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प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) : भूगोल + पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी + समसामयिक घटनाएँ
मुख्य परीक्षा (Mains) :
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- सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-II – शासन; सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप
- सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-III – कृषि; सिंचाई; पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
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चर्चा में क्यों ?
- वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून क्षेत्रीय असमानता का संकेत दे रहा है। उत्तर-पश्चिम, मध्य तथा दक्षिण भारत के कई भागों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिससे भूजल स्तर में गिरावट, फसल हानि तथा पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है।
- द हिन्दू के एक हालिया संपादकीय में कहा गया है कि भारत का जल संकट अब केवल सूखे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक जल सुरक्षा (Water Security) की चुनौती बन चुका है। इसमें सतत जल शासन, जल के कुशल उपयोग तथा जलवायु-अनुकूल नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

जल सुरक्षा (Water Security) क्या है ?
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के अनुसार, जल सुरक्षा से आशय ऐसी क्षमता से है जिसके माध्यम से किसी देश या समाज को पर्याप्त मात्रा में, स्वीकार्य गुणवत्ता वाला जल सतत रूप से उपलब्ध हो, ताकि आजीविका, मानव कल्याण, सामाजिक-आर्थिक विकास, पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण तथा जल-संबंधी आपदाओं से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जल सुरक्षा में शामिल हैं —
- सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता
- कृषि के लिए विश्वसनीय सिंचाई व्यवस्था
- भूजल का सतत प्रबंधन
- नदियों, झीलों एवं आर्द्रभूमियों का संरक्षण
- बाढ़ एवं सूखा प्रबंधन
- शहरी क्षेत्रों में कुशल जल आपूर्ति व्यवस्था
भारत में वर्तमान जल परिदृश्य
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4,000 अरब घन मीटर (BCM) वर्षा होती है, किंतु असमान वितरण, वर्षा का मौसमी स्वरूप तथा पर्याप्त भंडारण अवसंरचना के अभाव के कारण केवल लगभग 1,123 BCM जल ही उपयोग योग्य माना जाता है।
जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा जल प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था ने भारत को विश्व के सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त (Water-Stressed) देशों में शामिल कर दिया है।
1. मानसून पर अत्यधिक निर्भरता
- भारत की लगभग 75% वार्षिक वर्षा जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होती है।
- मानसून में देरी या वर्षा का असमान वितरण सीधे कृषि एवं जल उपलब्धता को प्रभावित करता है।
2. बढ़ता जल संकट
- भारत के पास विश्व के केवल 4% मीठे जल संसाधन हैं, जबकि यहाँ विश्व की लगभग 18% जनसंख्या निवास करती है।
- जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है।
3. भूजल संकट
- भारत विश्व में भूजल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।
- देश की 60% से अधिक सिंचाई तथा लगभग 85% ग्रामीण पेयजल की आवश्यकता भूजल से पूरी होती है।
- अत्यधिक दोहन के कारण अनेक राज्यों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।
4. जल का असमान वितरण
- पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी भारत में अधिक वर्षा होती है।
- पश्चिमी एवं प्रायद्वीपीय भारत में अक्सर सूखे जैसी स्थिति बनी रहती है।
भारत के जल संकट के प्रमुख कारण
1. जलवायु परिवर्तन
- बढ़ते तापमान से वाष्पीकरण में वृद्धि होती है।
- अनियमित वर्षा के कारण कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
- लंबे शुष्क काल के कारण भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) कम हो जाता है।
2. भूजल का अत्यधिक दोहन
- निःशुल्क अथवा रियायती बिजली के कारण अत्यधिक भूजल पंपिंग को बढ़ावा मिलता है।
- जल-अभाव वाले क्षेत्रों में भी धान एवं गन्ने जैसी अधिक जल मांग वाली फसलों की खेती की जाती है।
3. कृषि में जल का अकुशल उपयोग
- भारत के कुल मीठे जल का लगभग 80–85% कृषि क्षेत्र में उपयोग होता है।
- बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation) से बड़ी मात्रा में जल की बर्बादी होती है।
4. तीव्र शहरीकरण
- शहरों के विस्तार से प्राकृतिक जल पुनर्भरण क्षेत्र कम हो रहे हैं।
- कंक्रीट की सतहें वर्षा जल के भूमि में समावेशन को रोकती हैं।
- बढ़ती आबादी से शहरी जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है।
5. जल प्रदूषण
- औद्योगिक अपशिष्ट, बिना उपचारित सीवेज तथा कृषि रसायन नदियों एवं भूजल को प्रदूषित करते हैं।
- प्रदूषण के कारण उपयोग योग्य मीठे जल की उपलब्धता घट जाती है।
6. कमजोर जल शासन
- विभिन्न संस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों का बिखराव।
- भूजल संबंधी नियमों का कमजोर क्रियान्वयन।
- नदी बेसिन आधारित समेकित प्रबंधन का अभाव।
जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रमुख चुनौतियाँ
- वर्षा आधारित कृषि मानसून की अनिश्चितता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
- नदी जल बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद प्रभावी प्रबंधन में बाधा बनते हैं।
- अनेक जलभृत (Aquifers) अस्थिर एवं अत्यधिक दोहन की स्थिति में पहुँच चुके हैं।
- तेजी से बढ़ते शहरों में प्रत्येक गर्मी के मौसम में जल संकट उत्पन्न हो जाता है।
- जल प्रदूषण से जल शोधन की लागत तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं।
- बार-बार आने वाले सूखे एवं बाढ़ जल सुरक्षा को कमजोर करते हैं।
सरकारी पहल
1. जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission – JJM)
शुभारंभ : 15 अगस्त 2019
- जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराने हेतु प्रारंभ किया गया।
- इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना तथा ग्राम स्तर पर सतत जल प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
2. अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana – ATAL JAL)
शुभारंभ : 25 दिसंबर 2019
- विश्व बैंक की सहायता से संचालित यह योजना सात जल-संकटग्रस्त राज्यों में सामुदायिक भागीदारी आधारित भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देती है।
- इसमें जल बजट, भूजल पुनर्भरण, मांग-आधारित प्रबंधन तथा जलभृतों के सतत उपयोग पर बल दिया गया है।
3. जल शक्ति अभियान (Jal Shakti Abhiyan)
शुभारंभ : 1 जुलाई 2019
- जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन के लिए देशव्यापी अभियान।
- वर्ष 2021 से यह "कैच द रेन (Catch the Rain)" अभियान के रूप में "जहाँ गिरे, जब गिरे" (Where it Falls, When it Falls) के नारे के साथ संचालित किया जा रहा है।
4. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
शुभारंभ : 1 जुलाई 2015
- "हर खेत को पानी" तथा "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" के लक्ष्य पर आधारित।
- सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर), जलग्रहण क्षेत्र विकास तथा जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा देती है।
5. अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT)
शुभारंभ : 25 जून 2015
- शहरी जल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, वर्षा जल निकासी तथा हरित क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित।
- AMRUT 2.0 (1 अक्टूबर 2021) का उद्देश्य भारतीय शहरों को "जल सुरक्षित (Water Secure)" बनाना है।
6. राष्ट्रीय जल मिशन (National Water Mission – NWM)
शुभारंभ : 2011
- यह राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के आठ राष्ट्रीय मिशनों में से एक है।
- इसका उद्देश्य जल उपयोग दक्षता में 20% वृद्धि, समेकित जल संसाधन प्रबंधन तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
महत्वपूर्ण समितियाँ एवं रिपोर्ट
- नीति आयोग का Composite Water Management Index (CWMI): कई भारतीय शहरों में भूजल संकट की चेतावनी देता है तथा बेहतर जल शासन के महत्व को दर्शाता है।
- केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB): देशभर में भूजल स्तर की निगरानी करता है।
- केंद्रीय जल आयोग (CWC): सतही जल संसाधनों के प्रबंधन हेतु प्रमुख संस्था।
- UN-Water: वैश्विक जल सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
आगे की राह (Way Forward)
1. जल-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा
- फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन।
- शुष्क क्षेत्रों में मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती बढ़ाना।
- ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार।
2. भूजल शासन को मजबूत करना
- भूजल की अनिवार्य निगरानी।
- सामुदायिक जलभृत प्रबंधन।
- सिंचाई हेतु बिजली की युक्तिसंगत (Rational) कीमत तय करना।
3. वर्षा जल संचयन का विस्तार
- शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाना।
- पारंपरिक जल स्रोतों—तालाब, पोखर, बावड़ी एवं टैंकों—का पुनर्जीवन।
4. जल उपयोग दक्षता में सुधार
- उपचारित अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग।
- शहरी जल वितरण में रिसाव कम करना।
- जल-कुशल उद्योगों को प्रोत्साहन।
5. समेकित नदी बेसिन प्रबंधन
- प्रशासनिक सीमाओं के बजाय नदी बेसिन के आधार पर प्रबंधन।
- राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।
6. जलवायु-अनुकूल जल अवसंरचना
- विकेंद्रीकृत जल भंडारण प्रणालियों का निर्माण।
- बाढ़ के जल का भूजल पुनर्भरण हेतु उपयोग।
- जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन को मजबूत करना।
7. जनभागीदारी
- समुदाय आधारित जल संरक्षण को बढ़ावा देना।
- जल के जिम्मेदार उपयोग के प्रति व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना।
- पंचायतों एवं शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को सशक्त बनाना।
Quick Revision Capsule
परीक्षा से पहले याद रखें
- जल तनाव (Water Stress) की सीमा = 1,700 घन मीटर/व्यक्ति/वर्ष
- जल अभाव (Water Scarcity) = 1,000 घन मीटर/व्यक्ति/वर्ष
- पूर्ण जल अभाव (Absolute Scarcity) = 500 घन मीटर/व्यक्ति/वर्ष
- भारत के कुल मीठे जल का लगभग 80–85% कृषि क्षेत्र में उपयोग होता है।
- भारत: विश्व की 18% जनसंख्या, लेकिन केवल 4% मीठे जल संसाधन।
- भारत विश्व का सबसे बड़ा भूजल दोहन करने वाला देश है (वैश्विक कुल का लगभग 25%)।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारत की लगभग 75–80% वार्षिक वर्षा प्राप्त होती है।
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प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
प्रश्न. भारत में जल सुरक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए —
- भारत के पास विश्व के 18% मीठे जल संसाधन हैं।
- भारत में कृषि क्षेत्र लगभग 80–85% मीठे जल का उपयोग करता है।
- राष्ट्रीय जल मिशन (National Water Mission) राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के आठ मिशनों में से एक है।
- अटल भूजल योजना का मुख्य उद्देश्य समुद्री जल के विलवणीकरण (Desalination) को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं ?
A. केवल 2 और 3
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 1, 3 और 4
D. 1, 2, 3 और 4
मुख्य परीक्षा प्रश्न
"भारत का जल संकट अब केवल जल की कमी का विषय नहीं रह गया है, बल्कि जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ती मांग के बीच दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बन गया है।" भारत में जल सुरक्षा प्राप्त करने की प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा सतत जल संसाधन प्रबंधन के उपाय सुझाइए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. जल सुरक्षा (Water Security) क्या है ?
उत्तर: जल सुरक्षा का अर्थ है पेयजल, कृषि, उद्योग, पारिस्थितिकी तंत्र तथा आपदा प्रबंधन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित, किफायती एवं सतत जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
Q2. भारत जल सुरक्षा संकट का सामना क्यों कर रहा है ?
उत्तर: जलवायु परिवर्तन, भूजल का अत्यधिक दोहन, जल प्रदूषण, अकुशल सिंचाई, तीव्र शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या तथा वर्षा के असमान वितरण के कारण।
Q3. भारत में सबसे अधिक जल किस क्षेत्र में उपयोग होता है ?
उत्तर: कृषि क्षेत्र, जो देश के कुल मीठे जल का लगभग 80–85% उपयोग करता है।
Q4. भूजल प्रबंधन पर विशेष रूप से केंद्रित सरकारी योजना कौन-सी है ?
उत्तर: अटल भूजल योजना (ATAL JAL), जिसे वर्ष 2019 में प्रारंभ किया गया था। यह सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल संरक्षण एवं जलभृतों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देती है।
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