बिहार अपनी समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ मनाए जाने वाले त्योहार सामाजिक एकता, आस्था और लोकजीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं।

छठ पूजा:-
- कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को मनाया जाता है।
- यह बिहार का सबसे प्रमुख व सर्वाधिक पवित्र त्योहार है।
- औरंगाबाद में देव तथा नालंदा में बड़गाँव में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
- दरभंगा के महिया ग्राम में इस अवसर पर मिथिला ग्रामोत्सव का आयोजन होता है।
- इस पर्व के दौरान डूबते सूर्य को तथा अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
होलिका दहन:-
- यह बसंत ऋतु में चैत्र मास के प्रथम दिन मनाया जाता है।
- चैत्र मास के प्रारंभ के पिछले दिन होलिका दहन किया जाता है
- जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- इस त्योहार में एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाया जाता है।
महाशिवरात्रि:-
- भगवान शिव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- यह पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।
तीज:-
- महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु हेतु किया जाता है।
- महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं।
- अविवाहित युवतियाँ अपनी इच्छानुसार वर पाने के लिए हरितालिका तीज का व्रत रखती हैं।
जीतिया:-
- महिलाओं द्वारा अपने संतान हेतु यह व्रत किया जाता है।
- यह पर्व आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है।
वट-सावित्री:-
- मिथिला क्षेत्र में विवाहित महिलाओं द्वारा सावित्री तथा ब्रहमा की पूजा जाती है।
- ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष को अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा:-
- दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रथम को मनाया जाता है।
- कृषि में संलग्न लोग इस दिन पशुओं की पूजा करते है।
चित्रगुप्त पूजा:-
- मुख्यतः कायस्थ समुदाय में प्रचलित इस पर्व में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष द्वितीया को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है।
भैया दूज:-
- भ्रातृ द्वितीय के नाम से भी प्रचलित यह त्योहार लड़कियां अपने भाईयों के सुख-समृद्धि एवं उसके दीर्घायु होने के लिए मनाती है।
गणगौर:
- यह बिहार में रहने वाले राजस्थानी लोगों द्वारा मनाए जाने वाला पर्व है।