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खुले समुद्रों में मत्स्य पालन के सतत दोहन हेतु प्राधि‍कार पत्र

संदर्भ 

हाल ही में केन्‍द्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने ओडिशा के भुवनेश्वर में खुले समुद्रों में मत्स्य पालन के सतत दोहन हेतु प्राधिकरण पत्र (एलओए) का शुभारंभ किया। साथ ही उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर ओडिशा डीप सी मिशन दस्तावेज़ का भी शुभारंभ किया। 

प्राधिकार पत्र (Letter of Authorization–LOA) के बारे में 

  • प्राधिकार पत्र (Letter of Authorization–LOA) भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के दिशा-निर्देश, 2025 के अंतर्गत एक अनिवार्य प्रावधान है। इसका उद्देश्य खुले समुद्र में मत्स्य गतिविधियों को विधिसम्मत, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं सतत बनाना है।
  • यह एलओए खुले समुद्र में मत्स्य पकड़ने अथवा उससे संबंधित गतिविधियों में संलग्न भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए जारी किया जाता है। यह पोत-विशिष्ट (Vessel-specific) तथा अहस्तांतरणीय (Non-transferable) होता है, जिससे प्रत्येक पोत की पहचान एवं गतिविधियों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। 
  • एलओए को आरईएएलसीआरएएफटी मत्स्यन पोत पंजीकरण पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है, जिसके माध्यम से आवेदन, सत्यापन, अनुमोदन तथा निगरानी की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी एवं ट्रैसेबल (Traceable) बन गई है। न्यूनतम शुल्क, सरल प्रक्रिया, ऑनलाइन नवीनीकरण तथा वास्तविक समय (Real-time) में आवेदन की स्थिति जानने जैसी सुविधाओं के कारण मछुआरों एवं पोत संचालकों के लिए अनुपालन अधिक सहज हो गया है।  

उद्देश्य:

  • यह पहल मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) तथा मत्स्य सहकारी समितियों को भी सशक्त बनाएगी। इसके माध्यम से उन्हें गहरे समुद्र एवं खुले समुद्र में सतत मत्स्य पालन में भागीदारी के अधिक अवसर प्राप्त होंगे, उच्च मूल्य वाली मत्स्य संपदा तक उनकी पहुंच बढ़ेगी तथा मछुआरों की आय में वृद्धि के नए अवसर सृजित होंगे। 
  • यह पहल मत्स्य क्षेत्र में डिजिटलीकरण एवं सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा देती है। एलओए की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध होने से सेवा प्रदायगी में दक्षता, पारदर्शिता, ट्रैसेबिलिटी तथा नियामकीय निगरानी में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारत में सतत एवं उत्तरदायी समुद्री मत्स्य प्रबंधन को नई गति मिलेगी।

ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन के बारे में 

  • ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) ओडिशा सरकार की एक प्रमुख नीली अर्थव्‍यवस्‍था पहल है।
  • इसका उद्देश्य राज्य की अपतटीय और गहरे समुद्र की मत्स्य पालन क्षमता को उजागर करना और ओडिशा को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और समुद्री निर्यात के एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है। 
  • आधुनिक मत्स्य पालन अवसंरचना, मूल्य श्रृंखला, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन और बाजार संपर्कों में निवेश के माध्यम से मिशन का लक्ष्य मछली उत्पादन बढ़ाना, रोजगार सृजित करना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना और समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास को गति देना है।

ओडिशा राज्य में मत्स्य उत्पादन  

  • भारत के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित ओडिशा देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों में से एक है, जिसके पास मीठे पानी, खारे पानी और समुद्री इकोसि‍स्‍टम सहित एक समृद्ध और विविध मत्स्य संसाधन आधार है। 
  • ओडिशा की लगभग 95 प्रतिशत आबादी मछली का सेवन करती है, जिसकी प्रति व्यक्ति खपत 19.16 किलोग्राम है। यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था, आजीविका, खाद्य सुरक्षा और निर्यात आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मत्स्य उत्पादन:  

  • 2025-26 तक ओडिशा ने 12.70 लाख मीट्रिक टन (एमटी) मछली का उत्पादन किया, जिससे राज्य भर में 16 लाख से अधिक मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका को संबल मिला।
  • राज्य में प्रचुर मात्रा में मत्स्य पालन संसाधन हैं, जिनमें लगभग 7.12 लाख हेक्टेयर मीठे पानी के संसाधन, 4.18 लाख हेक्टेयर खारे पानी के संसाधन और समुद्री मत्स्य पालन के लिए 24,000 वर्ग किलोमीटर का महाद्वीपीय शेल्फ क्षेत्र शामिल है। 
  • 2025-26 के दौरान मीठे पानी के मत्स्य पालन से मछली उत्पादन 8.27 लाख मीट्रिक टन, खारे पानी के जलीय कृषि से मछली उत्पादन 1.86 लाख मीट्रिक टन और समुद्री मत्स्य पालन से मछली उत्पादन 2.56 लाख मीट्रिक टन शामिल था।

खाद्य निर्यातक राज्य के रूप में ओडिशा: 

  • ओडिशा एक महत्वपूर्ण समुद्री खाद्य निर्यातक राज्य के रूप में उभरा है। 2025-26 के दौरान राज्य ने 5,428.67 करोड़ रुपये मूल्य का 1,00,897 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से झींगा और अन्य उच्च मूल्य वाली मत्स्य प्रजातियों का योगदान रहा। 
  • प्रमुख निर्यात-उन्मुख जिलों में बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर, पुरी, खुर्दा और संबलपुर शामिल हैं। मुख्य निर्यात झींगा और समुद्री मछली की विभिन्न किस्मों का होता है।  
  • ओडि़शा भारत सरकार के प्रमुख मत्स्य विकास कार्यक्रमों, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) में सक्रिय रूप से भागीदार रहा है। वर्ष 2020 से पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 1,301 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें जलीय कृषि विस्‍तार बीज और चारा अवसंरचना, मछली विपणन, शीत श्रृंखला विकास, जलीय पशु स्वास्थ्य, मछुआरा कल्याण, बीमा कवरेज और मत्स्य पालन अवसंरचना शामिल हैं। 
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