साझेदारी से प्रगति की ओर: सहकारी संघवाद का व्यवहारिक रूप
संदर्भ
“राज्यों का विकास होने पर भारत का विकास होता है” के आदर्श वाक्य को प्रतिबिंबित करते हुए, संघवाद स्थानीय आवश्यकताओं को 2047 के विकसित भारत और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अनुरूप ढालता है। केंद्र, राज्य, जिले और स्थानीय संस्थाएं संयुक्त रूप से समावेशी सार्वजनिक सेवाओं और अवसरों को बढ़ावा देते हैं।
संघीय संस्थानों के माध्यम से सह-निर्माण
नीति आयोग केंद्र-राज्य संवाद, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न सरकारी संस्थाओं के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है, ताकि एकतरफा दिशा-निर्देशों को सहयोगात्मक समस्या-समाधान से प्रतिस्थापित किया जा सके।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित शासी परिषद (जिसमें मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल शामिल हैं) ने 2026 में अपनी 11वीं बैठक में राज्य भागीदारी की पुष्टि की।
मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को व्यावहारिक रणनीतियों में परिवर्तित करता है, जिससे मंत्रालय, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय में सुधार होता है।
नीति आयोग ने क्षेत्रीय परामर्श का प्रदर्शन करते हुए 12 जून 2026 को नई दिल्ली में उत्तर-पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की।
दीर्घकालिक परिवर्तन के लिए संस्थागत क्षमता
राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) विजन 2047 के दस्तावेज तैयार करता है और योजना विभागों के भीतर परिवर्तन के लिए राज्य संस्थानों (एसआईटी) का निर्माण करता है।
महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (MITRA) और त्रिपुरा इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (TIFT) बहुविषयक नीति सुधारों को आगे बढ़ाते हैं।
गुजरात राज्य इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (जीआरआईटी) नीति आयोग के मॉडल का अनुसरण करते हुए ई-कचरा और स्थानिक-कंप्यूटिंग पर शोध पत्र प्रकाशित करता है।
राजस्थान और आंध्र प्रदेश एसआईटी के माध्यम से विजन 2047 को आगे बढ़ा रहे हैं वहीँ तमिलनाडु का एक्सपीरियंस सेंटर अलग-अलग सेक्टरों के बीच सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।
मेघालय सरकार की नवाचार प्रयोगशाला मानव विकास में सुधार करती है; इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) कलकत्ता ने त्रिपुरा की फार्मास्युटिकल नीति का समर्थन किया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने उत्तराखंड की निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की; एसएसएम साक्ष्य-आधारित संस्थागत निरंतरता को बढ़ावा देता है।
डिजिटल शासन के माध्यम से जमीनी स्तर पर परिणाम
2018 में शुरू किए गए आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) का लक्ष्य 28 राज्यों के 112 जिलों को शामिल करना है, जो 16% आबादी को कवर करते हैं।
एडीपी स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल, समावेशन, कौशल और बुनियादी ढांचे को तीन 'C' (अभिसरण (Convergence), सहयोग (Collaboration) और प्रतिस्पर्धा (Competition)” के माध्यम से ट्रैक करता है।
आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम 331 जिलों के 513 ब्लॉकों में विस्तारित है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर की अत्यंत विशिष्ट कमियों को दूर करना और साथ ही सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को स्थानीय स्तर पर लागू करना है।
22 भाषाओं में 'नीति फॉर स्टेट्स' और 'AI सारथी' जानकारी तक पहुँच आसान बनाते हैं तथा 'विकसित भारत स्ट्रैटेजी रूम' (VBSR) एनालिटिक्स को एक साथ लाता है।
क्षेत्रीय विकास रणनीति (एडीएस)/बीआईएसएजी-एन भू-स्थानिक डेटा को एकीकृत करती है; NITITARA 800 से अधिक जिलों/ब्लॉकों तक फैली हुई है, जिसे कुलगाम और कोंडागांव में मान्य किया गया है।
निष्कर्ष
सशक्त राज्य, मजबूत संस्थान और साझा सीख सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास को मूर्त रूप देते हुए विकसित भारत@2047 को साकार कर सकते हैं।