Indian Polity 04-Jul-2026
मुख्य कारण: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेशों को इस बात का पता चलने के बाद खारिज कर दिया कि उन्होंने एक मामले का फैसला करते समय फर्जी, अस्तित्वहीन और एआई-जनित (हैलुसिनेटेड/काल्पनिक) न्यायिक मिसालों (precedents) पर भरोसा किया था।
Indian Polity 04-Jul-2026
आधुनिकीकरण के दौर में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण सुनिश्चित करना एक समावेशी और न्यायसंगत समाज के लिए आवश्यक है।
Indian Polity 04-Jul-2026
भारत के दूरसंचार क्षेत्र में एक ऐतिहासिक विनियामकीय बदलाव (Regulatory Shift) की नींव रखते हुए केंद्र सरकार ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत तीन महत्वपूर्ण नियमों को अधिसूचित कर दिया है।
Indian Polity 29-Jun-2026
हाल ही में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Association for Democratic Reforms-ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (National Election Watch-NEW) द्वारा जारी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्तमान राज्यसभा के लगभग 31 प्रतिशत सांसदों ने अपने चुनावी शपथपत्रों में स्वयं के विरुद्ध आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जबकि 16 प्रतिशत सांसद गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
Indian Polity 27-Jun-2026
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्यों में एक समान और प्रभावी ट्रॉमा केयर प्रणाली (Trauma Care System) विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
Indian Polity 25-Jun-2026
हाल ही में विदेश मंत्रालय (MEA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता प्रमाणपत्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है।
Indian Polity 25-Jun-2026
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि रचनात्मक प्रतिन्याय (Constructive Res Judicata) का उद्देश्य पक्षकारों को एक ही विवाद से जुड़े मुद्दों पर बार-बार या चरणबद्ध तरीके से मुकदमेबाजी करने से रोकना तथा न्यायिक निर्णयों की अंतिमता सुनिश्चित करना है।
Indian Polity 23-Jun-2026
देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of India) ने एक अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए देश के नागरिकों को एक नया संवैधानिक कवच दिया है। न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सुरक्षित और स्पष्ट रूप से सीमांकित फुटपाथों (Demarcated Footpaths) पर चलना अब केवल एक नागरिक सुविधा नहीं, बल्कि संविधान के भाग III के अंतर्गत मिला एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है। अपने निर्णय में अदालत ने साफ किया कि सड़कों पर चलने वाले राहगीरों का हक, गाड़ियों की आवाजाही से कहीं ऊपर है। इसके साथ ही कोर्ट ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Indian Polity 20-Jun-2026
हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि सुरक्षित एवं चिन्हित (demarcated) फुटपाथों पर चलने का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।
Indian Polity 18-Jun-2026
हाल ही में न्यायमूर्ति वी. मोहना की भारत के सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है।
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