संदर्भ
- कुपोषण भारत की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इसका प्रभाव केवल बच्चों के शारीरिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और भविष्य की उत्पादकता को भी प्रभावित करता है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने और पोषण को विकास के केंद्र में रखने के उद्देश्य से भारत सरकार ने मार्च 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की। इसका लक्ष्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर पोषण संबंधी सेवाओं को मजबूत करना और इसे जन आंदोलन का स्वरूप देना था।
- केंद्रीय बजट 2021-22 में पोषण से जुड़े कार्यक्रमों को एकीकृत करते हुए मिशन पोषण 2.0 के तहत एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया। इसमें पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाएं/एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) तथा किशोरियों के लिए योजना को एक साथ जोड़ा गया। पोषण अभियान में तकनीक आधारित निगरानी, जन लामबंदी और व्यवहार परिवर्तन पर जोर है, जबकि आंगनवाड़ी सेवाओं के माध्यम से पूरक पोषण, गर्म पका हुआ भोजन और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
नौवां राष्ट्रीय पोषण माह
- हर वर्ष सितंबर में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पोषण माह इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। वर्ष 2026 में नौवां राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में शुरू होगा।
- इस वर्ष की केंद्रीय थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” रखी गई है।
- इस थीम का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल सरकारी सेवा वितरण केंद्र के बजाय समुदाय की साझा जिम्मेदारी और भागीदारी का केंद्र बनाना है। देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच रखने वाला आंगनवाड़ी नेटवर्क बच्चों और माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराता है।
पोषण माह 2026 में पांच प्रमुख प्राथमिकता
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन
- पहली प्राथमिकता आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन है। बच्चों और परिवारों के भोजन में अनाज एवं बाजरा, दालें, फल-सब्जियां, नट्स और बीज तथा दूध एवं दुग्ध उत्पादों जैसे विभिन्न खाद्य समूहों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा। स्थानीय और सस्ती खाद्य सामग्री के इस्तेमाल से संतुलित आहार को बढ़ावा दिया जाएगा।
- आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्वस्थ एवं विविध व्यंजनों का प्रदर्शन, पोषण मेले, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों पर जागरूकता अभियान और पोषण वाटिका की उपज के प्रदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य परिवारों को व्यावहारिक और किफायती पोषण विकल्पों से परिचित कराना है।
ताजा और पौष्टिक गर्म भोजन
- दूसरी प्राथमिकता आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा, विविध और गर्म पका हुआ भोजन (एचसीएम) सुनिश्चित करना है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बाजरा, दालों और मौसमी सब्जियों से भोजन तैयार करने तथा साप्ताहिक मेनू रोटेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए एफएसएसएआई के सहयोग से एचसीएम का गुणवत्ता परीक्षण भी किया जाएगा। माता-पिता, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों की भागीदारी से सामुदायिक भोजन चखने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही
- तीसरी प्राथमिकता सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही है। 23 जून 2026 को जारी दिशानिर्देशों के अनुसार गठित आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां (एएमसी) इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन समितियों का उद्देश्य सेवा वितरण की निगरानी, समुदाय की भागीदारी और आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है।
- सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर एसएनपी मेनू बोर्ड प्रदर्शित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे लाभार्थियों को दिन-वार भोजन की जानकारी मिलेगी और सेवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी। एएमसी और माताओं की समितियां भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और मेनू के पालन की निगरानी में भी भाग लेंगी।
पोषण और प्रारंभिक बाल विकास
- चौथी प्राथमिकता बच्चे के पोषण और प्रारंभिक विकास के बीच संबंध को रेखांकित करती है। जीवन के पहले 1,000 दिनों में पर्याप्त पोषण और उत्तरदायी देखभाल मस्तिष्क के स्वस्थ विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। कुपोषण का असर बच्चे के संज्ञानात्मक, मोटर और सामाजिक-भावनात्मक विकास पर लंबे समय तक रह सकता है।
- 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए संशोधित होम विजिट शेड्यूलर के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता परिवारों को पोषण और प्रारंभिक उत्तेजना से जुड़ा परामर्श देंगे। विकासात्मक देरी वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और आरबीएसके टीमों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।
पीएमएमवीवाई के दस वर्ष
- पांचवीं प्राथमिकता प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) से जुड़ी है, जो वर्ष 2026 में दस वर्ष पूरे कर रही है। योजना का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आय सहायता देने के साथ मातृ पोषण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार को बढ़ावा देना है।
- राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पात्र गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की पहचान और पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। पीएमएमवीवाई की पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया के बारे में नागरिक जागरूकता बढ़ाने के साथ लंबित मामलों के निपटारे और डीबीटी में तेजी लाने का प्रयास होगा।
पोषण पखवाड़ा और जन आंदोलन
- पोषण को जन आंदोलन बनाने के प्रयास केवल सितंबर तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2026 में आठवां पोषण पखवाड़ा 9 से 23 अप्रैल तक आयोजित किया गया। इसका विषय था - “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास।” इस अभियान ने पोषण को केवल शारीरिक स्वास्थ्य से जोड़ने के बजाय मस्तिष्क विकास और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के साथ जोड़ने पर बल दिया।
- वर्ष 2025 के राष्ट्रीय पोषण माह में भी मातृ पोषण, शिशु एवं छोटे बच्चों का आहार, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर व्यापक अभियान चलाया गया था। देशभर में 20 से अधिक मंत्रालयों की भागीदारी से 14.33 करोड़ गतिविधियां आयोजित की गईं।
तकनीक से मजबूत होता पोषण तंत्र
- पोषण अभियान में तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पोषण ट्रैकर, जिसे 1 मार्च 2021 को लॉन्च किया गया था, आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी के लिए प्रमुख डिजिटल मंच बन चुका है। इसके माध्यम से बच्चों की उपस्थिति, ईसीसीई गतिविधियों और विकास निगरानी सहित विभिन्न सेवाओं का डेटा उपलब्ध होता है।
- 31 जुलाई 2026 तक देश में लगभग 13.99 लाख आंगनवाड़ी केंद्र, 13.30 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और करीब 8.94 करोड़ लाभार्थी इस व्यापक नेटवर्क से जुड़े थे। इनमें छह महीने से छह वर्ष तक के 7.2 करोड़ से अधिक बच्चे तथा लगभग 1.1 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं शामिल थीं।
स्वस्थ परिवार से स्वस्थ राष्ट्र
- मिशन पोषण 2.0 के माध्यम से भारत ने पोषण को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखने की दिशा में कदम बढ़ाया है। आहार विविधता, मातृ पोषण, प्रारंभिक बाल विकास, गर्म पका हुआ भोजन, सामुदायिक निगरानी और डिजिटल तकनीक, इन सभी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
- “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” केवल एक अभियान की थीम नहीं, बल्कि पोषण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश है। जब परिवार, समुदाय, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सरकार मिलकर बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण और देखभाल को प्राथमिकता देंगे, तभी स्वस्थ, सक्षम और कुपोषण-मुक्त भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिल सकेगा।