Indian Polity 23-Jul-2026
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने वैवाहिक विवादों के दौरान पत्नियों द्वारा अपने पतियों के नियोक्ताओं को शिकायत-पत्र भेजने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि यदि ऐसे पत्रों के कारण पति की नौकरी या पेशेवर प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव उसकी भरण-पोषण (मेंटेनेंस) देने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। यह विषय प्रतिष्ठा के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, वैवाहिक विवादों और न्यायिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
Indian Polity 22-Jul-2026
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के विरोध में लगभग 12,000 प्रदर्शनकारियों द्वारा जंतर-मंतर से संसद भवन तक आयोजित संसद मार्च के उपरांत नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई। पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति के अभाव का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग से पूर्व ही बैरिकेडिंग के माध्यम से रोक दिया गया।
Indian Polity 21-Jul-2026
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि माता-पिता के बीच घरेलू संबंध तनावपूर्ण हों, तब भी बालिग अविवाहित बेटी घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 20(1)(d) के तहत अपने पिता से उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता की मांग कर सकती है।
Indian Polity 17-Jul-2026
भारतीय न्यायपालिका ने जेल सुधारों और मानवाधिकारों की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।
Indian Polity 15-Jul-2026
हाल ही में जम्मू स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच के क्रम में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान स्थित सरगना हाफिज सईद के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है।
Indian Polity 13-Jul-2026
जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषदों (District Development Councils-DDCs) की स्थापना के बाद से स्थानीय शासन व्यवस्था को लेकर व्यापक राजनीतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक चर्चा होती रही है।
Indian Polity 11-Jul-2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखने का लोक सभा स्पीकर ओम बिरला का फैसला देश की न्यायपालिका और विधायी इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम है।
Indian Polity 09-Jul-2026
डिजिटल युग में इंटरनेट पर उपलब्ध व्यक्तिगत सूचनाएँ किसी व्यक्ति की पहचान एवं प्रतिष्ठा को दीर्घकाल तक प्रभावित कर सकती हैं, भले ही वह न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रिया में निर्दोष सिद्ध हो चुका हो। इसी संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालय ने भूल जाने के अधिकार (Right to be Forgotten) पर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए डिजिटल निजता, मानवीय गरिमा तथा खुली न्याय व्यवस्था के मध्य संतुलन स्थापित करने हेतु व्यापक संवैधानिक सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं।
Indian Polity 08-Jul-2026
भारत में जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन, विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण तथा सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण का आधार भी है। वर्ष 2027 की जनगणना कई दृष्टियों से ऐतिहासिक होगी। यह स्वतंत्र भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें पहली बार जनसंख्या गणना के साथ सभी वर्गों की जातियों का भी आधिकारिक आकलन किया जाएगा। साथ ही नागरिकों को स्वयं गणना (Self-enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा।
Indian Polity 07-Jul-2026
भारतीय न्यायशास्त्र का यह एक सर्वमान्य और सुदृढ़ सिद्धांत है कि विधि के शासन (Rule of Law) के अंतर्गत प्रत्येक आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) और विधिक प्रतिनिधित्व का अबाध अधिकार प्राप्त है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि इस मौलिक अधिकार से किसी भी नागरिक या आरोपी को वंचित करना न केवल अवैध और असंवैधानिक है, बल्कि यह कानूनी पेशे की नैतिक आचार संहिता (Professional Ethics) के भी पूर्णतः प्रतिकूल है।
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