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CURRENT AFFAIRS

भूल जाने का अधिकार (Right to be forgotten)

Indian Polity 09-Jul-2026

डिजिटल युग में इंटरनेट पर उपलब्ध व्यक्तिगत सूचनाएँ किसी व्यक्ति की पहचान एवं प्रतिष्ठा को दीर्घकाल तक प्रभावित कर सकती हैं, भले ही वह न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रिया में निर्दोष सिद्ध हो चुका हो। इसी संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालय ने भूल जाने के अधिकार (Right to be Forgotten) पर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए डिजिटल निजता, मानवीय गरिमा तथा खुली न्याय व्यवस्था के मध्य संतुलन स्थापित करने हेतु व्यापक संवैधानिक सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं। 

जातिगत जनगणना: कार्यप्रणाली, चुनौतियाँ, महत्त्व एवं आगे की राह

Indian Polity 08-Jul-2026

भारत में जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन, विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण तथा सामाजिक-आर्थिक नीतियों के निर्माण का आधार भी है। वर्ष 2027 की जनगणना कई दृष्टियों से ऐतिहासिक होगी। यह स्वतंत्र भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें पहली बार जनसंख्या गणना के साथ सभी वर्गों की जातियों का भी आधिकारिक आकलन किया जाएगा। साथ ही नागरिकों को स्वयं गणना (Self-enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा। 

विधिक प्रतिनिधित्व एवं निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार

Indian Polity 07-Jul-2026

भारतीय न्यायशास्त्र का यह एक सर्वमान्य और सुदृढ़ सिद्धांत है कि विधि के शासन (Rule of Law) के अंतर्गत प्रत्येक आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) और विधिक प्रतिनिधित्व का अबाध अधिकार प्राप्त है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि इस मौलिक अधिकार से किसी भी नागरिक या आरोपी को वंचित करना न केवल अवैध और असंवैधानिक है, बल्कि यह कानूनी पेशे की नैतिक आचार संहिता (Professional Ethics) के भी पूर्णतः प्रतिकूल है। 

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक फैसलों में एआई (AI) के अनियंत्रित उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी

Indian Polity 04-Jul-2026

मुख्य कारण: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेशों को इस बात का पता चलने के बाद खारिज कर दिया कि उन्होंने एक मामले का फैसला करते समय फर्जी, अस्तित्वहीन और एआई-जनित (हैलुसिनेटेड/काल्पनिक) न्यायिक मिसालों (precedents) पर भरोसा किया था।

एनसीडब्ल्यू महिला हेल्पलाइन :14490

Indian Polity 04-Jul-2026

आधुनिकीकरण के दौर में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण सुनिश्चित करना एक समावेशी और न्यायसंगत समाज के लिए आवश्यक है।

दूरसंचार अधिनियम, 2023

Indian Polity 04-Jul-2026

भारत के दूरसंचार क्षेत्र में एक ऐतिहासिक विनियामकीय बदलाव (Regulatory Shift) की नींव रखते हुए केंद्र सरकार ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत तीन महत्वपूर्ण नियमों को अधिसूचित कर दिया है।

ADR रिपोर्ट 2026: राज्यसभा के 31% सांसदों पर आपराधिक मामले, राजनीति के अपराधीकरण पर उठे गंभीर सवाल

Indian Polity 29-Jun-2026

हाल ही में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Association for Democratic Reforms-ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (National Election Watch-NEW) द्वारा जारी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्तमान राज्यसभा के लगभग 31 प्रतिशत सांसदों ने अपने चुनावी शपथपत्रों में स्वयं के विरुद्ध आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जबकि 16 प्रतिशत सांसद गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

भारत में ट्रॉमा केयर सिस्टम की पोल खुली: सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा में सभी राज्य फेल

Indian Polity 27-Jun-2026

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्यों में एक समान और प्रभावी ट्रॉमा केयर प्रणाली (Trauma Care System) विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता

Indian Polity 25-Jun-2026

हाल ही में विदेश मंत्रालय (MEA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता प्रमाणपत्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है।

रचनात्मक प्रतिन्याय (Doctrine of Constructive Res Judicata) -न्यायिक निर्णयों की अंतिमता का सिद्धांत

Indian Polity 25-Jun-2026

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि रचनात्मक प्रतिन्याय (Constructive Res Judicata) का उद्देश्य पक्षकारों को एक ही विवाद से जुड़े मुद्दों पर बार-बार या चरणबद्ध तरीके से मुकदमेबाजी करने से रोकना तथा न्यायिक निर्णयों की अंतिमता सुनिश्चित करना है।

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