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CURRENT AFFAIRS

पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल और राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता

Indian Polity 11-Sep-2026

भारत में राजनीतिक दल लोकतंत्र के प्रमुख संस्थान हैं, जो नागरिकों को प्रतिनिधित्व देने के साथ शासन और जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं। छोटे एवं नए दल स्थानीय व क्षेत्रीय आकांक्षाओं को स्वर देते हैं। हालांकि, राजनीतिक दलों के वित्तपोषण में पारदर्शिता का अभाव चिंता का विषय है। हालिया बीबीसी न्यूज़ हिंदी की जाँच के अनुसार, गुजरात के छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 2023-24 में लगभग ₹1,700 करोड़ का चंदा मिला, जो भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर पाँच राष्ट्रीय दलों के कुल ₹1,480 करोड़ से अधिक है। इससे राजनीतिक चंदे, कर छूट, वित्तीय पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की नियामकीय शक्तियों पर गंभीर सवाल उठते हैं। 

मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल अधिकार

Indian Polity 04-Sep-2026

हाल ही में कार्यस्थल और पेशेवर जीवन में महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर दो महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी क्षेत्र की एक महिला कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मातृत्व अवकाश के बाद उसके मूल अधिकारों और पद की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है, वहीं दूसरी तरफ प्रसिद्ध पहलवान विनेश फोगट की याचिका ने खेल जगत में महिला एथलीटों के लिए मातृत्व सुरक्षा और एक संरचित नीति की आवश्यकता को रेखांकित किया है।  

हिजाब और स्कूल ड्रेस कोड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

Indian Polity 27-Aug-2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने स्कूल के ड्रेस कोड के तहत कक्षा में सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति दिए जाने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी छात्रा द्वारा कई वर्षों तक स्कार्फ पहनकर स्कूल आने से उसे भविष्य में भी ऐसा करने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। 

केन-बेतवा लिंक परियोजना

Indian Polity 22-Aug-2026

बुंदेलखंड लंबे समय से पानी की कमी, अनियमित वर्षा, सीमित सिंचाई सुविधाओं और भूजल स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। इन समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी यह परियोजना केन नदी के पानी को बेतवा नदी के क्षेत्र तक पहुंचाने की योजना पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘उद्योग’ की परिभाषा में किया संशोधन: बेंगलुरु जल आपूर्ति मामला और ‘त्रि-परीक्षण’ की व्याख्या

Indian Polity 21-Aug-2026

सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने (बैंगलोर जल आपूर्ति एवं सीवरेज ... बनाम आर. राजप्पा एवं अन्य Bangalore Water Supply & Sewerage Board v. R. Rajappa (1978) मामले में दी गई “उद्योग” (Industry) की व्यापक व्याख्या में संशोधन किया है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ और लैंगिक समानता

Indian Polity 20-Aug-2026

भारत में विवाह केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी संबंध नहीं है, बल्कि यह परिवार, संपत्ति, उत्तराधिकार, सामाजिक सुरक्षा और व्यक्तिगत अधिकारों से भी जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए जब किसी धार्मिक व्यक्तिगत कानून के तहत बहुविवाह की अनुमति और उसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठता है, तो बहस केवल धर्म तक सीमित नहीं रहती। यह सवाल भी सामने आता है कि व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए। 

आदर्श पीड़िता’ की कसौटी: यौन हिंसा के मामलों में न्याय, पूर्वाग्रह और लैंगिक संवेदनशीलता

Indian Polity 20-Aug-2026

यौन हिंसा के मामलों में न्याय केवल इस बात से तय नहीं होता कि अपराध के समय क्या घटित हुआ। कई बार न्याय की प्रक्रिया में पीड़िता का व्यवहार, उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि, आरोपी के साथ उसके संबंध, घटना के तुरंत बाद उसकी प्रतिक्रिया और शिकायत दर्ज कराने में लगने वाले समय को उसकी विश्वसनीयता की कसौटी बना दिया जाता है।  

ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026

Indian Polity 19-Aug-2026

हाल ही में संसद द्वारा ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पारित किया गया है। यह विधेयक ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को निरस्त करता है और इसका मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के बीच लगभग एक दशक से चले आ रहे टकराव को समाप्त कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप न्यायाधिकरणों (Tribunals) की शासन प्रणाली को पुनर्गठित करना है। 

खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 : संघवाद और खनिज राजस्व का प्रश्न

Indian Polity 18-Aug-2026

भारत में खनिज संसाधन आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण और आधारभूत संरचना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, खनिज-समृद्ध राज्यों के लिए इनसे प्राप्त राजस्व विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 द्वारा राज्यों की खनिज अधिकारों एवं खनिज-युक्त भूमि पर कुछ लेवी लगाने की शक्ति को सीमित करना राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) और केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है।   

राज्य की शक्ति और नागरिक की स्वतंत्रता के बीच संतुलन

Indian Polity 17-Aug-2026

भारत में गिरफ्तारी केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राज्य की शक्ति और नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन का विषय है। विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2025) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों की प्रभावी और समझने योग्य जानकारी देना संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत अनिवार्य है। केवल परिजनों को सूचना देना या गिरफ्तारी ज्ञापन व अन्य दस्तावेजों में सामान्य विवरण दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। गिरफ्तारी के आधार इतने स्पष्ट होने चाहिए कि व्यक्ति अपनी कानूनी स्थिति समझ सके। इसका पालन न होने पर गिरफ्तारी और उसके आधार पर जारी रिमांड आदेश भी अवैध हो सकते हैं। 

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