संदर्भ
- भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। ओडिशा के तट पर स्वदेशी रूप से विकसित नेवल एंटी-शिप मिसाइल शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का सफलतापूर्वक साल्वो टेस्ट (Salvo Test) संपन्न हुआ।
- यह परीक्षण न केवल मिसाइल की सटीकता को दर्शाता है, बल्कि यह पहली बार है जब किसी हेलीकॉप्टर से एक के बाद एक दो मिसाइलें दागकर दुश्मन को चौंकाने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया है।
स्वदेशी शक्ति का उदय
- भारतीय नौसेना 1980 के दशक की ब्रिटिश सी ईगल मिसाइलों पर निर्भर थी। हालांकि वे मिसाइल प्रभावकारी थीं, लेकिन उनका 580 किलोग्राम का भारी वजन हेलीकॉप्टरों की मारक क्षमता को सीमित कर देता था। वस्तुतः एनएएसएम-एसआर को इसी कमी को दूर करने के लिए तैयार किया गया है।
एनएएसएम-एसआर मिसाइल के बारे में
- इसे हैदराबाद, पुणे और चंडीगढ़ की डीआरडीओ प्रयोगशालाओं ने निजी क्षेत्र और एमएसएमई के सहयोग से तैयार किया है, जो मेक इन इंडिया की ताकत को दर्शाता है।
- मात्र 380 किलोग्राम वजन होने के कारण अब हेलीकॉप्टर पहले की तुलना में अधिक मिसाइलें ले जा सकेंगे।
आधुनिक युद्ध की दो क्रांतिकारी तकनीकें
एनएएसएम-एसआर केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि एक स्मार्ट हथियार है। इसमें दो ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मिसाइल प्रणालियों की श्रेणी में खड़ा करती हैं :
1. मैन-इन-लूप गाइडेंस
- पारंपरिक दागो और भूल जाओ मिसाइलों के विपरीत, एनएएसएम-एसआर में टू-वे डेटा लिंक दिया गया है। इसका अर्थ है कि दागने के बाद भी हेलीकॉप्टर में बैठा ऑपरेटर मिसाइल के रास्ते को नियंत्रित कर सकता है।
- लाभ : यदि लक्ष्य अपनी जगह बदलता है या बीच में कोई नागरिक जहाज आ जाता है, तो मिसाइल का मार्ग बदला जा सकता है।
2. वॉटरलाइन हिट
- यह तकनीक मिसाइल को जहाज के सबसे कमजोर हिस्से - यानी पानी की सतह (वॉटरलाइन) पर प्रहार करने की शक्ति देती है।
- फायदा : जहाज के इस हिस्से में छेद होने से उसमें तेजी से पानी भरता है, जिससे दुश्मन का बड़ा से बड़ा युद्धपोत भी बहुत कम समय में जलमग्न हो सकता है।
साल्वो टेस्ट का सामरिक महत्व
युद्ध की स्थिति में दुश्मन के जहाज अत्याधुनिक डिफेंस सिस्टम (जैसे मिसाइल इंटरसेप्टर) से लैस होते हैं। साल्वो टेस्ट यानी एक साथ या बहुत कम अंतराल पर दो मिसाइलें दागने की क्षमता का प्रदर्शन यह सुनिश्चित करता है कि:
- एक साथ कई मिसाइलें आने पर दुश्मन का सुरक्षा घेरा उन्हें रोक नहीं पाता (Saturation Attack)।
- यह तकनीक वास्तविक युद्ध में लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट करने की गारंटी को कई गुना बढ़ा देती है।