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CURRENT AFFAIRS

न्यायिक सक्रियता और पूर्ण न्याय

Indian Polity 27-May-2026

हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय इन री: फालोदी दुर्घटना बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य (2025) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित यात्रा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का अभिन्न अंग घोषित किया है। न्यायालय का यह कदम भारतीय न्यायशास्त्र में पूर्ण न्याय (Complete Justice) सुनिश्चित करने की दिशा में एक नया मील का पत्थर है।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्चस्तरीय समिति

Indian Polity 27-May-2026

हाल ही में भारत सरकार ने अवैध आप्रवास और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से निपटने के उपायों पर सुझाव देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इससे पहले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2025 को हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन की घोषणा की थी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर, 2025 को इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी। 

अनुच्छेद 142 और “पूर्ण न्याय” संवैधानिक शक्ति या न्यायिक अतिक्रमण ?

Indian Polity 27-May-2026

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 में हुई दो सड़क दुर्घटनाओं का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया, जिनमें 34 लोगों की मृत्यु हुई थी। फलोदी दुर्घटना बनाम एनएचएआई और अन्य (2025) मामले में न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित यात्रा के अधिकार को अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) के अंतर्गत मौलिक अधिकार माना।

लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC):- भूमिका, महत्त्व एवं हालिया घटनाक्रम

Indian Polity 25-May-2026

हाल ही में पुनर्गठित लोक लेखा समिति (PAC) 2026-27 की पहली बैठक समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

फर्जी कानून डिग्रियों और वकीलों के ऑनलाइन आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

Indian Polity 23-May-2026

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अदालतों में वकालत कर रहे कथित फर्जी कानून डिग्री धारकों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

व्यक्ति की मौत के बाद बीमा भुगतान पर हाईकोर्ट ने पत्नी के दावे को माना

Indian Polity 22-May-2026

हाल ही में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्थायी लोक अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक मृतक व्यक्ति की पत्नी को ₹14.22 लाख की बीमा राशि देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायिक मौखिक टिप्पणियाँ और न्यायालयों की संस्थागत सीमाएँ

Indian Polity 21-May-2026

हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अदालती मौखिक टिप्पणियों ने यह बहस फिर तेज कर दी है कि न्यायाधीशों की अभिव्यक्ति की सीमा क्या होनी चाहिए और न्यायिक आचरण के मानदंड क्या हैं।

भारत के संघवाद की चुनौतियाँ और सहमति निर्माण की आवश्यकता

Indian Polity 20-May-2026

स्वतंत्रता के बाद से भारतीय संघवाद (Federalism) भारत के राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन रहा है।

भारत की न्यायपालिका में देरी: कोर्ट मैनेजरों की आवश्यकता

Indian Polity 20-May-2026

भारत की न्यायिक प्रणाली के सामने न्यायिक विलंब (Judicial Delays) सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है क्योंकि न्याय में देरी केवल वादकारियों (litigants) को व्यक्तिगत स्तर पर प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी पूरे समाज पर पड़ते हैं।

मतुआ समाज

Indian Polity 19-May-2026

हालिया अध्ययन के अनुसार, अलग-अलग समय पर पड़ोसी देश बांग्लादेश से भारत आए बहुसंख्यक मतुआ समाज के लोगों के समक्ष नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के अंतर्गत आवेदन करने में व्यावहारिक चुनौती आ रही है, क्योंकि उनके पास इसके लिए आवश्यक पर्याप्त दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं।   

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