CURRENT AFFAIRS

विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Special Executive Magistrate)

Indian Polity 27-Oct-2026

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के मामले ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की भूमिका और शक्तियों को चर्चा में ला दिया है। 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों कार्यकर्ताओं के जमानतदारों को स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर उनकी हिरासत तीन दिन बढ़ाने की मांग की थी। 

फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) विधेयक, 2026

Indian Polity 26-Oct-2026

हाल ही में भारत की राष्ट्रपति ने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे पहले नागालैंड विधानसभा ने इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था।  

विधान परिषद : चुनाव और प्रासंगिक

Indian Polity 24-Oct-2026

हाल ही में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनाव हुए

लद्दाख पंचायत चुनाव 2026: करगिल हिल काउंसिल भंग, आठ जिलों में 100 निर्वाचित सीटें अधिसूचित

Indian Polity 22-Oct-2026

लद्दाख प्रशासन ने 21 अक्टूबर 2026 को जिलों के पुनर्गठन के बाद लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद–करगिल (LAHDC–Kargil) को भंग कर दिया।

धर्म परिवर्तन और आरक्षण: तमिलनाडु के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Indian Polity 21-Oct-2026

धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का लाभ प्राप्त करने का प्रश्न एक बार फिर चर्चा में है। तमिलनाडु सरकार के वर्ष 2024 के उस आदेश को निरस्त किए जाने से अनुसूचित जाति (SC) की स्थिति और पिछड़े वर्ग (BC) के वर्गीकरण के बीच का अंतर स्पष्ट हुआ है, जिसके तहत इस्लाम अपनाने वाले कुछ व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम प्रमाणपत्र देने का प्रावधान किया गया था। यह मामला केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता से भी जुड़ा है।

शक्तियों का पृथक्करण और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का इनकार

Indian Polity 20-Oct-2026

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा विपक्षी नेताओं से मुलाकात का अनुरोध अस्वीकार करने का मामला न्यायिक स्वतंत्रता, न्यायिक औचित्य और शक्तियों के पृथक्करण जैसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक सिद्धांतों को रेखांकित करता है। यह घटनाक्रम बताता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखने और विवादों के समाधान के लिए स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना क्यों आवश्यक है। 

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों को आधिकारिक कार्यों के लिए आजीवन कानूनी छूट का मुद्दा

Indian Polity 16-Oct-2026

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों को आधिकारिक कार्यों के लिए आजीवन कानूनी छूट देने के प्रावधान को चुनौती दी गई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की याचिका ने संविधान के अनुच्छेद 14, कानून के समक्ष समानता और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। वस्तुतः लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। आयोग के प्रमुख और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को बिना किसी दबाव के काम करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। हालांकि, क्या इस स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आधिकारिक कार्यों के संबंध में आजीवन कानूनी छूट देना उचित है? यही सवाल अब न्यायिक बहस का विषय बन गया है।

महिला सशक्तीकरण और संपत्ति में बराबरी

Indian Polity 16-Oct-2026

महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं और आरक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने के समान अवसर देना जरूरी है। राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल ने कानूनी अधिकारों और उनकी जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को फिर उजागर किया है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कानून और योजनाएं लागू हैं, लेकिन संपत्ति के अधिकार, आर्थिक स्वतंत्रता और न्याय तक पहुंच में चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना अनिवार्य

Indian Polity 15-Oct-2026

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2026 में जसकरण जीत सिंह देओल बनाम पंजाब राज्य मामले में स्पष्ट किया कि यदि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराने के कारण किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अवैध घोषित कर दी जाती है, तो जांच एजेंसी उसे दोबारा गिरफ्तार करने के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेगी। अदालत ने लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच कराने और मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी को सौंपने का निर्देश देने की बात भी कही।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम: एफसीआरए

Indian Polity 14-Oct-2026

वैश्वीकरण ने लोगों, विचारों, प्रौद्योगिकी और वित्तीय संसाधनों के सीमापार आवागमन को बढ़ावा दिया है। अंतरराष्ट्रीय परोपकार और विकास साझेदारियों से भारत सहित विश्वभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत, अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों को लाभ मिला है।

upsc english
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT