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ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान: किसानों के लिए नई उम्मीद

संदर्भ 

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मानसून पूर्वानुमान प्रणाली में एक बड़ा बदलाव किया है। अब पहली बार मानसून के आगमन का पूर्वानुमान ब्लॉक स्तर तक उपलब्ध कराया जाएगा। नई प्रणाली 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों को कवर करेगी। यह भारत के लगभग आधे ब्लॉकों के बराबर है।

ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान प्रणाली से संबंधित प्रमुख बिंदु  

  • अब तक मानसून के आने की जानकारी केवल राज्य या जिला स्तर तक ही दी जाती थी। लेकिन भारत जैसे विशाल और विविध मौसम वाले देश में केवल जिला स्तर का पूर्वानुमान कई बार पर्याप्त नहीं होता था। एक ही जिले में कुछ क्षेत्रों में बारिश शुरू हो जाती थी, जबकि दूसरे हिस्से सूखे रह जाते थे। ऐसे में किसानों को बुवाई का सही समय तय करने में कठिनाई होती थी। 
  • नई ब्लॉक-स्तरीय प्रणाली इसी समस्या को दूर करने के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य किसानों को उनके क्षेत्र के अनुसार अधिक सटीक जानकारी देना है, ताकि वे समय पर खेती से जुड़े निर्णय ले सकें। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के बारे में

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department - IMD) भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली प्रमुख एजेंसी है। 
  • यह मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान (Seismology) के लिए जिम्मेदार मुख्य संस्था है।
  • स्थापना : इसकी स्थापना 1875 में हुई थी।
  • मुख्यालय : इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इससे पहले इसका मुख्यालय क्रमशः कोलकाता, शिमला और पुणे में रह चुका है।
  • महानिदेशक : वर्तमान में इसके महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र हैं, जिन्हें 'साइक्लोन मैन ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है। 

क्यों जरूरी है ब्लॉक-स्तरीय पूर्वानुमान ?

  • भारत में मानसून का व्यवहार बहुत अनियमित माना जाता है। आमतौर पर लोगों को केवल यह जानकारी होती है कि किसी शहर या जिले में मानसून कब पहुंचेगा, जैसे मुंबई में लगभग 10 जून और दिल्ली में 29 जून के आसपास।
  • लेकिन किसी जिले में मानसून पहुंचने का मतलब यह नहीं होता कि उस जिले के हर गांव और ब्लॉक में बारिश शुरू हो गई है। कई बार जिला मुख्यालय में बारिश हो जाती है, जबकि आसपास के गाँव सूखे रहते हैं।  
  • किसानों के लिए यह अंतर बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बुवाई का समय सीधे बारिश पर निर्भर करता है। यदि किसान समय से पहले बुवाई कर दें और बारिश न हो, तो फसल को नुकसान हो सकता है। इसलिए स्थानीय स्तर का पूर्वानुमान खेती के लिए अधिक उपयोगी माना जा रहा है।  

नई प्रणाली कैसे काम करती है ?

  • नई प्रणाली दो मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के मिश्रण पर आधारित है। इन दोनों मॉडलों के परिणामों को मिलाकर अधिक सटीक पूर्वानुमान तैयार किया जाता है।
  • यह प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वैश्विक मौसम मॉडल और आईएमडी के लगभग 100 वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग करती है। 
  • केरल में मानसून के प्रवेश के बाद यह प्रणाली मानसून की आगे की यात्रा का अनुमान लगाती है और अगले चार सप्ताहों के लिए संभावित पूर्वानुमान जारी करती है। 
  • इस तकनीक को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology) द्वारा विकसित किया गया है। 

कृषि मंत्रालय की जरूरत के अनुसार तैयार हुई प्रणाली 

  • यह नई प्रणाली कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के विशेष अनुरोध पर विकसित की गई है।
  • मंत्रालय पहले से किसानों को साप्ताहिक मौसम सलाह देता है। नई प्रणाली को उसी व्यवस्था के अनुरूप बनाया गया है ताकि किसानों तक जानकारी आसानी से पहुंचाई जा सके।
  • आईएमडी ने नई व्यवस्था को किसानों के लिए पहले से मौजूद प्रणाली के साथ जोड़ने का प्रयास किया है, ताकि उन्हें अतिरिक्त बदलावों का सामना न करना पड़े।  

उत्तर प्रदेश के लिए विशेष मॉडल

  • आईएमडी ने उत्तर प्रदेश के लिए अलग से एक 10-दिवसीय उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानसून पूर्वानुमान मॉडल भी शुरू किया है।
  • यह मॉडल 1 किलोमीटर के स्तर तक मौसम की जानकारी देने में सक्षम है। यह उत्तर प्रदेश में स्थापित बड़ी संख्या में स्वचालित मौसम स्टेशनों के कारण संभव हो पाया है।
  • इन स्टेशनों से मिले आंकड़ों की मदद से मिथुन नामक मौसम मॉडल को अधिक सटीक बनाया गया है।
  • आईएमडी ने अन्य राज्यों को भी अपने मौसम स्टेशनों का डेटा साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि वहां भी इसी तरह की सटीक पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की जा सके। 

भविष्य की दिशा 

  • भारत में मौसम पूर्वानुमान अब केवल बारिश की जानकारी देने तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसका उद्देश्य किसानों और आम लोगों के लिए उपयोगी निर्णय आधारित जानकारी उपलब्ध कराना है। 
  • आईएमडी पारंपरिक मौसम मॉडलों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक डेटा तकनीकों को जोड़ रहा है। इससे भविष्य में और अधिक सटीक और स्थानीय स्तर के पूर्वानुमान संभव हो सकेंगे।
  • ब्लॉक-स्तरीय मानसून पूर्वानुमान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो यह भारत की कृषि व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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