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बलिराजगढ़ स्थल

चर्चा में क्यों ? 

  • हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बिहार के बलिराजगढ़ स्थल पर नई खुदाई शुरू की है। यह स्थल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे गहरी पौराणिक और सांस्कृतिक परंपराएँ भी जुड़ी हुई हैं। 

बलिराजगढ़ के बारे में 

  • बलिराजगढ़ स्थल बिहार के मधुबनी जिले में स्थित है। 
  • स्थानीय लोककथाओं के अनुसार इसे पौराणिक राजा बलि की राजधानी माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि यह स्थल प्राचीन विदेह राज्य का एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र रहा होगा।
  • 1938 में इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने प्राचीन संस्मारक परिरक्षण अधिनियम, 1904 (Ancient Monuments Preservation Act, 1904) के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया। इसका यह दर्जा यह सुनिश्चित करता है कि इसे संरक्षित किया जाए और इसके अध्ययन को बढ़ावा मिले। 

पुरातात्विक खोज और खुदाई 

  • बलिराजगढ़ स्थल का पुरातात्विक अध्ययन अब तक पाँच चरणों में किया जा चुका है (1962–2014)।
  • खुदाई में मिली सांस्कृतिक परतें : 
    • नॉर्दर्न ब्लैक सॉइल (Northern Black Soil)
    • शुंग (Sunga) काल 
    • कुषाण (Kushan) काल 
    • गुप्त (Gupta) काल 
    • पाल (Pala) काल  
  • इन परतों से पता चलता है कि बलिराजगढ़ एक लंबे समय तक राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। वस्तुतः प्रत्येक काल के अवशेष हमें उस समय के प्रशासनिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन की जानकारी प्रदान करते हैं। 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बारे में 

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देश की पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण और शोध का प्रमुख संस्थान है। 
  • स्थापना : 1861, सर अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा। 
  • मुख्यालय : नई दिल्ली। 
  • स्वतंत्रता के बाद इसे प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act, 1958) के तहत वैधानिक निकाय बनाया गया।  
  • नोडल मंत्रालय : सांस्कृतिक मंत्रालय, भारत सरकार। 
  • कार्य :
    • प्राचीन स्मारकों और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का संरक्षण। 
    • देश में सभी पुरातात्विक गतिविधियों का नियमन। 
    • पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 (Antiquities and Art Treasure Act, 1972) के तहत प्राचीन कलाकृतियों का संरक्षण।
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