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जलवायु परिवर्तन का प्रजनन क्षमता पर प्रभाव 

(प्रारंभिक परीक्षा- पर्यावरणीय पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)
 

संदर्भ 

एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से बांझपन में वृद्धि हो रही है।

जलवायु परिवर्तन और प्रजनन क्षमता

  • जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता पर असर पड़ रहा है तापमान बढ़ने से बहुत से जीवों की प्रजनन क्षमता में गिरावट आ रही है और उनमें बांझपन बढ़ रहा है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के पारिस्थितिकीविदों ने एक नए अध्ययन में चेताया है कि कुछ प्रजातियों में गर्मी से होने वाले नर बांझपन के अनुमान को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने और अधिक बढ़ा दिया है।तापमान सहने को लेकर किये गए शोध ने प्राय: तापमान पर ध्यान केंद्रित किया है, जो जीवों के लिये घातक ही नहीं है बल्कि इससे जीवों के प्रजनन में आने वाली समस्या के बारे में भी पता चला है।

    शोध परिणाम

    • शोध में प्रकाशित 43 फ्रूट फ्लाई (ड्रोसोफिला) प्रजातियों के अध्ययन से पता चला कि लगभग आधी प्रजातियों के नरों में घातक तापमान से बांझपन की समस्या उत्पन्न हो रही है। उदाहरण के लिये, ड्रोसोफिला लुमेई नर में चार डिग्री या उससे ऊपर के तापमान पर बांझपन की समस्या आ जाती है। चार डिग्री उत्तरी इंग्लैंड और फ्रांस के दक्षिण में गर्मियों के बीच तापमान का अंतर होता है।
    • हालाँकि, यह बताने का कोई तरीका नहीं है कि कौन से जीव घातक तापमान तक प्रजनन करने में सफल होंगे और कौन से ठंडे तापमान पर निष्फल हो  जाएँगे। अत: बहुत सी प्रजातियों में उच्च तापमान के प्रति छिपी क्षमता हो सकती है जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया है। इससे संरक्षण प्रक्रिया में रुकावट आएगी क्योंकि यह  अनुमान लगाना कठिन हो सकता है कि पृथ्वी के गर्म होने पर कितनी प्रजातियाँ यह क्षमता विकसित कर सकेंगी।जलवायु परिवर्तन के दौरान तापमान से होने वाली प्रजनन हानि जैव विविधता के लिये एक बड़ा खतरा हो सकता है। सूअर, शुतुरमुर्ग, मछली, फूल, मधुमक्खियाँ और यहाँ तक कि इंसानों के भी उच्च तापमान पर प्रजनन क्षमता के नुकसान के बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध है। नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित यह अध्ययन जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता के नुकसान के बीच संबंधों को बेहतर ढंग से समझने के लिये और शोध करने की आवश्यकता पर जोर देता है।

        सुझाव

        • वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के कारण प्रजातियों को होने वाले नुकसान और उसके प्रभाव का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि प्रभावी संरक्षण रणनीतियों की योजना बनाई जा सके।
        • तत्काल उन जीवों की श्रेणी को समझने की आवश्यकता है जो प्रकृति में बढ़ते तापमान से प्रजनन क्षमता में होने वाली हानियों को झेलने की क्षमता रखते हैं।
        • बुनियादी आनुवंशिकी और शरीर क्रिया विज्ञान को भी समझने की आवश्यकता है ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि कौन से जीव असुरक्षित हैं और शायद इन चुनौतियों के लिये अधिक मजबूत पशुओं की नस्लों को पैदा कर सकते हैं।
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