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भारतीय नौसेना में दो नए स्टील्थ फ्रिगेट शामिल

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास)

संदर्भ

  • हाल ही में भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में एक साथ दो नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘आईएनएस उदयगिरि’ और ‘आईएनएस हिमगिरि’ को नौसेना में शामिल किया।
  • यह पहली बार है जब दो अलग-अलग भारतीय शिपयार्ड से दो प्रमुख स्थलीय लड़ाकू जहाजों को एक साथ नौसेना में शामिल किया गया है।

आईएनएस उदयगिरि (प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट)

  • निर्माता: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई
  • श्रेणी: स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट (प्रोजेक्ट 17A, शिवालिक श्रेणी का अनुवर्ती)
  • विशेषताएँ:
    • अत्याधुनिक स्टील्थ विशेषताएँ, उन्नत सेंसर और हथियार
    • सतह, वायु-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध में सक्षम
    • बेहतर उत्तरजीविता और ऑटोमेशन 
  • नामकरण: आंध्र प्रदेश की एक पर्वत शृंखला के नाम पर
  • उदयगिरि को अपनी श्रेणी का सबसे तेज़ जहाज़ होने का गौरव भी प्राप्त है। यह भारतीय शिपयार्डों द्वारा अपनाई गई मॉड्यूलर निर्माण प्रक्रिया का परिणाम है।

आईएनएस हिमगिरि (प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट)

  • निर्माता: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता
    • जी.आर.एस.ई. द्वारा निर्मित पहला P-17A फ्रिगेट
  • विशेषताएँ: समान स्टील्थ, उन्नत हथियार, बहु-भूमिका क्षमता
  • इससे पूर्व समान नामकरण वाला INS हिमगिरि एक लिएंडर-श्रेणी का फ्रिगेट था जिसे वर्ष 1974 में कमीशन किया गया था और वर्ष 2005 में सेवामुक्त कर दिया गया था।

नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट

  • नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट का निर्माण प्रोजेक्ट 17 अल्फा कोडनेम के तहत किया जा रहा है। 
  • ये शिवालिक श्रेणी या प्रोजेक्ट 17 फ्रिगेट के अनुवर्ती संस्करण हैं जो वर्तमान में सेवा में हैं। 
  • इसी वर्ष जनवरी में कमीशन किया गया फ्रिगेट ‘आईएनएस नीलगिरि’ प्रोजेक्ट 17A के सात फ्रिगेट में से पहला था।
  • इस श्रेणी के सात जहाजों में से-
    • चार नीलगिरि, उदयगिरि, तारागिरि एवं महेंद्रगिरि एम.डी.एल. द्वारा निर्मित 
    • तीन हिमगिरि, दूनागिरि एवं विंध्यगिरि जी.आर.एस.ई. द्वारा निर्मित

रणनीतिक महत्त्व

  • अपने बहुमुखी हथियारों और क्षमताओं के साथ ये जहाज स्थल-रोधी युद्ध, वायु-रोधी युद्ध और पनडुब्बी-रोधी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • इस श्रेणी के जहाजों पर लगे हथियारों एवं उपकरणों में शामिल हैं : 
  • लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (LRSAM)
  • आठ लंबवत प्रक्षेपित सतह-से-सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें
    • बराक 8 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल
    • हल्के वजन वाली पनडुब्बी-रोधी टॉरपीडो
    • स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर (IRL)
    • 127 मिमी. मेन रोल गन
    • दो AK-630 रैपिड फायर गन
    • मल्टी मिशन सर्विलांस रडार, शक्ति इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट
    • एयरबोर्न अर्ली वार्निंग रडार
    • सतह निगरानी रडार एवं सोनार हम्सा (NG) 
  • ये ब्लू वॉटर रॉकेट समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला को अंजाम देने में सक्षम हैं।
  • यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लिए भारत के प्रयासों को दर्शाता है।
  • एम.डी.एल. एवं जी.आर.एस.ई. में निर्माणाधीन सात P-17A फ्रिगेट शृंखला का एक हिस्सा।
  • यह लंबी दूरी की मारक क्षमता, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध और स्टील्थ अभियानों के साथ नौसेना की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाता है।
  • ये दोनों युद्धपोत पूर्वी बेड़े में शामिल हो जाएंगे, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री हितों की रक्षा करने की देश की क्षमता अधिक मज़बूत होगी।

स्वदेशीकरण पर बल 

  • दोनों फ्रिगेट भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा आंतरिक रूप से डिज़ाइन किए गए हैं।
    • आई.एन.एस. उदयगिरि नौसेना के आंतरिक युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया 100वाँ जहाज है।
  • इन जहाजों में आधुनिक संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन संयंत्र, अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली और भारतीय निर्माताओं द्वारा विकसित उन्नत हथियारों तथा सेंसरों का एक समूह है।
  • लगभग 75% स्वदेशी सामग्री वाले ये जहाज सैकड़ों स्वदेशी सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम द्वारा समर्थित रक्षा निर्माण में सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।
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