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शिगेलोसिस (Shigellosis)

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में केरल में शिगेलोसिस (बैसिलरी पेचिश- bacillary dysentery) के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। यह एक संक्रामक जीवाणुजनित रोग है जो मुख्य रूप से आंतों को प्रभावित करता है और गंभीर दस्त का कारण बनता है।  

शिगेलोसिस (Shigellosis) के बारे में 

  • शिगेलोसिस एक संक्रामक संक्रमण है जो शिगेला नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। 
  • यह दुनिया भर में दस्त संबंधी बीमारियों के प्रमुख जीवाणुजनित कारणों में शामिल है। 
  • यह रोग किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है।

वाहक: 

  • मनुष्य ही इस बैक्टीरिया का एकमात्र प्राकृतिक वाहक और स्रोत माना जाता है। यही कारण है कि संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका प्रसार अपेक्षाकृत आसानी से हो सकता है। 
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों, बुजुर्गों तथा कुपोषण से ग्रस्त व्यक्तियों में यह संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

संक्रमण का प्रसार:

  • शिगेलोसिस संक्रमित व्यक्ति के साथ सीधे और निकट संपर्क के माध्यम से फैल सकता है।
  • इसका प्रसार मुख्य रूप से मल-मुख (फीकल-ओरल) मार्ग द्वारा होता है।
  • दूषित भोजन या असुरक्षित पानी के सेवन से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से भी यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।
  • कुछ परिस्थितियों में यौन संपर्क के माध्यम से भी शिगेलोसिस का संक्रमण हो सकता है।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी तथा हाथों की उचित सफाई न करने से संक्रमण के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।

प्रमुख लक्षण: 

  • शिगेलोसिस का सबसे प्रमुख लक्षण बार-बार होने वाला दस्त है। कई मामलों में मल के साथ रक्त या श्लेष्मा (म्यूकस) भी निकल सकता है और यह स्थिति कई दिनों तक बनी रह सकती है।
  • इसके अलावा रोगी में निम्नलिखित लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं -
    • पेट में दर्द और ऐंठन
    • बुखार
    • उल्टी की शिकायत
    • बार-बार शौच जाने की इच्छा महसूस होना, भले ही आँतें खाली हों
    • कमजोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) 

उपचार और बचाव:

  • गंभीर संक्रमण की स्थिति में चिकित्सक द्वारा आवश्यक दवाएँ दी जाती हैं, जिनमें एंटीबायोटिक्स शामिल हो सकते हैं।
  • रोग की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन आवश्यक है। 
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