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विष्णु प्रतिमा विवाद: सोशल मीडिया बनाम न्यायपालिका

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य; विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य व उत्तरदायित्व)

संदर्भ

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय में खजुराहो स्थित जवरी मंदिर के क्षतिग्रस्त भगवान विष्णु की प्रतिमा को पुनर्निर्मित या पुनर्स्थापित करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की मौखिक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया।

हालिया मामले के बारे में 

  • याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि जवरी मंदिर (खजुराहो समूह, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) में सात फुट ऊंची क्षतिग्रस्त विष्णु प्रतिमा को पुनर्निर्मित या पुनर्स्थापित करने का निर्देश दिया जाए। 
  • बी.आर. गवई व न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायालय का निर्णय

  • न्यायालय ने कहा कि यह क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियंत्रण में एक संरक्षित स्मारक है।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह इस प्रकार के मामले में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकती है और यह एक जनहित याचिका (PIL) के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

विवाद का कारण

  • सुनवाई के दौरान CJI गवई ने मौखिक रूप से कहा ‘यदि आप भगवान विष्णु के सच्चे भक्त हैं तो प्रार्थना और ध्यान करें, उनसे स्वयं कहें कि वे कुछ करें’।
  • इस टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सोशल मीडिया पर विवाद हो गया और इसे पंथनिरपेक्ष व्यवस्था में न्यायपालिका की संवेदनशीलता पर प्रश्न उठाने के रूप में प्रस्तुत किया गया।
  • हालाँकि, CJI गवई ने बाद में स्पष्टीकरण देते हुए कहाँ कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ और सभी धार्मिक स्थलों पर जाता हूँ। मैं वास्तविक सेक्युलरिज़्म में विश्वास करता हूँ।

प्रभाव और महत्व

  • यह प्रकरण दिखाता है कि सोशल मीडिया का प्रभाव किस प्रकार न्यायपालिका की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया कर सकता है।
  • यह न्यायपालिका के लिए सतर्क व संतुलित टिप्पणी करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे सोशल मीडिया की तीव्र प्रतिक्रियाएं सामाजिक और राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। यह पड़ोसी देशों (जैसे- नेपाल, बांग्लादेश) में सोशल मीडिया प्रतिबंध आदि के कारण उत्पन्न हिंसा व सरकार के पतन के उदाहरण से स्पष्ट है। 
  • CJI का यह स्पष्टीकरण न्यायपालिका की धर्मनिरपेक्ष छवि और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
  • यह घटना न्यायपालिका और समाज दोनों के लिए यह संदेश देती है कि संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ से जोड़कर समझना चाहिए, न कि सनसनीखेज रूप में।

जवरी मंदिर एवं विष्णु प्रतिमा : ऐतिहासिक अवलोकन

  • स्थान : जवरी मंदिर मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (वर्ष 1986 में शामिल) है।
  • कालखंड : यह मंदिर 10वीं-11वीं सदी में चंदेल वंश के शासनकाल में निर्मित हुआ।
  • समर्पण : यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। ‘जवरी’ का अर्थ जौ (Barley) है और माना जाता है कि मंदिर के पास जौ की खेती होती थी।
  • वास्तुकला शैली :
    • नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण
    • गर्भगृह, मंडप व शिखर में सुंदर नक्काशी
    • मंदिर का शिखर ऊँचा व सुंदर है जो खजुराहो की विशिष्टता है।
  • विष्णु प्रतिमा :
    • गर्भगृह में सात फुट ऊँची विष्णु प्रतिमा थी।
    • वर्तमान में प्रतिमा क्षतिग्रस्त है और यही मामला न्यायालय में लाया गया।
  • विशेषता :
    • खजुराहो के अन्य मंदिरों की तरह इसमें भी मूर्तिकला का समृद्ध प्रदर्शन है।
    • दीवारों पर देव-देवियों, नर्तकियों व मिथकीय कथाओं के चित्रण हैं।
  • संरक्षण :
    • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित
    • किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण या बदलाव ASI की अनुमति के बिना संभव नहीं है।
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