक जहाज पर कार्यरत 20 भारतीय नाविक तथा दो अन्य सदस्य ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह (Bandar Abbas Port) के पास बमबारी के दौरान जहाज पर फँस गए। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति साझा करते हुए बचाव की अपील की।
- ऐसी परिस्थितियों में प्राय: भोजन, ईंधन एवं पेयजल की कमी उत्पन्न हो जाती है जिससे चालक दल को बुनियादी आवश्यकताओं के लिए नजदीकी बंदरगाहों या बाहरी सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है।
परित्याग की घटनाओं वाले प्रमुख क्षेत्र
परित्याग की अधिकांश घटनाएँ उन समुद्री क्षेत्रों में होती हैं जो व्यापारिक दृष्टि से अत्यधिक व्यस्त या राजनीतिक रूप से अस्थिर हैं। इनमें प्रमुख रूप से तुर्कीये, संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी क्षेत्र के अन्य समुद्री मार्ग शामिल हैं।
भारतीय नाविकों की स्वदेश वापसी के प्रयास
वर्ष 2025 से 2026 के बीच 14 विभिन्न जहाजों से फँसे हुए 100 से अधिक भारतीय नाविकों को वापस लाया गया। ये जहाज विभिन्न बंदरगाहों में रुके हुए थे, जिनमें शारजाह (संयुक्त अरब अमीरात), टार्टस (सीरिया), शिनास (ओमान) व कतर शामिल थे।
भारतीय नाविकों की अधिक संवेदनशीलता के कारण
- भारत में अनेक लोग समुद्री क्षेत्र को बेहतर आय और आर्थिक उन्नति के अवसर के रूप में देखते हैं, विशेषकर छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में। समुद्री रोजगार से मिलने वाला वेतन स्थानीय आय की तुलना में कहीं अधिक होता है।
- हालांकि, इस क्षेत्र में फर्जी भर्ती एजेंटों की बढ़ती संख्या ने स्थिति को जटिल बना दिया है। कई एजेंट नकली नियुक्तियों, जाली प्रमाणपत्रों या अस्तित्वहीन नौकरियों के नाम पर भारी शुल्क वसूलते हैं जिससे युवा नाविक आर्थिक रूप से बोझिल हो जाते हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार कंटीन्यूअस डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (CDC) प्राप्त करने की अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया भी युवाओं में त्वरित रोजगार की अवास्तविक उम्मीदें पैदा करती है। परिणामस्वरूप उपलब्ध नौकरियों की तुलना में अधिक लोग इस क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं और कई नाविक जोखिमपूर्ण या कमजोर नियमन वाले जहाजों पर काम करने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
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इसे भी जानिए !
- कंटीन्यूअस डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (Continuous Discharge Certificate: CDC) नाविकों के लिए आवश्यक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक पहचान दस्तावेज़ है जिसे STCW अभिसमय के तहत अनिवार्य किया गया है। यह नाविक की समुद्री सेवा (जहाज का अनुभव) के आधिकारिक, कानूनी रिकॉर्ड के रूप में कार्य करता है जो जहाज पर सेवा, रोजगार व प्रशिक्षण को रिकॉर्ड करने के लिए ‘सीमैन के पासपोर्ट’ (Seaman’s Passport) की तरह काम करता है। इसे नाविक पहचान दस्तावेज़ (Seafarer's Identity Document) भी कहते हैं।
- प्रशिक्षण, प्रमाणन एवं निगरानी मानक (Standards of Training, Certification, and Watchkeeping: STCW) अभिसमय एक अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संधि है जो दुनिया भर के नाविकों के लिए न्यूनतम प्रशिक्षण, प्रमाणन और सुरक्षा मानकों को निर्धारित करती है। वर्ष 1978 में स्थापित यह समझौता सुनिश्चित करता है कि वाणिज्यिक जहाजों का चालक दल (Crew) सुरक्षित रूप से काम करने में सक्षम हो, जो समुद्री सुरक्षा और प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक है।
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नाविकों के लिए सुरक्षा और सहायता तंत्र
- परित्यक्त नाविकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय परिवहन श्रमिक संघ के निरीक्षकों से सहायता मिल सकती है। ये निरीक्षक वेतन विवादों के समाधान, कानूनी सहायता और स्वदेश वापसी की व्यवस्था में सहयोग प्रदान करते हैं।
- भारतीय नाविक आपात स्थिति में जहाजरानी महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) की 24 घंटे संचालित हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं। यह संस्था दूतावास सहयोग, आपातकालीन सहायता एवं शिकायत निवारण की सुविधा उपलब्ध कराती है।
- साथ ही, विशेषज्ञ नाविकों को यह सलाह देते हैं कि वे केवल वैध भर्ती एवं नियुक्ति सेवा लाइसेंसधारी (Recruitment and Placement Service Licensees: RPSL) के माध्यम से ही नौकरी स्वीकार करें, किसी एजेंट को अनावश्यक शुल्क न दें तथा अनुबंध की प्रामाणिकता की जाँच अवश्य करें।
- भारत में जहाजरानी महानिदेशालय जहाजों, जहाज मालिकों और भर्ती एजेंसियों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाता है ताकि समुद्री नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके तथा नाविकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।