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मानसिक स्वास्थ्य पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 1 अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य विकारों का सामना कर रहे हैं। 

डब्लू.एच.ओ. की हालिया रिपोर्ट 

  • डब्लू.एच.ओ. द्वारा दो भागों ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ टुडे’ और ‘मेंटल हेल्थ एटलस 2024’ में प्रकाशित रिपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य में प्रगति के साथ ही दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण कमियों को भी उजागर करते हैं। 
  • ये रिपोर्ट्स 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाली गैर-संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने पर वर्ष 2025 संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय बैठक से पहले राष्ट्रीय रणनीतियों को सूचित करने तथा वैश्विक संवाद को आकार देने के लिए महत्त्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करेंगी।

लैंगिक भिन्नता 

  • रिपोर्ट दर्शाती है कि मानसिक स्वास्थ्य विकारों की व्यापकता लिंग के आधार पर भिन्न हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर महिलाओं पर इसका असमान प्रभाव पड़ता है। 
  • चिंता एवं अवसादग्रस्तता विकार पुरुषों व महिलाओं दोनों में मानसिक स्वास्थ्य विकारों के सबसे सामान्य प्रकार हैं।

प्रमुख परिणाम आत्महत्या 

  • आत्महत्या ‘एक विनाशकारी परिणाम’ लेकर आती है जो अकेले वर्ष 2021 में अनुमानित 7,27,000 लोगों की मृत्यु का कारण बनी। 
    • यह सभी देशों एवं सामाजिक-आर्थिक संदर्भों में युवाओं में मौत का एक प्रमुख कारण है। 
  • वैश्विक प्रयासों के बावजूद आत्महत्या मृत्यु दर को कम करने की प्रगति की स्थिति वर्ष 2030 तक आत्महत्या दर में एक-तिहाई की कमी लाने के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिए बहुत कम है। 
    • वर्तमान गति से उस समय सीमा तक केवल 12% की कमी ही हासिल की जा सकेगी।

आर्थिक प्रभाव 

  • मानसिक स्वास्थ्य विकारों का आर्थिक प्रभाव अप्रत्याशित होता है क्योंकि इसमें स्वास्थ्य देखभाल की लागत ज़्यादा होने के साथ ही इसकी अप्रत्यक्ष लागतें (जैसे- उत्पादकता में कमी) कहीं अधिक हैं। 
  • केवल अवसाद एवं चिंता से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष अनुमानित 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होता है। 
  • वर्ष 2024 मानसिक स्वास्थ्य एटलस में पाया गया है कि वर्ष 2020 से देश अपनी मानसिक स्वास्थ्य नीतियों और योजनाओं को मज़बूत बनाने में उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य का महत्त्व 

  • मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियाँ सभी आयु एवं आय स्तर के लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। 
  • ये दीर्घकालिक विकलांगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं जिससे स्वस्थ जीवन का ह्रास होता है। 
  • ये प्रभावित लोगों एवं परिवारों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की लागत में वृद्धि करते हुए  वैश्विक स्तर पर भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाती हैं। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाना सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है।
  • रिपोर्ट के निष्कर्ष मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच बढ़ाने, कलंक को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के मूल कारणों से निपटने के लिए निरंतर निवेश, मज़बूत प्राथमिकता एवं बहु-क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करते हैं।
  • यद्यपि कई देशों ने अपनी मानसिक स्वास्थ्य नीतियों और कार्यक्रमों को मज़बूत किया है किंतु लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने तथा उसे बढ़ावा देने के लिए सेवाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त निवेश व कार्रवाई की आवश्यकता है।

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में कमियाँ 

क़ानूनी सुधारों का अभाव 

  • रिपोर्ट के अनुसार यद्यपि कई देशों ने अपनी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित नीतियों को अद्यतन करते हुए अधिकार-आधारित दृष्टिकोण अपनाए हैं और स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान मानसिक स्वास्थ्य तथा मनोसामाजिक सहायता के लिए तैयारी में वृद्धि की है किंतु यह गति कानूनी सुधारों में तब्दील नहीं हुई है। 
  • बहुत कम देशों ने अधिकार-आधारित मानसिक स्वास्थ्य कानून को अपनाया या लागू किया है। केवल 45% देशों ने ही अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के पूर्ण अनुपालन में कानूनों का मूल्यांकन किया है।

मानसिक स्वास्थ्य पर निम्न निवेश 

  • यह रिपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य निवेश में चिंताजनक ठहराव को उजागर करती है। वर्ष 2017 से मानसिक स्वास्थ्य पर औसत सरकारी व्यय कुल स्वास्थ्य बजट का केवल 2% ही बना हुआ है। 
  • देशों के बीच असमानताएँ स्पष्ट हैं जहाँ उच्च आय वाले देश मानसिक स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति $65 तक व्यय करते हैं, वहीं निम्न आय वाले देश केवल $0.04 व्यय करते हैं। 

मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी 

  • मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की वैश्विक औसत संख्या प्रति 100,000 लोगों पर 13 है जबकि निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में इनकी भारी कमी है।
  • 10% से भी कम देश समुदाय-आधारित देखभाल मॉडल को पूरी तरह से अपना चुके हैं और अधिकांश देश अभी भी संक्रमण के शुरुआती चरण में हैं। 
  • अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल अभी भी मनोरोग अस्पतालों पर अत्यधिक निर्भर है जहाँ लगभग आधे मरीज अनैच्छिक रूप से भर्ती होते हैं।

प्राथमिक देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य एकीकरण का अभाव 

  • प्राथमिक देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य का एकीकरण बढ़ रहा है और 71% देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के पाँच मानदंडों में से कम-से-कम तीन को पूरा कर रहे हैं।
    • हालाँकि, आँकड़ों में अभी भी कमी है; केवल 22 देशों ने मनोविकृति के लिए सेवा कवरेज का अनुमान लगाने के लिए पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध कराए हैं। 
  • निम्न-आय वाले देशों में 10% से भी कम प्रभावित व्यक्तियों को देखभाल मिलती है जबकि उच्च-आय वाले देशों में यह संख्या 50% से भी अधिक है।

मानसिक स्वास्थ्य के मामले में भारत की स्थिति 

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में कलंक, सहायता व उपचार लेने में अनिच्छा और जनशक्ति की कमी प्रमुख चिंताएँ बनी हुई हैं।
  • भारत में इस क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे, जैसे- राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, शैक्षिक विकास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 
  • भारत में मानसिक स्वास्थ्य एवं उपचार के बारे में जागरूकता प्रसार के लिए केंद्रित कार्य किया जा रहा है।
  • भारत का प्रत्यक्ष मानसिक स्वास्थ्य बजट हाल के वित्तीय वर्षों में लगभग 1,000 करोड़ रहा है जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1,004 करोड़ आवंटित किए गए हैं। 

कमियाँ 

  • भारत का मानसिक स्वास्थ्य बजट मंत्रालय के बजट का लगभग 1% है जिसका एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय संस्थानों एवं कार्यक्रमों को जाता है। 
  • समुदाय-आधारित कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धन और आवंटित धन का प्रभावी उपयोग अभी भी चिंता का विषय है।
  •  उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की काफी कमी है। 
    • भारत में प्रति 100,000 लोगों पर लगभग 0.7 मनोचिकित्सक हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रति 100,000 लोगों पर 3 मनोचिकित्सकों के अनुशंसित अनुपात से काफी कम है।

आगे की राह 

  • डब्लू.एच.ओ. की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश देशों में प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, स्कूल-आधारित मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम कार्यक्रमों जैसी कार्यात्मक मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन पहल हैं।
  •  80% से अधिक देश अब आपातकालीन प्रतिक्रियाओं के हिस्से के रूप में मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता प्रदान करते हैं जो वर्ष 2020 में 39% से अधिक है।
  • बाह्य रोगी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ और टेली-हेल्थ अधिक उपलब्ध हो रही हैं, हालाँकि पहुँच अभी भी असमान है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन सरकारों और वैश्विक भागीदारों से दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों के प्रणालीगत परिवर्तन की दिशा में प्रयासों को तत्काल तीव्र करने का आह्वान करता है।
    • इसमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समान वित्तपोषण, मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और नीतिगत सुधार, मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल में निरंतर निवेश तथा समुदाय-आधारित, व्यक्ति-केंद्रित देखभाल का विस्तार शामिल है।
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